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अपने -अपने वेलैंटाइन (लघुकथा) - सुरेश सौरभ

   भदर- भदर कुछ लोग कुछ पीट रहे थे। घनी चीखों से माहौल भरने लगा। पुलिस आई । भदर -भदर रोका,देखा दो रोती हुई आत्माएं आलिंगनबद्ध थी। पुलिस ने उनसे पूछा यहाँ कैसे?वे बोले- वेलैंटाइन। पीटने वाले से पूछा- तुम सब यहां कैसे? वे बोले -वेलैंटाइन।' पुलिस ने अपने माथे पर हाथ रखकर कहा-साला मेरा भी वेलैंटाइन यही होना था।

लेखक-सुरेश सौरभ
पता-निर्मल नगर लखीमपुर खीरी पिन-२६२७०१

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