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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 46 // ह्यूमिडिटी उर्फ छ: दिसंबर // तरुण गुप्ता

प्रविष्टि क्रमांक - 46

तरुण गुप्ता

ह्यूमिडिटी उर्फ छ: दिसंबर

वो दिन रोज़ की तरह नहीं था। उस दिन हवाओं में कुछ ज्यादा ही नमी थी। ऐसा मैंने अपने बचपन में भी महसूस किया था। उस दिन भी विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक मौसम समाचारों में शहर में ह्यूमिडिटी की बहुतायत बताई गई थी लेकिन एकाएक शहर में ये ह्यूमिडिटी, ये आद्रता कैसे बढ़ गई इसका जवाब उनके पास भी नहीं था। वे सोच में मग्न थे कि हम इसका कयास तक कैसे नहीं लगा सके? चीज़े एकदम से बदल गई थी कुछ लोग दुखी थे लेकिन चेहरे पर सुख का लबादा चिपकाये थे। बहुत सारे लोग खुश थे लेकिन चेहरे को दुखनुमा बनाये हुए थे। कुछ लोग और थे जो न तो खुश थे न दुखी। वे खुश और दुखी दिखने के चुनाव में फँसे हुए थे।

सन् 1992 के बाद से हर बार दिसंबर की ये सर्द सुबह ऐसे ही नमी लिए आती है। इस नमी की तारीखें अब दिनों दिन बढ़ने लगीं हैं साथ ही तीसरे दर्जे के कुछ लोगों की तादात भी दिनोंदिन बढ़ रही है। कुछ लोगों के लिए ये तारीख़ एक वाकया है। कुछ के लिए एक घटना परिघटना या दुर्घटना। तो कुछ के लिए किसी महापुरुष का परिनिर्वाण दिवस। पर मेरे लिए ये मेरे बचपन के साथी अफसाना और निसार के विदाई का दिन है।

तरुण गुप्ता

फ्लैट नं. 40 डी.ए. ब्लॉक

शालीमार बाग, दिल्ली 110088


dr.tarundu@gmail.com

1 टिप्पणियाँ

  1. विनम्र निवेदन है कि लघुकथा क्रमांक 180 जिसका शीर्षक राशि रत्न है, http://www.rachanakar.org/2019/01/2019-180.html पर भी अपने बहुमूल्य सुझाव प्रेषित करने की कृपा कीजिए। कहते हैं कि कोई भी रचनाकार नहीं बल्कि रचना बड़ी होती है, अतएव सर्वश्रेष्ठ साहित्य दुनिया को पढ़ने को मिले, इसलिए आपके विचार/सुझाव/टिप्पणी जरूरी हैं। विश्वास है आपका मार्गदर्शन प्रस्तुत रचना को अवश्य भी प्राप्त होगा। अग्रिम धन्यवाद

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