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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 117 // थैंक्यू भइया // पीयूष कुमार द्विवेदी 'पूतू'

प्रविष्टि क्रमांक - 117

पीयूष कुमार द्विवेदी 'पूतू'

थैंक्यू भइया

कॉलेज के मैदान में विमला,सुनंदा और जानकी किसी टॉपिक पर चर्चा कर रही थीं।अचानक सुनंदा की नज़र दूर खड़े एक स्टूडेँट पर पड़ी जो उन्हें लगातार घूर रहा था। उसने विमला को कोहनी मारते हुए कहा-"विमला देख तो सही,वह हम लोगों को कैसे देख रहा है?"
जानकी हँसकर बोली-"देखता है तो देखने दे। इसमें हमारा क्या जाता है?"
विमला बोली-"मैं उसका देखना बंद करा दूंगी पर तुम दोनों को मेरी शर्त माननी पड़ेगी।"
दोनों सहेलियां एक साथ बोल पड़ीं क्या शर्त है?तब विमला ने कहा अगर मैं उससे पेड़ पर लगे बेल टुड़वा लूँगी तो तुम दोनों मुझे एक महीने आइसक्रीम खिलाओगी और अगर हारी तो तुम दोनों खाना मेरी तरफ से।
दोनों सहेलियों ने कहा-"हाँ हमें मंजूर है।"
विमला बेल के पेड़ के पास जाकर खड़ी हो गई,कुछ ही दूरी पर वह लड़का भी खड़ा था। विमला ने स्वीट सी स्माइल के साथ कहा-"एक्सक्यूज मी,कैन यू हेल्प मी?"
लड़के ने मुस्कुरा कहा-"यस मैम,बताइए?"
विमला उसी अंदाज में बोली-"मुझे कुछ बेल चाहिए,क्या आप तोड़ दोगे?"
लड़का यस कहकर पेड़ पर चढ़कर जिस-जिस बेल को विमला ने कहा उसको तोड़कर नीचे उतर आया। विमला ने बेलों को चुन्नी में समेटा और बोली-"थैंक्यू भइया।"
लड़का कुछ बोल न सका सिर्फ देखता रहा। दूर खड़ी विमला की दोनों सहेलियां खिलखिलाकर हँस पड़ीं।

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पीयूष कुमार द्विवेदी 'पूतू'
असिस्टेंट प्रोफेसर (हिंदी विभाग, जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय चित्रकूट, उत्तर प्रदेश-210204)

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