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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 295 // वास्तु शास्त्र // सरिता सुराणा

प्रविष्टि क्रमांक - 295

सरिता सुराणा

वास्तु शास्त्र

आज़ नीहार का जन्मदिन था, वह पन्द्रह वर्ष का हो गया था और अब यौवन की दहलीज पर कदम रख रहा था। जाहिर है, उसके भी कुछ सपने थे जिन्हें वह सच करना चाहता था। वह मॉडलिंग की दुनिया में जाना चाहता था लेकिन मध्यमवर्गीय परिवार होने की वजह से उसके घर की आर्थिक स्थिति उसके अनुकूल नहीं थी। परन्तु उसकी मां उसे हमेशा सपोर्ट करती थी, फिर चाहे वह पढ़ाई का मामला हो या वस्त्रों के चयन का।

नीहार की हार्दिक इच्छा थी कि इस जन्मदिन पर वह स्टाइलिश जींस-टॉप पहने और उसमें एक अच्छा-सा फोटोशूट कराए। इसके लिए उसने एक नई जींस पेन्ट खरीदी, जो जगह-जगह से फटी हुई थी। जब वह ड्रेस पहनकर हॉल में आया और अपनी दादी को प्रणाम किया तो वे उसे देखकर आश्चर्यचकित रह गईं। आशीर्वाद की मुद्रा में उठे उनके हाथ जहां के तहां रह गए। 'क्या हुआ दादी मां, आपने आशीर्वाद नहीं दिया।'

               'अब क्या बताऊं बेटा! तुम्हें इस पोशाक में देखकर बहुत अटपटा लगा। आज के दिन ये फटे हुए कपड़े....! बेटा, ये वास्तु शास्त्र के हिसाब से अशुभ है। फटे हुए वस्त्र धारण करने से घर में खुशहाली की जगह कंगाली आती है।'

                   'जी दादी मां! परन्तु वास्तु शास्त्र क्या हम साधारण गरीब लोगों के लिए ही होता है, अमीरों के लिए नहीं?'

अब दादी मां चुप थीं, उनके पास इस बात का कोई जवाब नहीं था।

                       - सरिता सुराणा

                         हैदराबाद.

1 टिप्पणियाँ

  1. आदरणीय महोदय, आपकी रचना सराहनीय है, आपकी सलाह, सुझाव हमारे लिये बहुत महत्वपूर्ण हैं। इसलिए विनम्र निवेदन है कि लघुकथा क्रमांक 180 जिसका शीर्षक राशि रत्न है, http://www.rachanakar.org/2019/01/2019-180.html पर भी अपने बहुमूल्य सुझाव प्रेषित करने की कृपा कीजिए। कहते हैं कि कोई भी रचनाकार नहीं बल्कि रचना बड़ी होती है, अतएव सर्वश्रेष्ठ साहित्य दुनिया को पढ़ने को मिले, इसलिए आपके विचार/सुझाव/टिप्पणी जरूरी हैं। विश्वास है आपका मार्गदर्शन प्रस्तुत रचना को अवश्य भी प्राप्त होगा। अग्रिम धन्यवाद

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