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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 139 // अचानक // चित्रा गुप्ता

प्रविष्टि क्रमांक - 139


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चित्रा गुप्ता

अचानक

चंदना जी जानी–मानी लेखिका हैं | अक्सर उनके लेख पत्रिकाओं में प्रकाशित होते | जिन्हें वृंदा बहुत चाव से पढ़ती | वृंदा एक कुशल नृत्यांगना तो थी ही पर उसकी लेख इत्यादि पढने में भी बहुत रूचि थी | घर-गृहस्थी की जिम्मेदारी में भी वह अपना शौक बरकरार रखे हुई थी | इससे उसका शरीर भी आकार में रहता है ,ऐसा उसका मानना था | किसी समारोह की शुरुआत में उसे अक्सर सरस्वती वंदना पर नृत्य करने के लिए बुलाया जाता | होली-दिवाली और दुर्गापूजा के अवसर पर तो वह अवश्य ही नृत्य करती | वृंदा ‘इंडियन वुमन एसोसिएशन’ क्लब की कमेटी सदस्या थी | महिला दिवस के अवसर पर क्लब का फंक्शन था | चंदना जी को भी वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया | वृंदा के नृत्य के बाद चंदना जी को मंच पर आमंत्रित किया गया | बहुत भावभीनी कविता और उससे भी खूबसूरत चंदना | चेहरे का लावण्य और सांचे में ढला बदन, काले रंग की सुनहरे बॉर्डर वाली शिफोन की साड़ी उस पर कविता सुनाने का अंदाज सब कुछ बहुत अनोखा.....वृंदा तो बस मोहित ही हो गई | सोच रही थी काश...मेरा फिगर भी ऐसा ही होता |

कार्यक्रम सम्पन्न हुआ अब बारी थी प्रीतिभोज की | दोनों एक-दूसरे की खुलकर तारीफ़ कर रही थीं | औपचारिक बातों के चलते दोनों कब दोनों अनोपचारिक हो गई पता ही न चला | दोनों व्हाटसप्प पर सन्देश भेजती.....कभी चाय-कॉफ़ी पर मिल भी लेतीं | इस तरह दोनों काफी घुल-मिल गई थी |

वृंदा और चंदना दोनों का अचानक हवाई अड्डे पर आमना-सामना हुआ | वृंदा व्हील चेयर पर थी शाल से उसके पैर ढके थे | वह कांशिस होकर शॉल को पैरों की ओर खिसकाने लगी पर शाल के नीचे कुछ उघडा जूता भी पैर की कहानी सुना रहा था | उधर चंदना भी वृंदा को देखते ही हबड़-तबड़ स्कार्फ से अपना वक्ष ढकने लगी | आज वे औपचारिक सी होकर अपने-अपने गंतव्य की और चल दीं |

पेशे से अध्यापिका | पढ़ने-पढ़ाने में रुचि | लेखन का शौक हमेशा रहा | विभिन्न पत्रिकाओं में कहानी तथा कविताएँ प्रकाशित हुई | ग्लोबल हिंदी फाउंडेशन सिंगापुर के अंतर्गत होने वाली प्रतियोगिता की जज हूँ | सरल भाषा की हिमायती हूँ | माँ सरस्वती की कृपा बनी रहे और मेरी लेखनी चलती रहे बस यही अभिलाषा है | स्थायी निवास सिंगापुर है |

साभार

चित्रा गुप्ता

madhurbhaashi@yahoo.com

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