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रोचक निबंध // तोता // डॉ. सुरेन्द्र वर्मा

तुम कहते वह कहता होता

अगर कहीं मैं तोता होता !

तोते की यही खासियत है। वाचाल होने के नाते, तोते को बात को दुहराने में विशेषज्ञता प्राप्त है। आप जो भी कहते हैं उसे वह बिना समझे-बूझे रट लेता है। आपकी बात दुहरा देता है। बहुत से छात्र-छात्राएं विषय को समझे बिना तोता रटंती से अपनी परीक्षाओं में पास हो जाते हैं।

तोते की यही खासियत चापलूसी में भी काम आती है। अच्छे-बुरे का बिना विचार किए, अपना मतलब साधने के लिए किसी की भी तारीफ़ करते रहना तोता-चश्मी कहलाती है। वस्तुत: तोते के अनेक ऐसे गुण हैं जिन्हें मनुष्य ने अपने हितार्थ अपना लिया है।

तोते को हम कई नामों से पुकारते हैं। इसे पोपट और सुआ भी कहते हैं। इसका एक नाम गंगाराम भी है। पता नहीं तोते का नाम गंगाराम कैसे पड़ गया ? तोते गंगाजी के किनारे ही रहते हों, यह ज़रूरी नहीं है। गंगाजी में नहाना उन्हें पसंद है, ऐसा भी नहीं कहा जा सकता। फिर भी तोता गंगाराम है। नाम के बारे में सोचना वस्तुत: बेकार ही है। नाम का काम से कोई लेना-देना होता नहीं।

तोता अपने मालिक का वफादार प्राणी है। मालिक के कहे अनुसार ही बोलता है। जब सरकार अन्य संस्थाओं पर, जो उस पर किसी कदर निर्भर होती हैं, (और कौन है जो सरकार पर किसी कदर निर्भर नहीं होता) अपना मालिकाना हक़ जमाने लगती हैं, तो वे संस्थाएं सरकार की तोता बन जाती हैं। ऐसे आरोप अक्सर लगते रहे हैं| अभी हाल ही में आरोप लगा था कि सरकार ने सी बी आई को अपना तोता बना रखा है। चारों तरफ से आवाजें आने लगीं की इस तोते को मुक्त किया जाए। और सी बी आई को स्वतन्त्र रूप से काम करने दिया जाए। कभी कभी तो ऐसी परिस्थितियाँ भी आती हैं कि क्या किया जाए, समझ में नहीं आता। आदमी किंकर्तव्यविमूढ़ हो जाता है और उसके हाथों के तोते उड़ जाते हैं।

जो लोग मशहूर हो जाते हैं, कहते हैं, उनकी तूती बोलने लगती है। यह तूती और कुछ नहीं तोते का ही स्त्रीलिंग है। तोता मर्दानी आवाज़ में बोलता है और टांय टांय करता रहता है जबकि तूती, छोटे जाति की तोते की, बारीक और मीठी आवाज़ है। आखिर तोते को मिट्ठू बिला-वजह ही नहीं कहा जाता।

तोता एक हरे रंग का पक्षी है। लेकिन हरे रंग की न जाने कितनी किस्में हैं। हल्का हरा, गहरा हरा। पता नहीं समुद्र का रंग नीला होता है या हरा, (विद्वानों की इस प्रसंग में अभी तक कोई सहमति नहीं बन पाई है) लेकिन अंग्रेज़ी में उसे ‘सी-ग्रीन’ ही कहा जाता है। चलिए मान लेते हैं कि समुद्र का रंग भी हरा ही होता है। लेकिन यह है कुछ अपने ही प्रकार का एक ख़ास हरा रंग। इसी तरह तोते का भी हरा रंग अपनी ही तरह का हरा रंग है। तभी तो इसे अलग से ‘तोतई रंग’ कहा गया है।

हमारी भाषा में तोता मैना, या कहें, शुक-सारिका की जोड़ी विख्यात है। मैना कोई तोती नहीं है, फिर भी पता नहीं ये जोड़ी कैसे बन गई ? तोते की जोड़ी तो मादा तोता (तोती) ही होती है। शुक और सारिका ये दोनों पक्षी तो बिलकुल अलग प्रजाति के पक्षी हैं। पर हमारी भाषा सारिका को शुक की, यदि पत्नी नहीं तो, प्रेमिका के रूप में देखती है और मज़ा ये है कि क्या तोता और क्या मैना, दोनों ही इस बात से पूरी तरह अनभिज्ञ हैं। पर कवि नहीं मानता।

सुर्ख चोंच देखकर शुक से बोली सारिका

अकेले ही खा लिया रे, बीड़ा पान का !

पान नहीं डार्लिंग, ये तो रंग है प्यार का

तोते का ज़िक्र आया तो आम याद आ गया। आम और अमरूद ये दोनों ही फल तोते को ख़ास पसंद हैं| झूठा करके तोता इन्हें डाली से नीचे फेंक देता है। तोते का खाया फल मीठा ज़रूर होगा। यही सोचकर बच्चे और कभी कभी वयस्क भी उसे उठाकर खाने में परहेज़ नहीं करते। तोते से भला कौन परहेज करता है ?

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-- डॉ. सुरेन्द्र वर्मा

१०, एच आई जी / १, सर्कुलर रोड

इलाहाबाद -२२१००१

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