नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 153 // सौभाग्य // मुकेश शेषमा

प्रविष्टि क्रमांक - 153

मुकेश शेषमा

सौभाग्य

"लड़का बहुत अच्छा है मालती! अगर उसको हमारी छोटी बेटी स्वेता ही पसंद है तो छोटी की शादी ठीक कर देते हैं।"
"हा वैसे भी 2 साल ही तो छोटी है स्वेता। उसके बाद ही संगीता का कर देंगे।"
"तुम स्वेता को लेकर हॉल में पहुँचो, वे लोग इन्तेजार करते होंगे! "
स्वेता ने एकबार संगीता की तरफ देखा और फिर अपनी माँ के साथ हॉल में चली गई
"जी आ गई हमारी छोटी बेटी! नमस्ते कर बेटा, हमारी स्वेता सुंदर भी है और पढ़ीलिखी भी"
स्वेता के पिता ने परिचय देते हुए कहा।
"सुंदर और पढ़ी लिखी तो संगीता दी भी हैं! फिर आप लोगों ने मुझे क्यूँ?"
स्वेता के मन में पता नही क्या चल रहा था। उसने सवाल अपनी आँखों से लड़के की तरफ भी किया
"जी बिलकुल वो भी सुंदर लगी थी ..मगर आपको देखा तो..आप ज्यादा सुंदर हैं उनसे, इसलिए हमलोगों ने ..!"
"अरे ये तो हमारी स्वेता का सौभाग्य है कि आपने ..!"  स्वेता के पिता रिश्ते को आगे बढ़ाना चाहते थे
"नहीं पापा ये हमारी संगीता दी का सौभाग्य है कि उनका रिश्ता इनसे नही हो रहा और मैं भी खुद का दुर्भाग्य नहीं लिखना चाहती"
"ये तू क्या बोल रही है बेटा?"
"पापा इन्हें संगीता दी से सुंदर मैं लगी..कल मुझसे सुंदर कोई और लगेगी! बाहरी सुंदरता का तो कोई अंत ही नहीं है इसलिए इस रिश्ते का अंत यहीं कर देना मेरा सौभाग्य होगा!"

--

-मुकेश शेषमा, कथाकार
जिला-झुंझुनू (राज.)      
mail- mukeshsheshma@yahoo.com
More story:- fb page/विचार सागर

1 टिप्पणियाँ

  1. आदरणीय महोदय, आपकी रचना सराहनीय है विनम्र निवेदन है कि लघुकथा क्रमांक 180 जिसका शीर्षक राशि रत्न है, http://www.rachanakar.org/2019/01/2019-180.html पर भी अपने बहुमूल्य सुझाव प्रेषित करने की कृपा कीजिए। कहते हैं कि कोई भी रचनाकार नहीं बल्कि रचना बड़ी होती है, अतएव सर्वश्रेष्ठ साहित्य दुनिया को पढ़ने को मिले, इसलिए आपके विचार/सुझाव/टिप्पणी जरूरी हैं। विश्वास है आपका मार्गदर्शन प्रस्तुत रचना को अवश्य भी प्राप्त होगा। अग्रिम धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.