नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 219 // शक // अमित शाह

प्रविष्टि क्रमांक - 219

अमित शाह

शक

प्यारेलालजी। बहुत मजाकिया स्वभाव के थे। मन के साफ। लेकिन, थोड़े गुस्सेले भी। वह जितनी तेजी से गुस्सा कर लेेते, उतनी ही दोगुनी रफ्तार से शांत भी हो जाते। उम्र के 31 बसंत गुजरने के बाद उनकी किस्मत में सुंदर सुषमा का साथ मिल ही गया। हालांकि ऐसा नहीं था कि उन्हें इससे पहले कोई मिला नहीं, बल्कि वह स्वयं ही देरी से शादी करना चाहते थे। प्यारेलालजी अब पहले से ज्यादा प्रसन्न रहने लगे थे। होते भी क्यू नहीं, उन्हें सुंदर और सुशील जीवन संगीनी जो मिली थी।

लेकिन, प्यारेलालजी का मजाकियापन अभी गया नहीं था। पत्नी के साथ मीठी-मीठी बातें बतियाते हुए कह बैठे पड़ोसन बहुत सुंदर दिखती है। बस, प्यारेलालजी तो महज चिढ़ाने के लिए मजाक कर रहे थे। लेकिन सुषमा तो इस दिल पे ले बैठी। घर का माहौल ऐसा बना कि पति-पत्नी में हर रोज कहासूनी। अब तो प्यारेलालजी खिड़की से झांकना भी भूल गए थे। क्योंकि खिड़की से पड़ोसन का घर साफ दिखाई देता था। हालांकि प्यारेलालजी का मन अब भी पड़ोसन के प्रति बहन जैसा ही था। लेकिन एक मजाक ने सबकुछ बदल दिया। संयोग से एक दिन पड़ोसन का बेटा प्यारेलालजी के यहां खेलने चला आया। पीछे-पीछे पड़ोसन रानी भी आ गई और प्यारेलालजी सामने देखकर हल्की सी मुस्कान दे बैठे। अब होना क्या था। रातभर प्यारेलालजी और सुषमा की महाभारत चलती रही।

सुषमा इतनी भावुक हो गई कि वह पास ही पड़ी सिरदर्द की पांच गोली एक साथ खा बैठी। प्यारेलालजी के पसीने छूटने लगे। रातभर तनाव में रहे। लेकिन, धर्मपत्नी को अस्पताल ले जाने में डरते भी रहे। सुबह सुषमा को सही सलामत देख राहत ली।

--

अमित शाह
मुपो – गामड़ी देवकी
तहसील – सागवाड़ा
जिला – डूंगरपुर
राज्य – राजस्थान

1 टिप्पणियाँ

  1. विनम्र निवेदन है कि लघुकथा क्रमांक 180 जिसका शीर्षक राशि रत्न है, http://www.rachanakar.org/2019/01/2019-180.html पर भी अपने बहुमूल्य सुझाव प्रेषित करने की कृपा कीजिए। कहते हैं कि कोई भी रचनाकार नहीं बल्कि रचना बड़ी होती है, अतएव सर्वश्रेष्ठ साहित्य दुनिया को पढ़ने को मिले, इसलिए आपके विचार/सुझाव/टिप्पणी जरूरी हैं। विश्वास है आपका मार्गदर्शन प्रस्तुत रचना को अवश्य भी प्राप्त होगा। अग्रिम धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.