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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 225 // अन्याय // दर्शना बांठिया

प्रविष्टि क्रमांक -


अन्याय

"अगर कोई भी परेशानी या समस्या हो हमारी बहनों को तो हमारी मंडल आपकी पूरी मदद करेगी न्याय दिलाने में,आप बहनों को अब अन्याय  सहने की कोई आवश्यकता नहीं"नारी संस्था की अध्यक्षा भाषण दे रही थी कि बीच में ही फोन बजा। तुरंत सभा में  माफ करना कहकर अपनी कामवाली को इशारा करके मंच से उतर गई।

"कम्मो जल्दी चल..."

"दीदी कहीं फिर से भैया ने भाभी के साथ मारपीट की क्या या फिर  ..."

"चुपकर...और सुन डॉक्टर को जल्दी घर  लेकर  आना , तब तक मैं बहू को संभालती हूं"

"ठीक है दीदी,पर क्या आप भाभी को कभी भी अन्याय से मुक्त नहीं कराएंगी, क्योंकि वो आपकी बेटे की पत्नी है, पर है तो नारी ही. "कम्मों अनजाने में वो कह गई ,जो सच था।

दर्शना बांठिया

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