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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 37 // एकता की शक्ति - सविता मिश्रा 'अक्षजा'

 

प्रविष्टि क्रमांक - 37

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सविता मिश्रा 'अक्षजा'

एकता की शक्ति-


मकान बनाने के लिए ईंटें कम पड़ गयी थीं। और ईंटों के इंतजार में काम बंद हुआ पड़ा था। इसी बीच, उन बची हुई ईंटों के मध्य घमासान वाक् युद्ध शुरू हो गया था। जो पास पड़ी हुई सीमेंट की बोरियों को भी सुनाई पड़ रहा था। लेकिन बोरियाँ, ईंटों के उस आपसी झगड़े में नहीं पड़ना चाहती थीं। इसलिए इत्मीनान से शांत बैठीं वो, ईंटों की आपसी लड़ाई समाप्त होने की बाट जोह रही थीं।

अजब बात तो यह थी कि ईंटों पर कुछ न कुछ लिखा हुआ था। किसी पर डॉक्टर, किसी पर इंजीनियर, किसी पर मजदूर, तो किसी पर फौजी। किसी पर किसान, किसी पर पुलिस तो किसी पर नेता और किसी पर शिक्षक। शायद इसी के कारण तू-तू, मैं-मैं अब गंभीर रूप ले चुका था।

सब अपनी-अपनी महत्ता का बखान करने में लगे थे। इन सभी ईंटों को लगता था कि उनके सहयोग के बिना दीवार, नहीं खड़ी हो सकती है। उनमें से एक ने भी असहयोग किया, तो बनी हुई पूरी की पूरी दीवार, भरभराकर गिर पड़ेगी।

अपनी लड़ाई का अंत होता न देख ईंटें, सीमेंट के पास जाकर बोलीं- “तुम ही बताओ कि किसकी महत्ता अधिक है ?”

सुनकर सीमेंट बोला- “निर्माण में तो मेरी महत्ता अधिक है।”

सीमेंट की बात सुनकर सब ईंटें एक दूसरे को हतप्रभ हो देखने लगीं। सीमेंट उनके खुले हुए मुख की तरफ देख, कारण समझता हुआ फिर बोला- “लेकिन नहीं, हम सब मिलकर ही अपना महत्व बरकरार रख सकते हैं । हम अलग-अलग होंगे, तो वो पाँच-लकड़ियों की कहानी तो सुने हो न, वही हाल होगा। संघ में ही शक्ति है ।”

ईंटों के बीच सन्नाटा पसर गया था। वे सब चुप हो, सीमेंट की बात को ध्यान से सुन रही थीं।
ईंटों की चीख-चिल्लाहट से अब तक सहमा बालू, सीमेंट के हस्तक्षेप करते ही धीरे से बोला – “मैं भी तो हूँ !"
“हाँ भई ! तुम्हारे बिना भी, हम लोगों का कोई महत्व नहीं। आम आदमी के बिना तो दो कदम भी चलना मुश्किल है।” सीमेंट के मुख से यह सुनकर, बालू भी गर्व से इठलाने लगा।

सीमेंट आगे बोला- “देश को ताकतवर बनाने के लिए हर एक ईंट के साथ, बालू भी जरूरी है और सबको साथ में बांधे रखने के लिए, मैं भी बहुत जरूरी हूँ। यानी कि एक मज़बूत सिस्टम। इसलिए तुम सब अपने मन से यह बात निकाल दो कि सिर्फ तुम ही तुम जरूरी हो। सभी ईंटें ये बातें सुनकर, एक नई ऊर्जा के साथ निर्माण कार्य में लग गयीं।
सविता मिश्रा ‘अक्षजा’

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संक्षिप्त परिचय
सम्पूर्ण नाम - सविता मिश्रा 'अक्षजा'
जन्मतिथि एवं जन्मस्थान... १/६/७३ / इलाहाबाद
शिक्षा -ग्रेजुएट
व्यवसाय..गृहणी (स्वतन्त्र लेखन )
लेखन की विधाएँ - लेखन विधा ...लेख, लघुकथा, व्यंग्य, संस्मरण, कहानी तथा
मुक्तक, हायकु -चोका और छंद मुक्त रचनाएँ।
प्रकाशित पुस्तकें - .पच्चीस के लगभग सांझा-संग्रहों में हायकु, लघुकथा और कविता तथा कहानी प्रकाशित।
प्रकाशन विवरण .. 170 के लगभग रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं तथा बेब पत्रिकाओं में छपी हुई हैं रचनाएँ।दैनिक जागरण- भाष्कर इत्यादि कई अखबारों में भी रचनाएँ प्रकाशित।
पुरस्कार/सम्मान -  "महक साहित्यिक सभा" पानीपत में २०१४ को चीफगेस्ट के रूप में भागीदारी।
"कलमकार मंच" की ओर से "कलमकार सांत्वना-पुरस्कार" जयपुर (३/२०१८)
"हिन्दुस्तानी भाषा साहित्य समीक्षा सम्मान" हिंदुस्तान भाषा अकादमी (१/२०१८)
‘शब्द निष्ठा लघुकथा सम्मान’ २०१७ अजमेर,  ‘शब्द निष्ठा व्यंग्य सम्मान’ २०१८ अजमेर में।
जय-विजय वेबसाइट द्वारा लघुकथा विधा में 'जय विजय रचनाकार सम्मान'  लखनऊ (२०१६)
बोल हरयाणा पर प्रस्तुत ‘परिवेश’ नामक कथा,
"आगमन समूह" की आगरा जनपद की उपाध्यक्ष,
गहमर गाजीपुर में 'पंडित कपिल देव द्विवेदी स्मृति' २०१८ में सम्मान से सम्मानित।


डाक का पता - सविता मिश्रा
w/o देवेन्द्र नाथ मिश्रा (पुलिस निरीक्षक )
फ़्लैट नंबर -३०२ ,हिल हॉउस
खंदारी अपार्टमेंट , खंदारी
आगरा २८२००२

ईमेल - 2012.savita.mishra@gmail.com

1 टिप्पणियाँ

  1. आदरणीय महोदय, आपकी रचना सराहनीय है आदरणीय महोदय, आप हमारे मार्गदर्शक हैं, अनुभवी हैं, आपकी सलाह, सुझाव हमारे लिये बहुत महत्वपूर्ण हैं। इसलिए विनम्र निवेदन है कि लघुकथा क्रमांक 180 जिसका शीर्षक राशि रत्न है, http://www.rachanakar.org/2019/01/2019-180.html पर भी अपने बहुमूल्य सुझाव प्रेषित करने की कृपा कीजिए। कहते हैं कि कोई भी रचनाकार नहीं बल्कि रचना बड़ी होती है, अतएव सर्वश्रेष्ठ साहित्य दुनिया को पढ़ने को मिले, इसलिए आपके विचार/सुझाव/टिप्पणी जरूरी हैं। विश्वास है आपका मार्गदर्शन प्रस्तुत रचना को अवश्य भी प्राप्त होगा। अग्रिम धन्यवाद

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