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लघु कहानी - प्रण - कल्पना गोयल

सुबह उठकर स्नेहा हमेशा की तरह घूमने निकल रही थी कि दरवाजा बंद करते ही फोन बज उठा। उसे सुबह के वक्त मोबाइल साथ रखना पसंद नहीं इसलिए फिर से ताला खोलना पड़ा। फोन उठाया तो बंद हो चुका था फिर मिलाते ही हलो की आवाज के बाद बधाई दी जा रही थी। स्नेहा चकित हो कर बोली-"पहले बताइये तो बधाई और किस बात की?"

उधर से जवाब आया-"मैडम, आपकी नियुक्ति जिला कलेक्टर के पद पर होना स्वीकृत हुआ है।" इतना सुनकर फोन कट गया था एक क्षण को वह विस्मित नेत्रों से दीवार को तकने लगी और उसके गालों पर अन--वरत अश्रु बह रहे थे। आज उसके पास कोई नहीं था जो कि उसकी इस खुशी का सहभागी बन सके। उसे बधाई दे सके वह वहीं धड़ाम से नीचे ही बैठ गई।

आज अष्टमी तिथि है उसे याद हो आया कि ठीक आज ही के दिन उसका जन्म हुआ था और अनाथालय की बहिन जी द्वारा बताया गया था कि उसके जन्म के कुछ घंटों बाद ही उसके परिजन उसे जंगल की झाडियों में फेंक गए थे। कुछ देर बाद रोने की आवाज सुनकर राह से गुजरते किसी व्यक्ति ने पुलिस को सूचना दी थी। पुलिस के आने तक बच्ची कपड़ों में लिपटी मिली, मगर उसके कोमल शरीर पर अनेक जख्म हो गए थे। उसे अनाथालय के अस्पताल में ले जाया गया और यथावत कार्यवाही के बाद वहीं पालनपोषण हुआ। पढ़ने में निपुण होने के साथ सभी क्षेत्रों में अभिरुचि रही। वयस्क होने तक पढ़ाई पूरी की और स्वतंत्र रूप से प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी प्रारंभ की। परिणाम सबके सामने है।

मन में यही सवाल उठ रहा था कि आखिर ऐसी क्या वजह रही होगी जो कि मेरे साथ ऐसा हुआ ?वह विचारमग्न ही थी कि अखबार वाला अखबार दे गया। विचार छोड़ वह अखबार पढ़ने लगी थी तो राजनीति ही सभी ओर व्याप्त नजर आ रही थी। पृष्ठ पलटने के साथ सबसे ऊपर वाली खबर पर दृष्टि ठहर गई" किसी नवजात बालिका को परिजनों के द्वारा 4फीट गहरे गढ़्ढे में छोड दिया गया"।

स्नेहा तुरंत उठी और घर के ताला लगा कर चल दी उस नवजात की खोज में। वह अभी ही प्रण कर चुकी थी कि कभी शादी नहीं करेगी। आज से ऐसी बच्चियों को गोद लेकर परवरिश करेगी... उन्हें पढ़ाएगी.. और अपने पैरों पर खड़े होने योग्य बनाएगी। आज स्नेहा की बगिया में तीन कलियां पल्लवित हो रही हैं। बड़ी बेटी सेना में जाने की तैयारी कर रही है। आज स्नेहा फख्र से कहती है मेरे पास मेरा सुख-दुःख बाँटने को तीन बेटियां नहीं तीन शक्तियां हैं।

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कल्पना गोयल, जयपुर

ए-४१,सेठी कॉलोनी, शिव मॉर्ग

जयपुर-३०२००४

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