नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

लघुकथा - सेवा - भूपसिंह भारती

"सेवा"

सरला, कमला और बिमला इकट्ठी होकर सुशीला के घर जाकर ऊंची आवाज में बोली, 'अरी बहन सुशीला, सुनती हो, कल शहर में स्वामीजी के प्रवचन है, इसलिये आज से सेवा शिविर लगा हुआ है, चलो शिविर में सेवा करके पूण्य कमाएंगे।' सुशीला बालों में कंघी करती हुई बाहर आकर बोली, 'थोड़ी देर रुको बहनों, मैं अभी आई।' सुशीला अंदर जाकर जब अपनी अलमारी से अपना पर्स निकालने लगी तो उसकी सास ने खांसते हुए कहा, 'बहू, एक कप चाय बनादो, सिर फटा जा रहा है।' 'मैं जब भी कोई पूण्य का काम करने को जाती हूं तो तुम अवश्य टोंक देती हो। मेरे पास समय नहीं है। मेरी सहेलियां मेरी वेट में खड़ी हैं। मैं सेवा-शिविर में जा रही हूं। आले में सिर दर्द की गोलियां रखी हैं, लेकर सो जा।' ये कहती हुई सुशीला वहां से हवा के झोंके की भांति निकल गयी। अब वहां केवल कलावती देवी की खांसी की खों खों ही गूंज रही थी।

भूपसिंह भारती, शिक्षक,

रा व मा विद्यालय, पटीकरा,

जिला - महेन्द्र गढ़ - 123001

1 टिप्पणियाँ

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.