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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 61 // चक्रव्यूह // शोभा गोस्वामी

प्रविष्टि क्रमांक - 61

शोभा गोस्वामी

"चक्रव्यूह"

जीवन का एक ऐसा चक्रव्यूह जिसमें हर कोई फंस कर रह जाता है जिंदगी कहां जाती है कुछ पता नहीं चलता हम सोचते हैं हम बिलकुल सही जा रहे हैं पर ऐसा होता नहीं यह जिंदगी का समंदर अपने चक्रव्यूह में फंसा कर  ऐसा बना देता है कि चक्रव्यूह में फंस कर मंजिल  की तलाश जारी रहती है।
           मानसी बचपन से अल्हड़ और मासूम महत्वाकांक्षी थी। तीन भाई बहनों में सबसे छोटी थी। पिता मनोहर लाल सरकारी नौकरी में थे। मां एक निपुण और सुयोग्य और धार्मिक महिला थी पिता का मां पर हमेशा हावी रहना ,मां सहमी सी रहती थी पिता के इस बर्ताव से मानसी मन ही मन आक्रोशित होती थी उसका व्यक्तित्व ऐसा था कि वह घर के इस माहौल से कुंठित रहती थी।
           उसको खेलकूद में नृत्य और गायन में रुचि थी शिक्षा में अव्वल थी। बड़ी बहन और भाई के विवाह के पश्चात उसके लिए भी वर देखकर रिश्ता तय कर दिया मनोहर लाल ने धनाढ्य परिवार देखकर कम पढ़े-लिखे लड़के से उसकी शादी कर दी मानसी को चुपचाप नियति के साथ समझौता करना पड़ा।
         वक्त का पहिया चलता रहा सामंजस्य बिठाकर संस्कारों को निभा कर अपनी पहचान बना कर गाहे-बगाहे लोगों के कटाक्ष को सहन कर  बच्चों को अच्छे संस्कार दिए पर उन बड़ों का क्या जिन को उनके माता-पिता ने नसीहत में रिक्त रखा ।सामंजस्य बिठाते हुए कड़वे घुट पी कर जिंदगी उम्र के आधे पड़ाव पर पहुंच गई।
          अब ना तो घर के काम व्यस्त रखते और ना ही बच्चों के पालन पोषण अकेलापन दूर करने के लिए अपना शौक कुछ लिखने का सोचा उस में सफलता मिलने पर वह आसमान में पंख फैलाकर उड़ते पंछी के समान हो गई और खुद को साबित किया कि अस्तित्वहीन नहीं हूं।
           जिंदगी चक्रव्यूह है पर अगर धुरी पर सामंजस्य हो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं और ज्ञान का अनुभव किसी भी उम्र का मोहताज नहीं है क्योंकि मानसी का सबसे प्यारा मित्र उसका कलम है हाथ में उंगलियों के बीच आकर दिल और दिमाग दोनों कलम के साथ मानसी का साथ देते हैं जो ख़ुशी उसको मिली है शायद लिखने के लिए शब्द नहीं हैं ।
        ज्ञान का अनुभव कभी व्यर्थ नहीं होता।

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3 टिप्पणियाँ

  1. बेनामी12:38 pm

    जिस तरह से रचनाकार ने इस कहानी में वास्तिविक जीवन की कठिनाईयों को ज्ञान की ढाल से संभाला और विजय पाई। काबिल्यतारीफ है, Good one

    जवाब देंहटाएं
  2. आदरणीय महोदय, आपकी रचना सराहनीय है विनम्र निवेदन है कि लघुकथा क्रमांक 180 जिसका शीर्षक राशि रत्न है, http://www.rachanakar.org/2019/01/2019-180.html पर भी अपने बहुमूल्य सुझाव प्रेषित करने की कृपा कीजिए। कहते हैं कि कोई भी रचनाकार नहीं बल्कि रचना बड़ी होती है, अतएव सर्वश्रेष्ठ साहित्य दुनिया को पढ़ने को मिले, इसलिए आपके विचार/सुझाव/टिप्पणी जरूरी हैं। विश्वास है आपका मार्गदर्शन प्रस्तुत रचना को अवश्य भी प्राप्त होगा। अग्रिम धन्यवाद

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