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प्राची अक्टूबर 2018 : लघुकथा // बड़ों की सीख // केदारनाथ सविता

लघुकथा

बड़ों की सीख
केदारनाथ सविता


"बेटा, तुम सरकारी दफ्तर में क्लर्क की नई नौकरी करने जा रहे हो। अभी तक तुमने कॉलेज में दिन बिताए हैं। दफ्तर का माहौल वहां से अलग होता है।”
कचहरी के पेशकार पद से रिटायर हुए रवि बाबू अपने पुत्र वत्सल को समझा रहे थे।


"दफ्तर में सबसे ज्यादा घुल मिल कर मत रहना। सहकर्मियों से डींग मत हांकना। आगे बढ़-बढ़ कर काम मत करना। अपनी योग्यता, जानकारी की बढ़-चढ़ कर सबसे चर्चा न करना। अन्यथा सारे काम तुमसे ही कराये जाने लगेंगे। कम्प्यूटर आदि के काम में भी तेजी न दिखाना। जो भी काम करने के लिए अधिकारी कहें तो बस यही कहना कि जी, आता तो नहीं पर अन्य साथियों से पूछकर सीखने व करने का प्रयास करूंगा।


"अक्सर ऐसा होता है कि जिसकी राइटिंग, ड्राफ्टिंग सुंदर होती है, उसी को सारा काम पकड़ा दिया जाता है। इसलिए संभल कर, फूंक-फूंक कर काम करना। कहना कि कॉलेज में यह सब सिखाया ही नहीं गया है। डरना मत। तुम्हारी नौकरी चयन समिति से लगी है। पक्की नौकरी है। कोई हटा नहीं सकता। कर्मचारियों का यूनियन है, किसी बात की चिंता मत करना। यूनियन तुमसे चंदा लेता है। वह तुम्हारे साथ है।”

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सीख को उसने गांठ बांध लिया.


वत्सल को नौकरी मिलते ही उसकी शादी के लिए दूर-दूर से प्रस्ताव आने लगे। दो वर्ष के अंदर ही वत्सल की शादी लखनऊ के पास की एम.ए. उत्तीर्ण कन्या निरुपमा से हो गई।
विदाई के समय निरुपमा की मां पुत्री को समझा रही थीं- "बेटी, ससुराल में जाते ही सबसे चहक कर न बोलना। जेठानी, देवरानी से भी बहुत घुल-मिल मत जाना। अन्यथा वे घर का सारा काम तुमसे ही करायेंगी। वहां किसी को भूल से भी मत बताना कि तुम्हें स्वेटर बुनने आता है, नहीं तो वे जाड़े भर ऊन का गोला ला-लाकर घर भर के सदस्यों का तुमसे स्वेटर बुनवायेंगे। सिलाई-कढ़ाई के गुणों का वहां बखान न करना, नहीं तो सिलाई मशीन खरीद कर घर भर के कपड़े- ब्लाऊज, पेटीकोट, नेकर, पैजामा आदि सिलवाने लगेंगे।


"ये जो कढ़ाई वाला चादर, रूमाल आदि तुम साथ में ले जा रही हो, वहां बताना कि तुम्हारी बुआ की पुत्री ने कढ़ाई किया है। अपना नाम कभी न लेना। नहीं तो तुम्हें वहां आराम करने की भी फुर्सत नहीं मिलेगी। सुबह-शाम सब खाना बनवायेंगे। दोपहर व रात में सिलाई-कढ़ाई करायेंगे। थक जाओगी।

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"तुम केवल खाना बनाने का काम बखूबी करना। अच्छा खाना बनाओगी तो अच्छा खाओगी। जब मैके वापस आना तब मोटी होकर आना। किसी बात की चिंता मत करना. कानून तुम्हारे साथ है। नारी उत्पीड़न दहेज और नारी हिंसा वाले कानून में फंसा देने की कभी-कभी ससुराल वालों को धमकी भी दे दिया करना। इससे सब तुमसे डर कर व दब कर रहेंगे।’’
बहू ने भी सीख अपनी गांठ बांध ली.

सम्पर्क : पुलिस चौकी रोड, लालडिग्गी
सिंहगढ़ गली (चिकाने टोला)
मीरजापुर- 231001 (उ.प्र.)

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