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जयपुर में "शब्द मंथन" संपन्न

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दिनांक 12 जनवरी 2019 शनिवार को रोटरी क्लब में राही सहयोग संस्थान ( निदेशक , श्री प्रबोध कुमार गोविल  )द्वारा "शब्द मंथन "काव्य चर्चा का आयोजन किया गया  जिसकी अध्यक्षता  श्री राम लक्ष्मण गुप्ता जी(अध्यक्ष , तुलसी मानस संस्थान ) ने की ,मुख्य अतिथि डॉ दामोदर खड़से (पूर्व अध्यक्ष , महाराष्ट्र साहित्यिक अकादमी ) , विशिष्ट अतिथि श्री नन्द भारद्वाज ( पूर्व निदेशक दूरदर्शन एवं वरिष्ठ साहित्यकार ) ,श्री गोविन्द माथुर ( वरिष्ठ कवि एवं संपादक , अक्सर पत्रिका ) ,श्री भगवान अटलानी ( पूर्व अध्यक्ष , सिंधी साहित्य अकादमी ) ,श्री दुर्गा प्रसाद अग्रवाल ( वरिष्ठ समीक्षक एवं साहित्यकार ) रजनी मोरवाल  (वरिष्ठ कहानीकार ) ने उद्बोधन द्वारा मार्गदर्शन दे कर काव्य पाठ और रचना प्रस्तुत करने वाले रचनाकारों को कृतार्थ किया। मंच संचालन ' मुखर ' कविता  व चित्रेश रिझवानी  किया। कई वरिष्ठ और नवोदित रचनाकारों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत की।

भाग्यम   शर्मा की शानदार कहानी सुनने को मिली , नूतन   गुप्ता की छोटी छोटी कविताएं हमेशा की तरह इस बार भी सभी को बहुत अच्छी लगी , मेने भी अपना गीत सुनाया लेकिन इसबार रिकॉर्डिंग नही हो पाई।

युवा कवि रविन्द्र गुर्गाई रिश्तों और पतंग की तुलना के माध्यम से शानदार रचना प्रस्तुत की।

कल के इस आयोजन में साहित्य की अनेक विधाएं एकसाथ सुनने को मिली जैसे कहानी , लघु कहानी , कविताएं , क्षणिकाएं , दोहे , गीत , यात्रा वृतांत , मुक्तक आदि।

श्री दुर्गा प्रसाद अग्रवाल ने नवोदित रचनाकारों के मार्गदर्शन के लिए बहुत ही उत्तम और सुंदर सुझाव दिया जिस पर निदेशक प्रबोध कुमार गोविल  जल्दी ही काम भी करने वाले हैं सर ने ये भी कहा कि रचना लिखने के बाद उसे अपने ऐसे विश्वसनीय मित्रों को पढवाएँ जो आपको उसकी कमियां बताएं उसमें सुधार करवाएं ,दुर्गा प्रसाद जी ने कहा कि आलोचनाओं को सकारात्मक रूप से देखें और उन्हें गंभीरता से लें , नंद भारद्वाज को जितनी बार सुनते हैं उतनी बार ही कुछ नया सीखने को मिलता है उन्होंने बताया कि कविता कैसे लिखी जाये , कविता में 60 % अंश संवेदनाओं का होना चाहिए , कविताओं में पूर्व में कही गई बातों का दोहराव नही होना चाहिए बल्कि कुछ नया संदेश होना चाहिए , रचना में जहां तक संभव हो एक ही भाषा के शब्दों का उपयोग करें , कठिन शब्दों का कम से कम उपयोग हो , सर ने बताया कि रचना को लिखते ही सुनाने या छुपवाने की जल्दी नही करो बल्कि कुछ समय तक खुद ही बार बार पढ़ो उसमें सुधार अपने आप होते जाएंगे सर ने और भी महत्वपूर्ण बातों की जानकारी दी। अटलानी जी की कहानी को सुनकर पता चला कि हम व्यक्तिगत अनुभवों को कैसे लिख सकते हैं , लेखन के माध्यम से भ्र्ष्टाचार के खिलाफ सशक्तरूप से आवाज उठाई जा सकती है , दुर्गा प्रसाद अग्रवाल के यात्रा वृतांत ने बताया कि कैसे किसी जगह का सजीव चित्रण खींचा जा सकता है।

रजनी मोरवाल  कहानी एकसाथ कई विचारशील मुद्दे समेटे हुई थी , दामोदर खडसे ने पुणे के पास "पुस्तकांचे" गांव के बारे में रोचक जानकारी दी जो एक साहित्यक लाइब्रेरी के रूप में बसा है, पुणे में ही "बुक कॉफ़ी कैफ़े" के बारे में भी उन्होंने बताया।

कुल मिलाकर कल की " शब्द - मंथन चर्चा बहुत ही सार्थक और सफल रही फिरसे गुणीजनों को सुनने और सीखने का सुअवसर मिला।

सभी का हार्दिक आभार

- हिमांशु जोनवाल

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