नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 328 // जवाब है क्या ? // -शिव प्रताप पाल

प्रविष्टि क्रमांक - 328


जवाब है क्या ?

-शिव प्रताप पाल

इस कहानी की सभी घटनाएँ व पात्र काल्पनिक हैं, इसका किसी जीवित या मृत व्यक्ति से कोई सम्बन्ध नहीं है।

प्रार्थना स्थल से सभी विद्यार्थी, अपनी कक्षा में लौट चुके थे और अध्यापिका, मैडम ममता बच्चों का नाम पुकार कर कक्षा सात की उपस्थिति पंजिका पर उपस्थिति दर्ज कर रही थी। यह काम पूरा कर लेने के बाद उन्होंने विद्यार्थियों को पाठ्य पुस्तक निकालने का निर्देश दिया, जिससे कि वे अगला पाठ पढ़ा सकें।

बच्चे पुस्तकें निकाल चुके थे, तभी राकेश के बगल में बैठा विमल उठा और बोला – मैडम! राकेश, शराब की बोतल ले आया है। सभी बच्चे एकाएक ठहाका लगाकर हँस दिये, अध्यापिका एकदम सकते में आ गयी। बच्चों को जोर से डांट कर चुप कराया, फिर बोली – “राकेश यह मैं क्या सुन रही हूँ? तुम और शराब की बोतल। तुम तो एक अच्छे, समझदार और होनहार लड़के हो। फिर यह सब क्या है?”

राकेश अपराधी की तरह सर झुकाए अपने स्थान पर खड़ा हो गया, वह कुछ न बोला। अध्यापिका को गुस्सा आ गया, परन्तु अपने गुस्से को काबू मैं रखते हुए, संयत होकर बोली – “जवाब दो राकेश, यह क्या है, क्या तुम वाकई शराब लेकर विद्यालय आये हो? क्या तुम्हारी संगत बिगड़ गयी है?” राकेश चुपचाप वैसे ही बुत की तरह खड़ा रहा। अध्यापिका महोदया उसके पास तक चलकर आयी और उसके स्कूल बैग में झाँका। उसमें ‘रम’ की बोतल मिली, जो आधी खाली थी। उन्होंने बोतल बाहर निकाला और फिर राकेश को गुस्से से घूरा और बोली – “ ये बोतल तुम्हें किसने दी, और किसलिए दी। क्या इसी सब के लिए तुम्हारे माँ बाप तुम्हें स्कूल भेजते है। तुम्हारे पिताजी तो एक सफल व्यवसायी हैं, और माँ भी एक अच्छी पढ़ी लिखी गृहणी हैं। वे लोग सुनेंगे तो उन पर क्या बीतेगी, क्या ये तुमने कभी सोचा है?”

बच्चे के आँखों से आँसू झरने लगे, रोते हुए जवाब दिया – “मैडम, मेरे पिताजी अक्सर शराब पीकर आते हैं, कल भी वे पीकर आये थे। माँ ने टोका तो उन्होंने उनको मारा-पीटा और गालियाँ दी। फिर दूसरी बोतल भी खोलकर पीने लगे। बीच में मौका देखकर माँ ने बोतल कहीं छुपा दी, जिस पर पिताजी और अधिक नाराज़ हो गए, और माँ की दोबारा पिटाई कर दी, फिर बाद में वे खुद ढूँढते रहे, परन्तु बोतल खोज न सके। आज जब मैंने अपने बस्ता खोला तो मुझे ये बोतल नज़र आयी और मैं समझ गया की माँ ने ही इसे मेरे बस्ते में छुपाई होगी और बाद में इसमें से निकालना भूल गयी। मेरे बस्ता खोलते ही मेरे अलावा कुछ अन्य बच्चों की नज़र भी इस बोतल पर पड़ चुकी थी, और बात आप तक पहुँच गयी। मैं बहुत शर्मिंदा हूँ, और क्षमा चाहता हूँ।”

मैडम का दिल पसीज गया, उन्होंने बच्चे को ढांढस बंधाया, चुप कराया और फिर सभी बच्चों को शराब के दुष्प्रभाव के बारे में बताया, और सभी बच्चों को इन सब चीजों से दूर रहने को कहा। मगर बहुत से बच्चों के मन में एक सवाल अभी भी तैर रहा है कि शराब जब इतनी बुरी चीज़ है यों ये इतने बड़े पढ़े लिखे, समझदार और सफल लोग आखिर इसे पीते ही क्यों हैं? उनको मैडम की बतायी बात पर भी शायद पूरा भरोसा नहीं हो पा रहा है।

क्या आप के पास इन बच्चों को संतुष्ट करने के लिए कोई अच्छा सा जवाब है?

*--------------------------*

shivppal@gmail.com

1 टिप्पणियाँ

  1. आदरणीय महोदय, आपकी रचना सराहनीय है आपकी सलाह, सुझाव हमारे लिये बहुत महत्वपूर्ण हैं। इसलिए विनम्र निवेदन है कि लघुकथा क्रमांक 180 जिसका शीर्षक राशि रत्न है, http://www.rachanakar.org/2019/01/2019-180.html पर भी अपने बहुमूल्य सुझाव प्रेषित करने की कृपा कीजिए। कहते हैं कि कोई भी रचनाकार नहीं बल्कि रचना बड़ी होती है, अतएव सर्वश्रेष्ठ साहित्य दुनिया को पढ़ने को मिले, इसलिए आपके विचार/सुझाव/टिप्पणी जरूरी हैं। विश्वास है आपका मार्गदर्शन प्रस्तुत रचना को अवश्य भी प्राप्त होगा। अग्रिम धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.