नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

कहानी अकल्पनीय – अविश्वनीय :- चमत्कार - गुलाब चंद पटेल

आज जहाँ पर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच खेलने का आयोजन होता है, उस अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम की बात है | १९८३ में वहां साबरमती से एक किलोमीटर रोड पर एक किसान की ९ एकड़ जमीन पर ये स्थित है | १९८३ में आदरणीय श्री ज्ञानी झैलसिंग भारत के राष्ट्रपति थे तब उन्होंने यहाँ इस खेल मैदान में अंतर्राष्ट्रीय पहली क्रिकेट मैच का उद्घाटन किया गया था | इस मैच में कपिलदेव भी शामिल थे | इस स्टेडियम बना तब इस का भी इतिहास है |

अहमदाबाद में एक सरदार पटेल स्टेडियम मोजूद था लेकिन, “बाल्कन जी बारी” और क्रिकेट असोसिएशन के टकराव मैं गुजरात में जब कोंग्रेस पार्टी की सरकार में श्री माधवसिंह सोलंकी गुजरात के मुख्य मंत्री थे तब उन्होंने रस लेकर इस स्टेडियम बनाने की मंजूरी दी थी | उसका कारोबार क्रिकेट असोसिएशन प्रमुख जो एक मिल मालिक के बेटे थे वो और उनकी पत्नी सम्हालती थी | इसमें किसान का बेटा कमल ने बहुत सहयोग किया था | उसने अपनी जमीन खेलदिली के कारण क्रिकेट असोसिएशन को किफायती दाम में देने के लिए अपने परिवार को समझाया था |

कमल के घर एक दिन उसकी नानी माँ अपने घर आई थी तब सभी लोग खान-पान के बाद रात में बातें कर रहे थे तब कमल की नानी माँ को माताजी का प्रकाश हुआ और उन्होंने कमल से पूछा कि तेरी जमीन बहुत उबड़़ खाबड़ होने से बिक नहीं रही है, लेकिन, में वचन देती हूँ कि एक साल के अंदर यहाँ खेल का मैदान बनेगा, वहां हजारों लोग आयेंगे और देश विदेश की रंग बिरंगी पताकायें लहराएगी, तब तुम मानेगा कि ये तुम्हारी नानी माँ की माताजी माँ महाकाली ने जो वचन दिया था वो पूरा हुआ, और हुआ भी ऐसा कि उस जमीन पर एक साल के अंदर सुंदर स्टेडियम ने आकार ले लिया | कमल के परिवार को जमीन के बदले बहुत कम पैसे मिले उसका थोडा रंज था और आनंद भी था क्यों कि उनकी जमीन पर एक अच्छा अंतर्राष्ट्रीय खेल का मैदान बन गया | इससे गाँव का नाम भी रोशन होगा और अपने को गौरव होगा कि चलो अपनी जमीन एक अच्छे काम में लग गयी | ये आधुनिक वैज्ञानिक युग में माताजी का ये चमत्कार होना अकल्पनीय, अविश्विनीय लगेगा लेकिन, ये कहानी सत्य पर आधारित है | कमल को माताजी ने पूछा था कि अगर मेरी बात सच हुई तब तुम मुझे क्या दोगे ? कमल ने माताजी को नमस्कार कर के बताया कि, हे महाकाली माँ तुम्हें मैं क्या दे सकता हूँ ? लेकिन, में ये बात सच होगी तो पुष्माला और श्रीफल अर्पित करुँगा | माताजी ने खुश होकर कमल को तथास्तु कर दिया | बात सच बनने से कमल और उसके साथ उनके उसके माता-पिताजी और भाई-बहन सभी मिलकर अपने ननिहाल गए | कमल पुष्पमाला, श्रीफल और जमीन के जो पैसे मिले थे उसमें से एक सोने की चेन बनवा कर अपने साथ ले गया था और सभी ने माताजी को प्रणाम कर के अर्पण किया |

अब कमल के परिवार में खुशियाँ लौट आई थी क्यों कि, उस जमीन से फसल से ज्यादा आमदनी इस लिए नहीं मिलती थी, क्यों कि, बारिश कम होने से फसल अच्छी नहीं होती थी | कभी कभी फसल फ़ेल हो जाती थी क्यों कि, जब बारिश हुए तब उसमें हल चलाकर बीज बोये जाते थे, उसके बाद लम्बे अरसे तक बारिश नहीं होने से फसल सुख जाती थी, इस लिए खेत में डाली हुई दवाइयाँ और बीज के पैसे का भारी नुकसान होता था इस लिए कर्जा लेना पड़ता था | जमीन के पैसों से ये कर्जा भी उतारा गया और गाँव में रहने के लिए जो मकान था उसकी दीवारें मिट्टी से बनी हुई थी और उपर छत में मिट्टी के खपड़े रक्खे गए थे | गाँव में कभी कभी बंदर आते थी वो मकान की छत पर कूदते थे इसकी वजह से खपडे टूट जाने से बारिश के समय पानी गिरने से बहुत दिक्कत होती थी | कभी-कभी तो चारपाई में बैठ कर कमल उसके भाई-बहन को अपनी मम्मी खाना खिलाती थी |

क्रिकेट असोसिएशन ने इस जमीन को पाने के लिए कमल और उसके माता-पिताजी को प्रलोभन दिए गए थे कि, उन्हें परिवार में से दो लोगों को नौकरी दी जाएगी, मैच के समय पवेलियनकी २५ टिकट मैच देखने के लिए दी जाएगी, लेकिन, ये सिलसिला दो साल तक चला | बाद में टिकट देना बंध हुआ क्यों कि क्रिकेट असोसिएशन के प्रमुख और उनकी कमिटी बदल गयी थी | कमल के परिवार से किसी को नौकरी भी नहीं मिली और मैच का टिकट भी मिलना बंध हो गया था | कमल को क्लब में मेम्बरशिप देने का जो वादा किया था वो भी पूरा नहीं हुआ | कमल और उसके परिवारवालों को आज भी उस जमीन को देख कर गौरव तो महसूस होता है लेकिन, उनके दिल में जमीन देने के वख्त जो बातें कही गयी थी, जो वादे किये गए थे वो पूरे नहीं होने से दिल में उसका अहसास आज भी है |


गुलाब चंद पटेल
कवि /लेखक/ अनुवादक
नशा मुक्ति अभियान प्रणेता
गुजरात गांधीनगर

E-mail: Patelgulabchand19@gmail.com

0 टिप्पणियाँ

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.