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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 81 // एक सवाल // गोविंद सिंह वर्मा

प्रविष्टि क्रमांक -  81

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गोविंद सिंह वर्मा

एक सवाल

जब तक सुबह की ड्यूटी पर जाने वाली गाड़ियां उसको धूल, मिट्टी में नहलाती उससे पहले ही वह अपने बिस्तर से उठ जाती । जंग लगी चेन से अपना सामान बांध देती और उस खंडर बहुमंजिला इमारत की सीलन से रिसकर आते हुए पानी से  अपना मुँह - हाथ धोकर वह पैदल - पैदल शहर के दूसरे हिस्से में पहुँच जाती ।
              दोपहर होते ही वो रोज़ उस दुकान वाले के यहाँ से दो समोसे और एक चाय लेती । पैसे कभी नहीं देती । हाँ दुकानदार बड़े आराम से अपनी डायरी में शायद उसके खाते में बकाया रकम लिख लेता था  ।
फिर वह हमेशा की तरह अपने काम पर निकल जाती । छुट्टियों के दिन  यानी रविवार और शनिवार को कमाई  अच्छी हो जाती थी।
" इतनी सुंदर मैम को लेके बैठे हो साहब, भगवान तेरी जोड़ी सलामत रखे,हमेशा ऐसे ही साथ रहो "-इतना कहकर वह तालाब किनारे समय बिता रहे प्रेमी युगल से पैसे वसूल करती ।
जब कोई प्रेमी युगल पैसे देने में न - नकुर करता तो वह एक ही रट लगा देती " ए तेरी जोड़ी सलामत रहे,दस रुपए देदे रे "  इसके बाद वो यह तो प्रेमी का पेंट पकड़ लेती या प्रेमिका का कोई और कपड़ा , अंत मैं उसकी विजय होती । पैसे लेकर वह अपने अगले शिकार को निकल पड़ती । तालाब किनारे बहुत सारे प्रेमी युगल समय बिताने आते थे । यही उसकी कमाई का ज़रिया था ।
मैंने उसे यहीं पहली बार देखा था ।


लेकिन उस रात को सिनेमा से लौटते वक्त उसे देखा तो मेरा सिर चकरा गया  । दो - तीन जोड़ी गंदे औऱ फटे- पुराने कपड़े पहनें वह तीन - चार औरतों के साथ कहीं जा रही थी । उन सभी के चेहरे देकर मुझे लग रहा था जैसे मैंने उन्हें कहीं न कहीं देखा हैं ।
मैं थोड़ी देर तक उनका पीछा करता रहा । एक खंडर मंजिल के पास जाकर सब रुक गई औऱ अजीबोगरीब तरीक़े से हँसने लगी । उन सभी की हरकतों से नज़र आ रहा था की वो पागल औरतें हैं।
किसी ने टाट निकाला किसी ने चादर और वह सब वहाँ लेट  गई ।


मैं वापस घर के लिए चल दिया । रास्ते भर सोचता रहा
तो समझ आया कि उस इलाके से वाहन कम गुजरते है , रात को वहां फुटपाथ पर सोना आसान है ।
पर पागलपन क्यों ?
शायद गंदी दिख रही पागल औरत का बलात्कार कोई नहीं करता ,इस लिए ?

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परिचय।
नाम - गोविंद सिंह वर्मा
पता - श्यामला हिल्स , भोपाल
शिक्षा - बीएससी +बीएड ,(अंतिम वर्ष छात्र)
सम्मान - काव्य सारथि सम्मान ( अखिल भारतीय परिषद विराटनगर )
प्रकाशित रचनायें - दैनिकभास्कर में कुछ लघुकथाए  । कादम्बिनी पत्रिका में कविता प्रकाशित ।

1 टिप्पणियाँ

  1. आदरणीय महोदय, आपकी रचना सराहनीय है विनम्र निवेदन है कि लघुकथा क्रमांक 180 जिसका शीर्षक राशि रत्न है, http://www.rachanakar.org/2019/01/2019-180.html पर भी अपने बहुमूल्य सुझाव प्रेषित करने की कृपा कीजिए। कहते हैं कि कोई भी रचनाकार नहीं बल्कि रचना बड़ी होती है, अतएव सर्वश्रेष्ठ साहित्य दुनिया को पढ़ने को मिले, इसलिए आपके विचार/सुझाव/टिप्पणी जरूरी हैं। विश्वास है आपका मार्गदर्शन प्रस्तुत रचना को अवश्य भी प्राप्त होगा। अग्रिम धन्यवाद

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