नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 385 // बहुमूल्य सन्देश // चरण सिँह गुप्ता

प्रविष्टि क्रमांक - 385


चरण सिँह गुप्ता

बहुमूल्य सन्देश

एक यात्री रेलगाड़ी में सफ़र कर रहा था। वह अखबार पढ़ने में तल्लीन था। उसके पास एक भिखारी आया और बोला, “अल्लाह के नाम पर कुछ दे दो बाबा”।

यात्री ने नजर उठाकर भिखारी को देखा और बोला, “मैं तेरे अल्लाह को नहीं मानता”।

भिखारी भी शायद पीछा छोड़ने वालों में नहीं था अत: बोला, “तो साईं के नाम पर ही दे दो साहब”।

यात्री भी पीछे हटने वाला नहीं था इसलिए कहा, “मैं साईं को भी नहीं मानता, हाँ अगर तुम राम के नाम पर मांगो तो मैं तुम्हें 10 रूपये दे दूंगा”|

भिखारी असमंजस में इधर उधर देखने लगा। बाकी बैठे यात्रियों का कौतूहल भी बढ़ गया। उसकी स्थिति देखते हुए यात्री ने उसे और लालच देते हुए दोबारा कहा, “अगर तुम भगवान् राम के नाम पर मुझ से मांगोगे तो मैं तुम्हें 50 रूपये दूंगा”।

सभी यात्री भिखारी की प्रतिक्रिया जानने को उत्सुक दिखाई दे रहे थे। थोड़ी देर किंकर्तव्यविमूढ़ की स्थिति में रहने के बाद वह भिखारी, बिना रूपये लिए, पैर पटकता हुआ वहां से चला गया। कुछ लोग तो भिखारी पर हंसने लगे तथा बेवकूफ भी कहने लगे परन्तु यात्री को उसके इस रवैये से आश्चर्य के साथ उसकी निष्ठा पर गर्व भी हुआ कि बेशक उस के पास खाने तक की कमी है फिर भी पैसों के कारण उसने अपने धर्म से समझौता नहीं किया। उसने अपनी माँ से पाए संस्कारों को गौरवान्वित कर दिया था।

बाद में यह सोचकर यात्री का मन ग्लानि से भर गया कि हिन्दू धर्म से सम्बन्ध रखने वाले बहुत से धनाढ्य लोग भी अपने निजी स्वार्थ के लिए अपने धर्म से गद्दारी करने पर उतारू रहते हैं। यात्री के विचार से भिखारी ने उसका प्रस्ताव ठुकराकर हिन्दुओं को आत्मचिंतन करने का बहुमूल्य सन्देश देने का कार्य किया है।


चरण सिँह गुप्ता

डब्लू.जैड.-653, नारायणा गाँव

नई देहली-110028


Email: csgupta1946@gmail.com

0 टिप्पणियाँ

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.