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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 123 // किरायेदार // एकता रानी

प्रविष्टि क्रमांक - 123

एकता रानी

किरायेदार
राम प्रकाश जी छोटे से दुकानदार थे l जिनके कंधों पर एक बड़े परिवार की जिम्मेदारी थी l बाप, भाई, पत्नी और तीन बच्चे l जीवन की गाड़ी को किसी तरह धकेल कर आगे बढ़ा रहे थे l जितना कमाते थे उससे अधिक खर्चे बचना तो बहुत दूर की बात थी l धीरे धिरे भाई अपने पैरो पर खड़ा हुआ और शादी करके चला गया l कुछ समय बाद पिताजी का भी स्वर्गवास हो गया l बच्चे बड़े तथा समझदार हो गये l अपना खर्चा खुद उठाने लगे l अपनी ही कमाई पर तीनों ने ग्रेजुएशन किया l इस दौरान राम प्रकाश जी को कुछ धन संचयन का अवसर मिला l बच्चे भी अपनी कमाई से अपना खर्चा निकल कर बाकी की कमाई जोड़ने लगे l धीरे धिरे सबने अपने जोड़े हुए पैसे इकट्ठे किए और एक छोटा सा घर खरीद लिया l वे स्वयं तो उस घर में रहने न गये पर सोचा उस घर में एक किरायेदार रखेंगे और कुछ धन कम कर इस घर को और सुंदर बनायेंगे l


फिर एक दिन बांकेलाल नाम का एक आदमी राम प्रकाश जी की दुकान का पता पूछता हुआ उनके पास पंहुचा और गिडगिडा के अपनी गरीबी की दुहाई देते हुए किराये पर घर माँगाl राम प्रकाश जी को दया आ गई और बिना कुछ लेन देन, लिखा पढ़त के अपना घर बहुत सस्ते पर किराये पर दे दिया l पहले ५-६ महीने तो किराया समय पर आता रहा l फिर बांकेलाल का दुकान पर किराया देने आना बंद हो गया l अब राम प्रकाश जी स्वयं किराया लेने जाने लगे l शुरू क एक दो महीने तो उनके जाने पर किराया मिल जाता था l लेकिन कुछ समय बाद बांकेलाल बहाने बना कर टाल देता l ऐसा करते करते ३-४ महीने बीत गये l फिर एक दिन राम प्रकाश जी को खबर मिली की बांकेलाल की बेटी चल बसी l उन्हें रहम आया और उन्होंने एक महीने तक किराये की बात न की l लेकिन जब २ महीने तक न तो बांकेलाल और न ही उसके बेटे किराया देने आये तो राम प्रकाश जी स्वयम किराया लेने गये तो वे क्या देखते है सारा घर खुला और खाली पड़ा है l पड़ोसियों से पता चला कि वे लोग तो सप्ताह भर पहले ही ट्रक में सारा सामान भर कर कही चले गये है l राम प्रकाश जी बाज़ार जा कर कुछ ताले ले आये वे घर पर टला लगा ही रहे थे की बिजली कर्मचारी में आकर उनके हाथ में बिजली के मीटर कटने का नोटिस पकड़ा दिया जिसमें लिखा था की पीछे ४ बिल आपके द्वारा जमा नहीं करवाए गये है यदि जल्दी ही बिल क्लियर नहीं किया गया तो आपका मीटर काट दिया जायेगा .......

1 टिप्पणियाँ

  1. विनम्र निवेदन है कि लघुकथा क्रमांक 180 जिसका शीर्षक राशि रत्न है, http://www.rachanakar.org/2019/01/2019-180.html पर भी अपने बहुमूल्य सुझाव प्रेषित करने की कृपा कीजिए। कहते हैं कि कोई भी रचनाकार नहीं बल्कि रचना बड़ी होती है, अतएव सर्वश्रेष्ठ साहित्य दुनिया को पढ़ने को मिले, इसलिए आपके विचार/सुझाव/टिप्पणी जरूरी हैं। विश्वास है आपका मार्गदर्शन प्रस्तुत रचना को अवश्य भी प्राप्त होगा। अग्रिम धन्यवाद

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