नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

रतन लाल जाट की कविताएँ

  Capture13


कविता- विवाह से पहले
           रतन लाल जाट
सुना है आजकल
विवाह से पहले
मिलना-जुलना
और साथ रहना
किसी और के
आम बात है
फिर अन्त में
दिखावे के लिए
शादी कर लेते हैं
पर विवाह नहीं होता है
केवल निबाह होता है

00000000000000


नेक काम

कुछ नेक काम हो
जो मरने के बाद भी
याद किये जाये
धन-दौलत और
जमीन-जायदाद के तो
नये मालिक बन जाते हैं
फिर आपको याद
शायद ही किया जायेगा
इसलिए कुछ ऐसा करो
जो केवल और केवल
आपकी याद बने
हाथ से किया दान
या सेवार्थ किया कार्य
और दया-प्रेम भाव
जो हमेशा जिन्दा रहता है
आत्मकथा की तरह

00000000000000


कल जो उसने किया

पहले उसने भी खूब किये थे
काम कई सारे घिनौने
बहू-बेटियों के साथ
करता था गन्दी हरकतें
यहाँ तक कि रहा अपनी हवस
मिटाने की ताक में
अब उम्र ढल गयी
तो दूसरों को मौका मिल गया है
इसी के घर की बहू-बेटी को
अब वो मोहरे बनाकर
बाजी बराबर करने लगे
कल जो उसने किया
आज वही उसके साथ होने लगा है
अब किसी को कुछ कह भी नहीं सकता
क्योंकि उसने भी तो यही किया था पहले

00000000000000
आम जनता

अपने यहाँ के
वे लोग देखिए
जिन्हें आम जनता
और जागरूक मतदाता
नाम दिया जाता है
उन्हें प्रधानमंत्री या
मुख्यमंत्री के बारे में पूछिए
कुछ विशेष पता नहीं है
मुश्किल से केवल नाम सुना हुआ है
क्योंकि बहुत जगह पर
वो नाम बोलते हुए सुना है
लेकिन सरकार और अधिकार
किसी चिड़िया के नाम जैसा है
इनको विकास और वोट का
कुछ भी पता नहीं होता है
जब कोई पूछता है
अपने और गाँव-शहर के बारे में
तो कहते हैं हमको क्या पता है
क्या हो रहा है
और क्या होने चाहिए
यह इनके लिए
कोई सपना मात्र है
इतनी भोली-भाली जनता
जिसे खुद का नाम पता तक
ठीक तरह से मालूम नहीं है
उसके आगे जब सफेदपोश लोग
हाथ जोड़कर कुछ माँगते हैं
तो फिर इसे कुछ भी
शिकायत नहीं रह जाती है
और आँखें मुँदकर
भेड़चाल चलते हुए
तख्तऔताज बदल देती है

00000000000000

अभिनय


कितना बड़ा अभिनय
करता है मनुष्य
और कितने ही रहस्य
छिपाये रहता है मन
कोई कितना भी खास हो
चाहे हजारों बातें खुलकर
किसी को कह देता हो
लेकिन कुछ तो रह जाता है भीतर
जो शायद कोई किसी को नहीं कहता है
और कहना भी नहीं चाहिए
चाहे कितना ही विश्वास दिला दे
कई कसमें खाये या वादे करले
लेकिन सच है, मनुष्य परदा रखता है
वरना कोई भी किसी के साथ रहने से
इनकार कर देगा बड़ी आसानी से
इसीलिए यह अभिनय हमेशा
वास्तविक ही नजर आता है
और मन रहस्य को मामूली बात कह
बहुत भीतर दफना देता है
जिसे उसके और खुदा के सिवा
और कोई कभी नहीं जान सकता है
चाहे कोई कितना ही सच्चा हो
और कितना ही प्यार करता हो

00000000000000

मनमुटाव

उनके बीच कई दिनों से
परस्पर बातचीत बन्द है
तो लोग सोचते हैं कि
अब ये शायद ही कभी बोलेंगे
लेकिन सब उस वक्त
आश्चर्यचकित हो जाते हैं
जब वे देखते हैं कि
वे पल भर में ही
सारे गिले-शिकवे भूल गये
और ऐसा लग रहा था
मानो उनके बीच कुछ हुआ ही नहीं है
सच है कि वो बहुत लड़े-झगड़े थे
लेकिन इतनी आसानी से मिल जायेंगे
किसी ने सोचा भी नहीं था कभी
हर किसी को यकीन नहीं हो रहा है
लेकिन सबको यह पता नहीं
कि ये कभी दूर हुए ही नहीं थे
क्योंकि उनके दिल हमेशा एक थे
जो सब कुछ भूलकर वापस एक हो गए

00000000000000

तीज-त्योहार

तीज-त्योहार नाम मात्र रह गये
आम दिन उनसे खास हो गये
अपनों से दूर निकल आगे बढ़ चले
परायों पर जी-जान लगाने लगे
होली के रंग फीके हो गये
राखी के धागे टूट-से गये
दशहरा रावण दहन तक सीमित है
दीपावली पटाखों से काँपती है
अब हर रोज होली जलती है
जन्मों के बन्धन भी छूटने लगे हैं
नवरात्र में ही मंदिर नजर आते हैं
साफ-सफाई की दिलों में जरूरी है

00000000000000

विज्ञान
  
जादू विज्ञान के आविष्कार और सभ्यता के विकास का
देखिए, मानव को कितना आसान बदलकर रख दिया
दिलों की जगह मस्तिष्क बजाने लगा अपना डंका
ज़िन्दगी से पहले साँस का पाई-पाई मोल होने लगा
रिश्ते-नाते कल-पुर्जे बन गये
और इन्सान रोबोट या कम्प्यूटर हो गये
सब कल्पना को हकीकत मान बैठे
और भूख-प्यास मात्र हवा से मिटाने लगे
रात दिन की तरह नजर आने लगी
सर्दी पर गर्मी अपने पैर पसार बैठी
दुनिया में एक दुनिया सिमट गयी
या जेब में ही दुनिया बन्द हो गयी


00000000000000

भविष्य के दहलीज़ पर
            
अब आ पहुँचे हैं हम
भविष्य की दहलीज़ पर
खड़े हैं मूक बनकर
कोशिश जाने की लाँघकर
जहाँ सुनसान घर
दिखाई दे रहे हैं
और अनाथालय खचाखच भरे
नदी पर बने कल-कारखाने
मंदिर के नाम पर दवाघर हैं
और शादी की जगह समझौते
मनमानी आधुनिकता की आड़ में
विभाजित तन-मन हर घर में
गली-मोहल्ले में पसरा आतंक है
पास आने पर मिल रहे तमाचे
पानी में घुल रहे जहर मीठे
और अँधेरे में बुजुर्ग बिलख रहे
उजाले में बच्चे भटक रहे
दोनों के जिम्मेदार हाथ खड़े किये हुए
गर्त में उतरते नजर आ रहे
हवा कृत्रिम और पानी रंगीन
दिख रहे आकाश में बुझे सितारे
बिना अक्स के घूमती धरती है

00000000000000


कविता- वह क्या करे

इस शर्त पर
उसकी शादी मंजूर हुई है
कि सामने वाले
इसके भाई  के साथ
अपनी लड़की के हाथ पीले करे
वक्त आने पर
दोनों पक्षों ने वादे निभाये
वह बड़ी थी
तो जल्दी ससुराल भी भेजने लगे
उधर लड़की छोटी है
कहकर बहाने बनते गये
अब इसके दो बच्चे हैं
एक लड़का और एक लड़की
इसी बीच उसके
भाई या ननदोई की पत्नी या ननद
और पति या भाई के साला की
बहन जिससे इतने नाम जुड़े थे
वो किसी के साथ भागकर
नये रिश्ते जोड़ बैठी
तो उसको ससुराल से पीहर
बाल-बच्चों के साथ
भगा दिया गया
अब उसे यहाँ आकर
दोहरी जिम्मेदारी उठानी पड़ी
वहाँ के दुख यहाँ कहकर सह लेती
लेकिन यहाँ के दर्द किसे कहे
चुपचाप ज़िन्दगी काटने लगी
बच्चों को पालने लगी
कुछ समय बाद ही
भाई नयी पत्नी ले आया
जो घर आते ही
उसकी छाती पर मूँग दलती
और ताने मारकर कहती
अच्छी होती तो ससुराल वाले
लात मार क्यों भगाते
यह ससुराल नहीं
इस घर में नौकरानी बनकर रहे
नहीं तो नया रास्ता ढूँढ लो
वह क्या करे कहाँ जाये
कोई नहीं बताने वाला है
दूसरे भी हमदर्दी बनकर
उसे भूखी नजरों से देखते

--

     कवि परिचय
रतन लाल जाट
s/o रामेश्वर लाल जाट
गाँव- लाखों का खेड़ा
पोस्ट- भट्टों का बामनिया
तहसील- कपासन
जिला- चित्तौड़गढ़ (राज.)
पिन कोड- 312202

2 टिप्पणियाँ

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.