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समीक्षा ●तमसो माँ ज्योतिर्गमय को सार्थक करती राजकुमार जैन राजन की कविताएं●

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प्रकाशनार्थ पुस्तक समीक्षा

●तमसो माँ ज्योतिर्गमय को सार्थक करती राजकुमार जैन राजन की कविताएं●

   -समीक्षा: अल्पना जैन, धामपुर

कृति - "खोजना होगा अमृतकलश" (काव्य संग्रह)

रचनाकार - राजकुमार जैन'राजन'

प्रकाशक- अयन प्रकाशन,

1/20 - माहरौली,नईदिल्ली-110030

संस्करण -2018

पृष्ठ -120

मूल्य 240

काव्य लेखन, कहानी, पर्यटन, लोकजीवन, बाल साहित्य के क्षेत्र में राजकुमार जैन राजन एक जाना पहचाना नाम । एक चिर परिचित हस्ताक्षर राजन जी की 50 कविताओं का काव्य संग्रह "खोजना होगा अमृत कलश" पढ़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ आद्योपान्त पढ़ा, कई बार पढ़ा ।

राजकुमार जैन राजन के  "खोजना होगा अमृत कलश" कविता संग्रह की शताधिक समीक्षाएं डॉ. लता अग्रवाल  ,प्रफुल्ल चंद्र ठाकुर जी ,जितेंद्र निर्मोही जी ,फारूक आफरीदी, रविकुमार मौर्य, डॉ. महेंद्र भानावत, डॉ. प्रीति खरे, सुविधा पंडित, डॉ. शील कौशिक, डॉ. कृष्ण कुमार आशु, गुलाब चंद पटेल, डॉ. संजय धौलपुरिया जी जैसे कितने ही नामचीन समीक्षकों द्वारा लिखी जा चुकी है ।सभी समीक्षकों ने आपकी पुस्तक की समीक्षा बड़े ही सुंदर शब्दों में की है। राजन जी की रचना धर्मिता को विभिन्न कोणों से परखा और सराहा है। इसी क्रम में मेरा छोटा सा प्रयास है, उनकी रचनाओं को अध्ययन करने का ,आत्मसात करने का और कुछ शब्द भाव व्यक्त करने का मेरा यह अदना सा प्रयास पाठकों के समक्ष ।

     "खोजना होगा अमृत कलश " आदरणीय राजन जी की कविताओं का अनुपम संग्रह है । कैसे लिख लेते हैं इतना सारा और इतना अच्छा !! सचमुच एक-एक कविता गहरी संवेदना, वेदना लिए हुए जिजीविषा, आशा ,अपेक्षा, उपेक्षा,विद्रोह, सवाल, प्रेम ,विचोह सभी कुछ तो है । यथा - (नियति)- 'कब तक संभाल कर रखूं वह तह किए हुए रंगीन कागज'

(अंधकार के बीज)- 'मन में जब जलती है मशाले तब खुद-ब-खुद बदलने लगती हैं इतिहास की इबारतें'

(जीवन का चक्रव्यूह) ' हताश मत हो मेरे दोस्त हर ख्वाब सूरज बन चमकेगा एक दिन।'

(हारा भी नहीं हूं मैं)-

'जीत नहीं पाया तो क्या हारा भी नहीं हूं मैं ।'

(एक सवाल )- 'बड़ी सावधानी से बांटा जाता है एक ही ज़हर।'

(तुम कौन हो)- 'धरती के अमृत कोष में विष बीज कौन बो गया है ।'

(नरबीज खो गया है)- 'चारों ओर चक्रव्यूह रचा कर अभिमन्यु का किया जा रहा है जीवन समाप्त

पुलिस द्वारा सुरक्षित चौराहों पर सीता को उठाकर ले जा रहे है रावण' इन कविताओं ने पाठकों के समक्ष

सचमुच एक अमृत कलश ही उड़ेल दिया है।

      'तमसो मा ज्योतिर्गमय'  को सार्थक करती ये कविताएं गागर में सागर भरने का सार्थक ,अथक प्रयास है । राजन जी की कविताओं में जहां वेदना का स्वर मुखर हुआ है वहीं वह आज की व्यवस्था से सवाल भी करता है। तमाम विसंगतियों में जीने के बाद भी कवि मन एक सुखद भविष्य के प्रति आशान्वित है । क्योंकि-

'सपने वो नहीं होते जो सोने पर आते हैं सपने वह होते हैं जो सोने ही नहीं देते ।' पुस्तक की सफलता का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि  'खोजना होगा अमृत कलश' का अनुवाद 5 भाषाओं असमिया ,गुजराती, मराठी ,नेपाली और पंजाबी में हो चुका है।

निष्कर्षतः यही कहा जा सकता है कि राजन जी उच्च क्षमता वाले सुह्दय कवि हैं । अभी और बड़ी-बड़ी सफलताऐं उनका इंतजार कर रही है वो सफलता के और उच्च आयामों को छुए ऐसी शुभकामना।

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समीक्षक-

अल्पना जैन

शिक्षिका

मुनि विद्यानंद जैन कन्या विद्यालय धामपुर-246761

जिला- बिजनौर

उत्तर प्रदेश

भारत।

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