नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 225 // अन्याय // दर्शना बांठिया

प्रविष्टि क्रमांक -


अन्याय

"अगर कोई भी परेशानी या समस्या हो हमारी बहनों को तो हमारी मंडल आपकी पूरी मदद करेगी न्याय दिलाने में,आप बहनों को अब अन्याय  सहने की कोई आवश्यकता नहीं"नारी संस्था की अध्यक्षा भाषण दे रही थी कि बीच में ही फोन बजा। तुरंत सभा में  माफ करना कहकर अपनी कामवाली को इशारा करके मंच से उतर गई।

"कम्मो जल्दी चल..."

"दीदी कहीं फिर से भैया ने भाभी के साथ मारपीट की क्या या फिर  ..."

"चुपकर...और सुन डॉक्टर को जल्दी घर  लेकर  आना , तब तक मैं बहू को संभालती हूं"

"ठीक है दीदी,पर क्या आप भाभी को कभी भी अन्याय से मुक्त नहीं कराएंगी, क्योंकि वो आपकी बेटे की पत्नी है, पर है तो नारी ही. "कम्मों अनजाने में वो कह गई ,जो सच था।

दर्शना बांठिया

0 टिप्पणियाँ

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.