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ज्ञानदेव मुकेश की 2 लघुकथाएँ

 

         रक्षक कौन ?

  एक उद्योगपति का बेटा भीषण कार दुर्घटना का शिकार हो गया। आनन-फानन में उसे एक बड़े अस्पताल में लाया गया। उसकी अवस्था बड़ी नाजुक थी। अस्पताल के डाक्टर उसके जीवन रक्षा के सभी उपाय करने में तत्क्षण जुट गए। वे कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे थे।


  तभी वे उद्यागपति स्वयं अस्पताल पहुंच गए। वे सीधे अस्पताल के मुख्य प्रबंधक के कक्ष में गए। उन्होंने प्रबंधक से कहा, ‘‘मेरे बेटे को बचाइए। उसे कुछ नहीं होना चाहिए। आप जितना कहेंगे मैं उतना खर्च करने को तैयार हूं। मैं अपने बेटे के प्राण के लिए पैसा पानी की तरह बहा दूंगा।’’


प्रबंधक मंद-मंद मुसकराने लगे। उन्होंने कहा, ‘‘आप बड़े उद्योगपति है। निस्संदेह आपने पैसे की ताकत को देखा और समझा होगा। आपने आर्थिक दुनिया में पैसे के बल पर सभी कुछ हासिल किया होगा। मगर यह अस्पताल है। यहां ईश्वर की कृपा, परिजनों की दुआ और हमारे निष्ठावान और समर्पित डाक्टरों के अथक प्रयास ही किसी की जीवन-रक्षा में काम आते हैं। आपका पैसा यहां निरर्थक है। यहां उस पैसे का दंभ न भरें। डाक्टर अपना काम कर रहे हैं। आगे एक प्रार्थना-कक्ष है। कृपया आप वहीं चले जाएं और अपना पैसा भूलकर ईश्वर से दुआ करें।’’
  बड़े उद्योगपति ने तुरंत दंभ की नजरें नीचे गिरा लीं और वे एक सामान्य पिता बनकर प्रार्थना-कक्ष की ओर बढ़ गए।

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        सच तो यह है

बूढे पिता 93 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी की सरहद पार करते हुए आखिर दुनिया से कूच कर गए। खबर जैसे ही आग की तरह फैली नजदीकी लोग आने लगे और घर के लोगों को सांत्वना देने लगे। घर के सदस्यों ने सांत्वना का प्रत्युत्तर कुछ इस तरह देना शुरू किया, ‘‘पिताजी तो लंबे समय से बहुत कष्ट में थे। उनका जाना ही ठीक था। उन्हें एक तरह से मुक्ति मिली है।’’ 
सांत्वना देने वाले हर व्यक्ति को ऐसा ही जवाब मिलता गया। सभी बड़े किंकर्तव्यविमूढ़ थे।


तभी उनके पिता के एक बूढ़े मित्र ने तिलमिलाकर जवाब दिया, ‘‘हां भाई ! घर में बड़ा कष्ट था... उनके जाने से तुम सभी को बड़ी राहत मिली है। दरअसल मुक्ति तुम्हें मिली है। बेकार में उनके नाम की माला जप रहे हो !’’
   
                                                    -ज्ञानदेव मुकेश                         
                                 पता-
                                             फ्लैट संख्या-301, साई हॉरमनी अपार्टमेन्ट,
                                             अल्पना मार्केट के पास,
                                             न्यू पाटलिपुत्र कॉलोनी, 
                                             पटना-800013 (बिहार)


e-mail address - gyandevam@rediffmail.com

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