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बाल कहानी - आलस - सार्थक देवांगन

आलस ही सबसे बडा दुश्मन है

छोटू का दोस्त संजू बहुत आलसी है। वह काम या तो करता नहीं या फिर धीरे ‌‌‌- धीरे करता है जिसकी वजह से अक्सर मम्मी , पापा और भैया से डांट खानी पड़ती है। और तो और उसकी इस आदत की वजह से अक्सर स्कूल बस भी छूट जाती है। छोटू चाहता है कि उसका दोस्त आलस छोड़कर स्मार्ट बने। अपने सब काम समय पर करे और स्कूल के लिए समय पर तैयार हो। अपने दोस्त को सुधारने के लिए छोटू ने क्या सोचा और क्या किया जिससे उसका दोस्त सुधर गया।

संजू का आलस उसे हमेशा हरा देता था। वह बहुत ही अच्छा बैडमिंटन का खिलाड़ी था। कुछ दिन बाद , छोटू संजू को एक दिन एक प्रतियोगिता में लेकर गया था जिसका नाम था बैडमिंटन प्रतियोगिता। छोटू चाहता था कि उसमें संजू भी भाग ले और उसने संजू का नाम दर्ज करवा दिया। प्रतियोगिता शुरू हो गई। उसमें बडे से बडे लोग आये थे पर किसी का खेल संजू से बेहतर नहीं था। देखते ही देखते संजू प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंच गया। फाइनल शाम को होना था। परंतु संजू वक्त पर नहीं पहुंच पाया , उसका आलस वहां भी उसे ले डूबा। वह बिना खेले ही हार गया। नाम और इनाम तथा आगे जाने की सीढ़ी सभी से वंचित संजू को पहली बार समझ आया कि आलस बुरी बला है इससे कोई फायदा नहीं होने वाला है बल्कि केवल नुकसान ही नुकसान है। उस दिन के बाद से संजू ने आलस से तौबा कर लिया और अपने मन और शरीर में फुर्ती जगा लिया।

सार्थक देवांगन

१३ साल रायपूर

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