नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

लघुकथा // मायके का सामान // निकिता बुडानियाँ

image

"दम घुटता है मेरा इस घर में "इस वाक्य को रोज रात सोने से पहिले कहना अवनी का नियम बन गया था। शादी को कुल जमा चार माह ही हुए थे।
"ये मुर्गी के दड़बे जैसा घर,"
"मायके से दहेज में आया मेरा कीमती समान कबाड़ की तरह ठुँसा है"
"तुम्हारी माँ की अल्सुबह से खट पटर "
"गुड्डी और देवर जी आधी रात तक पढ़ते है लाईट जलती है तो नींद नहीं आती"
"कितना छोटा है पांच लोगों के लिये ये टू बी एच के।"
और फिर वही--दम घुटता है मेरा इस घर में----

"सुनो पापा ने वहीं,अपनी कालोनी में हमारे लिये  फ्लैट ले लिया है। हम वहाँ शिफ्ट हो जाते हैं, नये घर में"
"अम्मा से पूछ लिया तुमने"
"अब पूछना क्या,समान पैक करे।"

"सुनो ,समान की पैकिंग हो गई है"
"अम्मा को बता दिया,क्या क्या ले जा रही हो"
"अब इसमें बताना क्या,जो समान हम अपने मायके से लाये थे,वही ले जा रहे है। वैसे भी तुम्हारे घर का कोई सामान ले जाने लायक है क्या?"

"सुनो समान का ट्रक निकल गया है,पापा ने वहाँ नौकर भेज दिया है हैल्प के लिये"
"चलिये न, ड्राईवर इन्तजार कर रहा है"

"अवनी, तुम जाओ, मैं नहीं चलूंगा। मैं दहेज में आया तुम्हारे मायके का समान तो हूँ नहीं। मैं इसी घर का हूँ और यहीं रहूँगा।"

-निकिता बुडानियाँ, राजस्थान
mukeshkumawas302@gmail.com

1 टिप्पणियाँ

  1. आदरणीय महोदय, आपकी रचना सराहनीय है विनम्र निवेदन है कि लघुकथा क्रमांक 180 जिसका शीर्षक राशि रत्न है, http://www.rachanakar.org/2019/01/2019-180.html पर भी अपने बहुमूल्य सुझाव प्रेषित करने की कृपा कीजिए। कहते हैं कि कोई भी रचनाकार नहीं बल्कि रचना बड़ी होती है, अतएव सर्वश्रेष्ठ साहित्य दुनिया को पढ़ने को मिले, इसलिए आपके विचार/सुझाव/टिप्पणी जरूरी हैं। विश्वास है आपका मार्गदर्शन प्रस्तुत रचना को अवश्य भी प्राप्त होगा। अग्रिम धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.