मदिरा और महंगाई - राजेश माहेश्वरी की कविताएँ

SHARE:

- राजेश माहेश्वरी परिचय राजेश माहेश्वरी का जन्म मध्यप्रदेश के जबलपुर शहर में 31 जुलाई 1954 को हुआ था। उनके द्वारा लिखित क्षितिज, जीवन कैसा ह...

- राजेश माहेश्वरी

परिचय

राजेश माहेश्वरी का जन्म मध्यप्रदेश के जबलपुर शहर में 31 जुलाई 1954 को हुआ था। उनके द्वारा लिखित क्षितिज, जीवन कैसा हो व मंथन कविता संग्रह, रात के ग्यारह बजे एवं रात ग्यारह बजे के बाद ( उपन्यास ), परिवर्तन, वे बहत्तर घंटे, हम कैसे आगे बढ़ें एवं प्रेरणा पथ कहानी संग्रह तथा पथ उद्योग से संबंधित विषयों पर किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं।

वे परफेक्ट उद्योग समूह, साऊथ एवेन्यु मॉल एवं मल्टीप्लेक्स, सेठ मन्नूलाल जगन्नाथ दास चेरिटिबल हास्पिटल ट्रस्ट में डायरेक्टर हैं। आप जबलपुर चेम्बर ऑफ कामर्स एवं इंडस्ट्रीस् के पूर्व चेयरमेन एवं एलायंस क्लब इंटरनेशनल के अंतर्राष्ट्रीय संयोजक के पद पर भी रहे हैं।
आपने अमेरिका, चीन, जापान, जर्मनी, फ्रांस, इंग्लैंड, सिंगापुर, बेल्जियम, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड, हांगकांग आदि सहित विभिन्न देशों की यात्राएँ की हैं। वर्तमान में आपका पता 106 नयागांव हाऊसिंग सोसायटी, रामपुर, जबलपुर (म.प्र) है।

16. सच्चा लोकतंत्र


  पहले था राजतंत्र
  अब आ गया है लोकतंत्र।
  पहले राजा शोषण कर रहा था
  अब नेता शोषण कर रहा है।
  जनता पहले भी गरीब थी
  आज भी गरीब है।
  कोई ईमान बेचकर,
कोई खून बेचकर
  और कोई तन बेचकर
कमा रहा है धन।
  तब भर पा रहा है
  अपना और अपने परिवार का पेट।
  कोई नहीं है
  गरीब के साथ,
गरीबी करवा रही है
  प्रतिदिन नए-नए अपराध और पाप।
  खोजना पड़ेगा कोई ऐसा मंत्र
  जिससे आ पाये सच्चा लोकतंत्र।
  मिटे गरीब और अमीर की खाई।
  क्या तुम्हारे पास है कोई
  ऐसा इलाज मेरे भाई।



                    17.  चीर हरण

उच्च पदों पर आसीन है
धृतराष्ट्र और गान्धारी।
  बुद्धिजीवी स्तब्ध है
द्रोणाचार्य और भीष्म के समान।
  भ्रष्टाचार कर रहा है अट्टहास
  दुर्योधन की तरह।
  चरित्रहीनता कर रही है चीरहरण
दुस्शासन की तरह
  पांसे खड़काते हुए शकुनी
  बिखरा रहे है वैमनस्यता और कलह।
  धर्म, ईमान, सच्चाई, सद्भाव और संवेदना
  सिर झुकाकर बैठे है किनारे पर
पाण्डवों की तरह।
  जनता कर रही है विलाप
द्रोपदी के समान
  खींचा जा रहा है उसका चीर
  वह पुकार रही है
  हे वसुदेव !
हे कृष्ण !
भरे दरबार में लुट रही है अबला
  उसकी लाज बचाओ।




           

   18.  अपराधी और राजनीतिज्ञ


राजनीतिज्ञों और अपराधियों का गठजोड़
  मेरी राय में नया नहीं है।
  यह तो महाभारत काल से चला आ रहा है।
  समय के साथ विकसित हो रहा है
  और पा रहा है नये नये रूप।
राजनीतिज्ञों ने सफलता के लिये
धनबल, प्रलोभन और भ्रष्टाचार के साथ
  बाहुबल को माध्यम बनाया
  इसके लिये
  अपराधियों तक को गले लगाया।
  उनको सत्ता तक पहुँचने का
  रास्ता दिखाया।
  लोहे को लोहा काटता है
  और जहर को जहर मारता है
  अब अपराधी सत्ता पर चढ़े है
  और सच्चे राजनीतिज्ञ
  घूरे में पड़े हैं।





         19.  अर्थ

ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना है
  यह सृष्टि और सृष्टि में
  सर्वश्रेष्ठ कृति है मानव
  मानव जिसमें क्षमता है
  सृजन और विकास की
आविष्कार की और
  समस्याओं के समाधान की
  वस्तु विनिमय का समाधान था
  मुद्रा का जन्म।
  मुद्रा अर्थात अर्थ
  अर्थ में छुपी हुई थी क्रय शक्ति
  इसी क्रय शक्ति ने
  बांट दिया मानव को
  अमीर और गरीब में
  अर्थ की धुरी पर घूमती हुई व्यवस्था ने
  निर्मित कर दी
  अमीर और गरीब के बीच
  एक गहरी खाई।
  अमीर होता जा रहा और अमीर
  गरीब होता जा रहा और गरीब।
  डगमगा रहा है सामाजिक संतुलन
  असंतुलन से बढ़ रहा है असंतोष
  असंतोष जिस दिन पार कर जाएगा अपनी सीमा
  फैल जाएगी अराजकता जो करेगी विध्वंस
  हमारे सृजन और विकास का।
  यदि कायम रखना है अपनी प्रगति
  जारी रखना है अपना सृजन
  तो जगाना पड़ेगी सामाजिक चेतना
  पाटना पड़ेगी अमीर और गरीब
  के बीच की खाई
  देना होगा सबको
  आर्थिक विकास का लाभ।
  पूरी करना होगी
  सबकी भौतिक आवश्यकताएँ।
  हर अमीर दे
  किसी गरीब को सहारा
  बनाए उसे स्वावलंबी
  कम होगी बेकारी तो कम होगा
  समाज का अपराधीकरण
  और बढ़ेगी राष्ट्रीय आय।
  इस संकल्प की पूर्णता के लिये
  सबको करना होगा प्रयत्न
  तभी सच्चा होगा
  सशक्त भारत निर्माण का स्वप्न ।
                        

     20.  सरकार


  सरकार तेजी से चल रही है।
  जनता नाहक डर रही है।
  सर के ऊपर से कार निकल रही है।
  सर को कार का पता नहीं
  कार को सर का पता नहीं
  पर सरकार चल रही है।
हर पाँच साल में जनता
  सर को बदल देती है।
  कार जैसी थी
  वैसी ही रहती है।
  सर बदल गया है
  कार भी बदल गई है
  आ गई है नई मुसीबत
  सर और कार में
  नहीं हो पा रहा है ताल मेल
  लेकिन सरकार
  फिर भी चल रही है।
जनता जहाँ थी वही है
  परिवर्तन की चाहत में
  सर धुन रही है।


    21.  समीक्षा, प्रतीक्षा और महँगाई


  सरकार समीक्षा कर रही है
  जनता प्रतीक्षा कर रही है
  देश में महँगाई क्यों बढ़ रही है ?
सरकार का कहना है -
बढ़ रही है जनता की क्रय शक्ति
  इससे बढ़ रही है खरीददारी
बढ़ रही है माँग
  और बढ़ रहे हैं दाम।
  जनता है हैरान
  गरीब और गरीबी से त्रस्त है
  अमीर अपनी अमीरी में मस्त है
  सरकार ने गरीबी रेखा को बदल दिया
  लाखों गरीबों को
  रातों रात अमीर कर दिया
  गठित कर दिया आयोग
  करने के लिए स्थिति की समीक्षा
  जनता कर रही है प्रतीक्षा
महँगाई बढ़ती ही जा रही है
  जनता महँगाई से परेशान
  आँसू बहा रही है।



           

        22.  मदिरा और महँगाई

महँगाई लगातार बढ़ती जा रही है
  और बढ़ती जा रही है
  मदिरा की खपत।
दोनों का नीतियों से है गहरा संबंध
दोनों का सत्ता से है
  सीधा अनुबंध।
  खोल दिये है
  विदेशी कंपनियों के लिये
  भारत के बाजार।
  हो गई है -
विदेशी वस्तुओं की बाजार में भरमार।
बढ़ा रही है उपभोक्तावाद को
  लगातार सरकार।
बढ़ता ही जा रहा है
  जनता पर भार।
  सभी को चाहिए
  जीने के लिये अधिक कमाई।
  इसी चक्र में फंसकर
बढ़ रही है मँहगाई।
उपभोगवादी प्रवृत्ति
बढ़ा रही है सरकार का खर्चा।
  सत्र खत्म हो जाता है
  बिना किए कोई चर्चा।
  मंत्री जी कमाई के लिए
  बांट रहे परमीशन
  अफसर और नेता मिलकर
  खा रहे कमीशन।
  प्रतिदिन होती है एक्सरसाइज
  कमाई का सर्वोत्तम साधन है एक्ससाइज।
  इसके लिए कदम कदम पर
  खुल रहे है मदिरालय,
मदिरालय संरक्षित है पर
  टूट रहे देवालय।
महँगाई और मदिरा से
  गृहलक्ष्मी है परेशान।
  इस समस्या का कही भी
  नजर नहीं आता है समाधान।
  सरकार यदि करे नीतियाँ परिवर्तित
  तो इन्हें भी किया जा सकता है नियंत्रित।
  इसके सिवा नहीं है कोई विकल्प
  इसके लिये शासन को ही
  लेना होगा दृढ़ संकल्प।


                    

23.  एक भिखारी


  एक भिखारी मैला कुचैला
  दीन भाव से आया।
  मेरे सामने हाथ फैलाया।
  जेब से कुछ निकालते निकालते
  मैं उससे पूछा बाबा !
तुम अन्ना या प्रधानमंत्री को जानते हो ?
वह बोला - बाबू जी।
  मैं तो सिर्फ रोटी और कपड़े को जानता हूँ।
  जो मुझे कुछ देते है
  और जो कुछ नहीं देते है
  उन दोनों के लिये दुआ माँगता हूँ।
  मैंने फिर पूछा, क्या तुम्हें पता है ?
विदेशों से काला धन वापिस लाने के लिये
  और भ्रष्टाचार मिटाने के लिये
  चल रहा है एक बड़ा आंदोलन।
  वह बोला- मैं तो केवल जानता हूँ
  अपने शरीर को ढंकने वाले
  इन फटे कपड़ों को
  और जेब में पड़े कुछ पैसों को
  मैं क्या जानूँ -
कालाधन, भ्रष्टाचार या आंदोलन।
  मैं कल भी भिखारी था आज भी हूँ
  और कल भी रहूँगा।
टुकड़े टुकड़े बासी रोटी,
कट फटे कपड़े और टूटा हुआ छप्पर ही
  मेरी संपत्ति मेरा धन है।
  ये तो बड़ों की बातें है काला धन आएगा
  तो इन्हीं में बंट जाएगा।
  गरीब, गरीब ही रहेगा
  उसका जीवन तो
  रोटी और पानी में ही कट जाएगा।
  मैं सोच में पड़ गया
  क्या विदेशों में पड़ा
कालाधन आने पर ही
  गरीब का पेट भर पाएगा।
  क्या अभी हमारे पास नहीं है
  इतना धन और सामान,
जिससे हर नागरिक को मिल सके
  जीने लायक रोटी, कपड़ा और मकान।
  मैंने अपना हाथ जेब से बाहर किया।
  जो कुछ हाथ में आया
  वह उसे सौंप दिया।
  वह दुआएँ देता हुआ आगे बढ़ गया
  और मैं देश के भविष्य पर
  सोचता हुआ अपनी जगह पर
खड़ा रह गया।
                  

  24. पाकेट मार


  एक जेब कतरे ने
  राहगीर के जेब पर
  अपना हाथ आजमाया
  उसका धन अपना बनाया
  दूसरे जेबकतरे ने
  पहले जेबकतरे का
  जेब साफ कर दिया
  राहगीर के साथ-साथ
  जेबकतरे का धन भी हथिया लिया
  तीसरे जेब कतरे ने
  दूसरे का जेब कतर लिया
  राहगीर के साथ-साथ
  दोनों जेबकतरों के धन पर भी
  कब्जा जमा लिया।
  राहगीर है जनता
  पहला जेबकतरा है अधिकारी
  दूसरा है व्यापारी
  तीसरा है नेता
  जनता का धन
  अधिकारी व व्यापारी से छनता हुआ
नेताओं की जेब में जा रहा है
  उनके घरों में
  उनकी तिजोरियों में
  या विदेशी बैंकों के खातों में
  शोभा बढ़ा रहा है
  राजनीति और व्यवस्था का दानव
  कटी जेबों से झांकते हुए
  अट्टहास लगा रहा है।



                      

   25.  विध्वंस 

एक विद्वान ने
  लिपिबद्ध किया
  साहित्य में इतिहास को।
  दूसरे प्रस्तुत की प्रतिक्रिया
  और दी चिंतन को नई दिशा।
  तीसरे ने दोनों को सहेजा
  और दिया संरक्षण।
  सहसा छिड़ गया युद्ध
  चलने लगी गोलियाँ
  होने लगे धमाके
  और एक धमाके ने
  कर दिया विध्वंस
  मिटा दिया सब कुछ
  राख में तब्दील हो गई
  कलम और उसका सारा सृजन।
  फिर शांति दूत आये
  उन्होंने राख पर आंसू बहाये
  व्यक्त की संवेदना
  और श्रद्धांजलि के पुष्प चढ़ाये।
  अब वह विध्वंस जनता के लिये
  दर्शनीय स्थल हो गया।
  वे रचनाएँ, वे पाण्डुलिपियाँ
  और वह साहित्य
  सदा सदा के लिये
  राख के ढेर में खो गया।


                 

  26. जीवन ऐसा हो


  युद्ध नहीं शांति
  घृणा नहीं प्रेम
  विध्वंस नहीं सृजन
  लाएगा राष्ट्र में नया परिवर्तन
  युवा आगे आए और लाए
  कर्म और श्रम की बहारें।
  युद्ध और आतंकवाद की विभीषिका,
कर रही है धन की बर्बादी
  माँ से छीन रही है बेटा,
बहिन से उसका भाई
  और पत्नी से उसका सौभाग्य।
  शहीदों की विधवाओं को
  दिया जा रहा है सम्मान,
क्या इससे मिल जाएगा
बिछुड़ा हुआ अपना
जीवन का सपना
  सांप्रदायिकता और वैमनस्यता की जगह
  आर्थिक क्रांति लाए।
  बेरोजगारी का कलंक मिटाएं
स्वरोजगार की ध्वजा फहराए
  एकता और सहयोग की मशाल उठाए
  देश को उसका गौरव दिलवाए
  घर घर में
  सद्भावों के दीप जलाए।



                  

  27.  बँटवारा

बढ़ती ही जा रही है
  जीवन में जटिलता।
बढ़ती जा रही है
  आदमी की व्यस्तता।
  दूभर हो रहा है
  संयुक्त परिवार का संचालन।
  हो रहा है विघटन अर्थात्
  परिवारों का संक्षिप्तीकरण।
  जब होता है बंटवारा
  तब जन्म लेते है मनभेद
बढ़ते हैं मतभेद
  आपस में हल नहीं होते विवाद।
  न्यायालयों में होता है
  बेहिसाब कीमती समय बर्बाद।
  पारिवारिक उद्योग हो जाते है चौपट,
बढ़ती है खटपट।
  राष्ट्र की आर्थिक क्षति
  के बचाव के लिये
  सामाजिक शांति और
  सद्भाव के लिये
  बहुत आवश्यक है
  एक तटस्थ न्यायालयीन निकाय।
  जहाँ समस्या समय सीमा में
  सुलझा ली जाय।
  ऐसा होने पर रूकेगी आर्थिक क्षति
  नहीं पनप सकेगा पारिवारिक विवाद
खण्डित नहीं होगी पारिवारिक एकता
सुदृढ़ बनेगा हमारा समाज
  तब हर घर में चमकेगा
  प्रेम और साहचर्य का ऐसा सूरज
  जिसका सूर्यास्त कभी नहीं होगा।


                

  28.  जीवन की राह


गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम
  पवित्र हो सकता है
  किंतु मोक्षदायक नहीं।
  मोक्ष निर्भर है
  धर्म एवं कर्म पर।
संगम में डुबकी से भावना बदल सकती है
  किंतु बिना कर्म के मोक्ष असंभव है।
  हमारी सांस्कृतिक मान्यता है
  जैसा होगा कर्म वैसा ही होगा कर्मफल।
  जब हम मनसा वाचा कर्मणा
सत्यमेव जयते को अपनायेंगें
  तो जीवन में होगा
  सुख, संपदा और स्नेह का संगम।
  सूर्य देगा ऊर्जा,
प्रकाश दिखलाएगा रास्ता
  सुहावनी संध्या देगी शांति
निशा देगी विश्राम
  चांदनी से मिलेगी तृप्ति की अनुभूति
  और हम पर बरसेगी परमात्मा की कृपा।
  हमारे जीवन में हो समर्पण
  कर्म में हो सेवा, धर्म में हो परोपकार
धनोपार्जन में हो ईमानदारी और सच्चाई
  हृदय में हो आत्मीयता
  और वाणी में हो मधुरता
  तो ईश्वर हमारे साथ रहेगा
  और स्वर्ग बन जाएगा
  हमारा घर, नगर और हमारा देश।


       29.  मसीहा

जिसने उसे जन्म दिया
  उसने जन्म भूमि पर ही
  उसे एकाकी छोड़ दिया
  धरती की गोद में पड़ा
  आकाश को पुकार रहा वह
  उसके रूदन में
  तार तार हो रहा था मातृत्व
  और तड़प रही थी मानवता
  तभी बढ़े
  किसी मसीहा के दे हाथ
  और ले गए उसे अपने साथ
  अनजाने गंतव्य की ओर।
  मसीहा बरसाता रहा उस पर
  अपना प्यार और दुलार
ऋतुएँ आती रही
  और जाती रही
  वह नन्हा
  अब हो गया था युवा
  एक दिन मसीहा
  उसे छेड़कर चला गया
  और हो गया
  उस अनंत में विलीन।
  जीवन पथ पर चलते चलते
  इतिहास ने अपने को दुहराया
  उसने भी एक अबोध को
  कचरे के ढेर पर रोता हुआ पाया।
बढ़ गये उसके हाथ
  और उसने लगा लिया
  उसे अपने सीने से।
  अब वह उसका पालन करने लगा।
  उस पर जान छिड़कने लगा।
  दुनिया उसे मसीहा कहती है।
  जहाँ दानवता रही है
  वहाँ मानवता भी रहती है।


    30.  प्रेरणा

क्षण भर पहले वह हँस रहा था
  अचानक हुई दुर्घटना
  और वह सड़क पर पड़ा कराह रहा था
  एकत्रित हो गई भीड़
  कर रही थी एम्बुलेंस की प्रतीक्षा
  और समय बिताते हुए
  कैसे, कब, क्या हुआ
  कर रही थी इसकी समीक्षा।
  मैंने उसे उठाया सहारा देकर अस्पताल पहुँचाया।
  अस्पताल में चिकित्सक ने बताया
थोड़ा सा भी विलम्ब कर सकता था बड़ा अनर्थ।
  मैंने ईश्वर को धन्यवाद दिया
  जिसने मुझे निमित्त बनाकर
  उसको दिया जीवन दान
  और मेरे जीवन को समझाया जीने का अर्थ।
  उसकी आँखों से झाँकती हुई पीड़ा
  उसमें जागी हुई जीवन की आशा
  और मेरे प्रति उसका आभार
  आज भी मुझे दिखता है
  मेरी आँखों में झूलता हुआ।
  मुझसे कहता है -
कभी किसी पीड़ित की
  सहायता में विलम्ब मत करना।
  किसी को मदद की हो आवश्यकता
  तो मत करना किसी की प्रतीक्षा।
  तुम्हारी यह सेवा और सेवा की तत्परता
  तुम्हारे जीवन को देगी सार्थकता।

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: मदिरा और महंगाई - राजेश माहेश्वरी की कविताएँ
मदिरा और महंगाई - राजेश माहेश्वरी की कविताएँ
https://lh3.googleusercontent.com/-NEOp7IKnBn4/W3u4u7ufVFI/AAAAAAABD80/tiK4qTgohiI7JthgvFDnEAT2iQkwvXxaACHMYCw/image_thumb%255B3%255D?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-NEOp7IKnBn4/W3u4u7ufVFI/AAAAAAABD80/tiK4qTgohiI7JthgvFDnEAT2iQkwvXxaACHMYCw/s72-c/image_thumb%255B3%255D?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2019/02/blog-post_35.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2019/02/blog-post_35.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content