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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 187 // निजीकरण // विनोद सिल्ला

प्रविष्टि क्रमांक - 187

विनोद सिल्ला

निजीकरण


विशाल अपने शहर के रेलवे स्टेशन की टिकट खिड़की पर टिकट लेने के लिए खड़ा हुआ|

बुकिंग बाबू मोबाइल फोन के स्क्रीन पर ऊंगलियाँ मार रहा था| सोशल साइट पर व्यस्त था|

जिसने ऊपर नजर उठाए बिना ही, सामने  के निजी टिकट बूथ की ओर इशारा किया और कहा, "टिकट वहाँ से ले लो|"

विशाल ने कहा,"यहाँ क्या समस्या है?"

टिकट बाबू बोला,"वहाँ क्या समस्या है? वहाँ से ले लो|"

विशाल बोला,"क्यों रेलवे का निजीकरण करवा रहे हो?"

टिकट बाबू ने कहा,"निजीकरण तो सरकार कर रही है|"

विशाल बोला,"सरकार के साथ-साथ आपकी अकर्मण्यता भी उत्तरदायी है|"

इतना सुनकर टिकट बाबू मोबाइल फोन जेब में डाल कर, टिकट काटने लगा| निजी बूथ सुनसान हो गया| टिकटार्थियों की कतार टिकट खिड़की पर लग गई|

-विनोद सिल्ला©

1 टिप्पणियाँ


  1. आदरणीय महोदय, आपकी रचना सराहनीय है विनम्र निवेदन है कि लघुकथा क्रमांक 180 जिसका शीर्षक राशि रत्न है, http://www.rachanakar.org/2019/01/2019-180.html पर भी अपने बहुमूल्य सुझाव प्रेषित करने की कृपा कीजिए। कहते हैं कि कोई भी रचनाकार नहीं बल्कि रचना बड़ी होती है, अतएव सर्वश्रेष्ठ साहित्य दुनिया को पढ़ने को मिले, इसलिए आपके विचार/सुझाव/टिप्पणी जरूरी हैं। विश्वास है आपका मार्गदर्शन प्रस्तुत रचना को अवश्य भी प्राप्त होगा। अग्रिम धन्यवाद

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