नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 101 // मुआवज़ा // दीपा पाण्डेय

प्रविष्टि क्रमांक - 101


clip_image002

दीपा पाण्डेय

मुआवज़ा


कार्बेट नेशनलपार्क से जुड़े हुए गांव में सुबह से हलचल शुरू हो गयी ।

“आज जानवर न खोलना, एक बाघ इधर आ गया है, खेतों में छुपा है ”हरकारा आवाज लगाता घूम रहा था ।

“छोटू आज कोई भी गाय न खोलना ,दुधारू जानवर हैं .बाघ ने शिकार कर लिया तो ये लोग मुआवजा दे कर परे हट जायेंगे । नुकसान तो हमारा ही होगा न” मनोहर अपने बेटे को समझा कर बोला ।

“कहाँ हो मनोहर ? मुनादी सुनी क्या ?” रामलाल ने झोपडी के अहाते में प्रवेश कर हांक लगाई ।

“आओ बैठो ,रामलाल ,ये बाघ भी बड़ी आफत हैं, अब जानवरों को बांध कर चारा डालो ।एक काम और बढ़ गया इनकी देखभाल का ”

“अरे तेरा दूध का कारोबार कितना बढ़िया चल रहा हैं ।थोड़ा देखभाल तो बनता हैं न ”

“ वो सब तो ठीक हैं पर एक गाय बाँझ निकल गयी ।बड़ा नुकसान हो गया मेरा ”

“ अब व्यापार में तो नफा ,नुकसान लगा ही रहता हैं ” रामलाल इधर उधर की कह सुन कर चला गया ।

“मुनादी सुनी क्या” ? अब की रमा काकी थी दरवाज़े पर ।

“ हाँ काकी सुन ली ,तुम बैठो ,छोटू चाय चढ़ा दे ,काकी तुम्हारी बहु हाट गयी हैं। आती होगी ”

“छोटू की शादी कब कर रहें हो मनोहर? कहो तो रिश्ते ढूँढना सुरु करूं ”।

“तुम्हारी पतोहू के क्या हाल हैं काकी ?”

“ अरे बाँझ निकल गयी ।पांच साल हो गये चूहे का बच्चा तक न जना उसने,अब उसका भी कुछ उपाय करना पड़ेगा ”।

“क्या मतलब ?”

“ अरे यही कि दूसरा बियाह रचाऊँगी अपने पोते का ,इसे रहना है ,तो चाकर बनकर पड़ी रहें, नहीं तो अपने मायके चली जाएँ ”

“ हाँ sss काकी ,बाँझ बहु का तो उपाय हैं छुटकारा पाने का मगर बाँझ गाय का क्या करूं ” मनोहर ने निःस्वास भरी ।.

काकी चली गयी। मनोहर देर तक सोचता रहा .फिर मुस्कुरा उठा ।.

“ छोटू सारे जानवर अंदर कर कुंडा मार दे और श्यामा को खेतों की तरफ हांक दे ”।

--

प्रेषक : दीपा पाण्डेय


सम्प्रति :- स्वतंत्र लेखन

संपर्क :- ppandey1960@gmail.com

5/523 , VIKAS NAGER , ALIGANJ ,LUCKNOW

1 टिप्पणियाँ

  1. आदरणीय महोदय, आपकी रचना सराहनीय है विनम्र निवेदन है कि लघुकथा क्रमांक 180 जिसका शीर्षक राशि रत्न है, http://www.rachanakar.org/2019/01/2019-180.html पर भी अपने बहुमूल्य सुझाव प्रेषित करने की कृपा कीजिए। कहते हैं कि कोई भी रचनाकार नहीं बल्कि रचना बड़ी होती है, अतएव सर्वश्रेष्ठ साहित्य दुनिया को पढ़ने को मिले, इसलिए आपके विचार/सुझाव/टिप्पणी जरूरी हैं। विश्वास है आपका मार्गदर्शन प्रस्तुत रचना को अवश्य भी प्राप्त होगा। अग्रिम धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.