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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 227 व 228 // हरीश कुमार 'अमित'

प्रविष्टि क्रमांक - 227

हरीश कुमार 'अमित',

तबीयत


     तबीयत ख़राब होने के कारण आज साहब दफ़्तर नहीं गए थे. दोपहर के बाद दफ़्तर से एक महिला कर्मचारी साहब के घर आई - कुछ ज़रूरी काग़ज़ों पर हस्ताक्षर करवाने. आई तो वह ‘बस दो मिनट’ के लिए ही थी, पर साहब ने काग़ज़ों पर हस्ताक्षर करने के बाद उससे हँस-हँसकर बातें करनी शुरू कीं, तो पूरा एक घण्टा कैसे बीत गया, पता ही नहीं चला. घर में हमेशा बेरुख़ी और गुस्से से बात करने वाले साहब के मुँह से हँसी-मज़ाक की बातें सुनकर और उन्हें कहकहे लगाते देख घर के सदस्यों को लगने लगा कि साहब की तबीयत वाकई बड़ी ख़राब है.

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प्रविष्टि क्रमांक - 228

हरीश कुमार 'अमित',


धड़कन

    बेतरह धड़कते दिल से डरते-डरते अपने अफ़सर के कमरे के दरवाजे़ को खटखटाकर मैं अन्दर आया था. मेरे बेहद कड़क अफ़सर ने पिछली रात साढ़े दस बजे मुझे मोबाइल फ़ोन पर एस.एम.एस. करके आज सुबह नौ बजे अपने कमरे में बुलाया था. एस.एम.एस. पढ़ने के बाद सारी रात मैं परेशान रहा था कि ऐसा क्या ज़रूरी काम आन पड़ा है जो सुबह-सुबह मुझे बुलाया गया है. मुझे डर लग रहा था कि शायद किसी फाइल में मुझसे बड़ी भारी भूल हो गई है.

    अफ़सर बहुत व्यस्त था और शायद जल्दी में भी. शायद इसी कारण वह अपनी कुर्सी पर बैठा हुआ नहीं था, बल्कि खड़ा होकर कोई काग़ज़ हाथ में लिए पढ़ रहा था. जिबह होने वाले बकरे की तरह डरते-डरते मैंने कदम बढ़ाए और अफ़सर की बड़ी-सी मेज़ के पास पहुँचकर धीमी-सी आवाज़ में ‘गुड मॉर्निंग, सर’ कहा.

    मुझे पूरी उम्मीद थी कि अभी कोई धमाका होगा और अफ़सर मुझे बहुत बुरी तरह लताड़ने लगेगा, जैसा कि वह आए दिन किया करता था. मगर मेरी गुड मॉर्निंग सुनकर अफ़सर ने सिर उठाकर मेरी ओर देखा और फिर अपने हाथ में पकड़ा काग़ज़ मेज पर रखकर बड़ी गर्मजोशी से अपना हाथ मेरी ओर बढ़ाते हुए बोला, ‘‘वेरी गुड मॉर्निंग! गुड मॉर्निंग से भी बड़ी बात! हैप्पी बर्थडे टू यू! अभी एक ज़रूरी मीटिंग में जाना है और फिर वहाँ से ही सीधा टूर पर मुंबई निकल जाना है, इसलिए सोचा आपको सुबह-सुबह आमने-सामने बर्थडे विश कर दूँ.’’

    मेरे दिल की धड़कन पहले से ज्यादा तेज़ हो गई थी.

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संक्षिप्त परिचय

नाम हरीश कुमार ‘अमित’

जन्म मार्च, 1958 को दिल्ली में

शिक्षा बी.कॉम.; एम.ए.(हिन्दी); पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा

प्रकाशन 800 से अधिक रचनाएँ (कहानियाँ, कविताएँ/ग़ज़लें, व्यंग्य, लघुकथाएँ, बाल कहानियाँ/कविताएँ आदि) विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित

एक कविता संग्रह ‘अहसासों की परछाइयाँ’, एक कहानी संग्रह ‘खौलते पानी का भंवर’, एक ग़ज़ल संग्रह ‘ज़ख़्म दिल के’, एक लघुकथा संग्रह ‘ज़िंदगी ज़िंदगी’, एक बाल कथा संग्रह ‘ईमानदारी का स्वाद’, एक विज्ञान उपन्यास ‘दिल्ली से प्लूटो’ तथा तीन बाल कविता संग्रह ‘गुब्बारे जी’, ‘चाबी वाला बन्दर’ व ‘मम्मी-पापा की लड़ाई’ प्र‍काशित

एक कहानी संकलन, एक लघुकथा संकलन, चार बाल कथा व दस बाल कविता संकलनों में रचनाएँ संकलित

प्रसारण लगभग 200 रचनाओं का आकाशवाणी से प्रसारण. इनमें स्वयं के लिखे दो नाटक तथा विभिन्न उपन्यासों से रुपान्तरित पाँच नाटक भी शामिल.

पुरस्कार (क) चिल्ड्रन्स बुक ट्रस्ट की बाल-साहित्य लेखक प्रतियोगिता 1994,

2001, 2009 व 2016 में कहानियाँ पुरस्कृत

(ख) ‘जाह्नवी-टी.टी.’ कहानी प्रतियोगिता, 1996 में कहानी पुरस्कृत

(ग) ‘किरचें’ नाटक पर साहित्य कला परिषद (दिल्ली) का मोहन राकेश सम्मान 1997 में प्राप्त

(घ) ‘केक’ कहानी पर किताबघर प्रकाशन का आर्य स्मृति साहित्य सम्मान दिसम्बर 2002 में प्राप्त

(ड.) दिल्ली प्रेस की कहानी प्रतियोगिता 2002 में कहानी पुरस्कृत

(च) ‘गुब्बारे जी’ बाल कविता संग्रह भारतीय बाल व युवा कल्याण संस्थान, खण्डवा (म.प्र.) द्वारा पुरस्कृत

(छ) ‘ईमानदारी का स्वाद’ बाल कथा संग्रह की पांडुलिपि पर भारत सरकार का भारतेन्दु हरिश्‍चन्द्र पुरस्कार, 2006 प्राप्त

(ज) ‘कथादेश’ लघुकथा प्रतियोगिता, 2015 में लघुकथा पुरस्कृत

(झ) ‘राष्‍ट्रधर्म’ की कहानी-व्यंग्य प्रतियोगिता, 2017 में व्यंग्य पुरस्कृत

(¥) ‘राष्‍ट्रधर्म’ की कहानी प्रतियोगिता, 2018 में कहानी पुरस्कृत

(ट) ‘ज़िंदगी ज़िंदगी’लघुकथा संग्रह की पांडुलिपि पर किताबघर प्रकाशन का आर्य स्मृति साहित्य सम्मान, 2018 प्राप्त

सम्प्रति भारत सरकार में निदेशक के पद से सेवानिवृत्त

पता 304, एम.एस.4 केन्द्रीय विहार, सेक्टर 56, गुरूग्राम-122011 (हरियाणा)


ई-मेल harishkumaramit@yahoo.co.in

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