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गाय पर निबंध (हास्य-व्यंग्य) -सुरेश सौरभ

गाय एक बहुत सीधा जानवर है, इसलिए इसे लोगों ने चुनावी पशु बना रखा है। गाय हमारी बड़ी अम्मा हैं। गाय के बच्चे सब हमारे भाई-बहन हैं। सब सांड-बैल हमारे पिता समान हैं ,और हमें इनका उतना ही सम्मान करना चाहिए जितना हम अपने माता-पिता और बड़े़ बुजुर्गों का करतें हैं इसलिए सभी लोगों को, गाय को अंतरराष्ट्रीय पशु बनाने में व्यापक पहल करनी चाहिए ।इस महान कार्य में सभी देशवासियों को अपना महत्त्वपूर्ण योगदान देना चाहिए, क्योंकि गाय अगर अंतरराष्ट्रीय पशु बन गई, तो यह भारत की बहुत बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि कही जायेगी और इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए हम सभी को एकजुट हो कर संघर्ष करना चाहिए, जो भी गाय को कटता-छांटता,खाल उतरता मिल जाए बस उसको धुन देना चाहिए, धो देना चाहिए।

कुछ दल  इस दैवीय काम में लगे हुए हैं , तमाम दलितों-मुस्लिमों को,गौ रक्षा न करने पर द्वन्द्वात्मक सबक सिखा रहे हैैं। वह दिन दूर नहीं जब हमारी गौ माताओं की पूरे विश्व में आरती उतारी जायेगी, पूजा की जायेगी ,वंदना की जायेगी, साधना की जायेगी। दुनिया भर के विश्वविद्यालयों में गौ शोध संस्थान के विभाग बनाए जायेंगे। तब हम देशवासियों की खूब चौड़ी-चौड़ी छातियां हो जायेंगी, इसलिए सभी भाइयों- बहनों को इस पुनीत कार्य में तन-मन-धन से पूरा सहयोग करना चाहिए ।जिससे हम अपने देश का नाम पूरे विश्व में फैला सकें। बहनों-भाइयों आपको पता होगा हमारे धार्मिक ग्रंथों में यह लिखा है ,एक विवाह ऐसा भी होता है, जिसमें कन्या पक्ष को गाय, सांड बैल देकर शादी की जाती थी। इससे शादी में खर्चा-वर्चा भी बहुत कम आता था, इसे आर्ष  विवाह कहते थे‌। इस विवाह को हमारी सरकार अनिवार्य रुप से लागू करें, इससे खर्चों में कमी आयेगी और राष्ट्रीय आय में वृद्धि होगी।

इस वर्ष विवाह शुरू होने से बहुत से गरीब-बेकार युवक और युवतियों को लाभ ही लाभ होगा, बहुत ही कम लागत पर उन्हें, दांपत्य जीवन का, स्वर्गीय सुख प्राप्त होगा, इसलिए गाय को अंतरराष्ट्रीय पशु बनाने के लिए, इनका संरक्षण करने के लिए, सभी को सड़क से संसद तक एकजुट हो कर वृहद आंदोलन खड़ा करना चाहिए। ताकि हमारी एकता और भाईचारे की शक्ति पूरे विश्व को दिखाई पड़े,और पूरे विश्व में हमारी मिसाल कायम हो सके।

आप को पता होना चाहिए,हमारा देश आज बहुत जोरों से तरक्की कर रहा है ,हमारे किसान आवारा गाय-बैल-सांड से बहुत ही लाभान्वित हो रहे हैं, ये सब किसानों के खेतों की सुरक्षा कर रहे हैं, बहुत ही मदद कर रहे हैं और इनके गोबर-मूत्र से धुवांधार औषधियॉ बनाईं जा रहीं हैं,जो विदेशों में भेजीं जा रहीं हैं , तमाम विदेशी पैसा देश के खातों में जमा हो रहा है ,जिससे देश खुशहाल हो रहा है और इन औषधियों से देश के तमाम असाध्य रोगों से पीड़ित व्यक्तियों का भी इलाज किया जा रहा है। तमाम एम्स और कई नामी-गिरामी मेडिकल कालेजों से भगाये गये मरीजो को गौ मूत्र से,गोबर से, उनकी लाइलाज बीमारियों को भगाया जा रहा है।

इसलिए गौ शालाओ की संख्या बढा़ई जाए, जिसमें तमाम डाक्टरों की नियुक्ति की जाए, यही डाक्टर गायों पर शोध करके लाइलाज रोगों का इलाज गौ मूत्र गोबर से करें। देश के चहुंमुखी विकास के लिए गोवंश की दुनिया को विस्तृत किया जाए।

लेखक-सुरेश सौरभ

निर्मल नगर लखीमपुर खीरी

पिन-262701

कापीराइट-लेखक

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