नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

बाल कहानी - बरगद का पेड़ - गुलाब चंद पटेल

एक गांव में नदी के किनारे पटेल के खेत में बरगद का बहुत बड़ा पेड़ था! पेड़ की वजह से बहुत सारी जमीन पर खेती नहीं कर सकते थे! लोगों ने बताया कि पटेल जी आप इस पेड़ को हटा दीजिए ताकि आप पूरी जमीन पर खेती कर के अच्छी फसल ले सकेंगे!


पटेल ने दूसरे दिन मजदूरों को पेड़ काटने के लिए बुलाया गया? बरगद के पेड़ पर बहुत सारे भूतों का निवास था! भूतों ने देखा कि ये सभी मजदूर पेड़ काट रहे हैं! उन्होंने इकठ्ठा हो कर पटेल को बोला कि आप पेड़ मत कटवाइए, हम कहा जाएंगे? पटेल ने सोचकर बताया कि आप पास वाले खेत में बरगद का पेड़ हे वहां चले जाइए! मैं आप को एक क्विंटल चावल दूँगा! सभी भूतों ने स्वीकार किया लेकिन एक भूतनी जो मुखिया थी उसे ये मंजूर नहीं था, उसने पटेल की भैंसा का रूप ले लिया और उसके घर गई तब पटेल ने उसे पहचान लिया था कि ये मानो या न मानो लेकिन भूतनी ही है! भूतनी ने कहा कि देखो पटेल जी हम तुम्हें साल में एक क्विंटल चावल देने के लिए तैयार है! आप पेड़ मत कटवाओ!

पटेल ने भूतनी की बात मान ली! भूतनी वापस खेत में बरगद के पेड़ पर चढ़ गई तब सभी भूतों ने पूछा कि आप क्या करके आए, तब भूतनी 'ने बताया कि की मैंने पटेल को मना लिया है वो पेड़ नहीं कटवाएंगे! लेकिन एक शर्त हे कि हमें उसे एक क्विंटल चावल हर साल देना होगा! सभी भूतों ने भूतनी को बहुत डांटा और कहा कि आप को ऐसा करने की क्या जरूरत थी? हम सभी बाजू के खेत में बरगद का पेड़ हे वही चले जाते और हमें एक क्विंटल चावल मिलता! अब हम कहा से एक क्विंटल चावल पटेल को देंगे! भूतनी भी सोच में पड़ गई! लेकिन क्या करे "जब चिड़िया चुक गई खेत"

गुलाब चंद पटेल
कवि लेखक अनुवादक
नशा मुक्ति अभियान प्रणेता
गुजरात गांधीनगर

0 टिप्पणियाँ

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.