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आधुनिक समाज का आईना - बसंत बल्लभ भट्ट

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आधुनिक समाज का आईना

आज बहुत गर्मी थी , दुकान में कुछ काम भी नहीं था। मैंने सोचा चलो अपने मित्र से मिलने चला जाय। मैं बहुत दिनों से उसके घर नहीं जा पाया था। मैंने रात को खाना जल्दी खा लिया, और मैं अपने कंप्यूटर को बंद करने ही जा रहा था कि एक छोटा बच्चा जो करीब 7 साल को होगा। वह अपने पापा व अपनी बड़ी बहन के साथ मेरी दुकान में आ गया, और अपनी प्यारी आवाज में अपनी बड़ी बहन से कुछ कहने लगा जो मेरी समझ कुछ आया, और कुछ नहीं आया मैं अभी सोच ही रहा था कि उसकी बड़ी बहन बोली मुझे नेट से कुछ निकालना है। मैं समझ गया गर्मी कि छुट्टियाँ चल रही बच्चे अपना होम वर्क निकलवाने मेरे पास आते रहते हैं।

आजकल स्कूलों में पता नहीं क्या रिवाज चल गया है। जो बच्चों को ऐसा होम वर्क देते हैं कि जिसे पूरा करने के लिए बच्चों को अपने माँ बाप के साथ इंटरनेट कैफे के चक्कर लगाने पड़ते हैं। लेकिन एक बात अच्छी भी है इस बहाने हम जैसे लोगों की दुकान चल पड़ती है। मैंने लड़की की और गौर से देखा वह करीब 10-11 साल की होगी, वह पहले भी मेरी दुकान में होम वर्क निकलवाने आ चुकी है। वह मुझे बताने लगी इसकी फोटो निकाल दो में नेट से सर्च करके निकलने लगा। लेकिन मेरे लिखने में मुझे कुछ टाइम लग रहा था। ये बात उस लड़की को पसन्द नहीं आ रही थी। वह मुझसे बोली अंकल में लिखूं, मैंने कीबोर्ड उसके हाथ मैं दे दिया और में उठकर में दूसरी कुर्सी पर बैठ गया।

वह जल्दी – जल्दी लिखने लगी, मगर वह इमेज सेव नहीं कर पा रही थी। यह देखकर कर उस लड़की का बाप बोला बेटा अंकल को करने दो तुमसे नहीं हो पा रहा है। मगर वह सुनने को तैयार नहीं थी, बोली मैं कर लूंगी, आप शान्त बैठिये। लड़की का बाप बार – बार कहे जा रहा था। पर लड़की मानने को तैयार नहीं थी। वह अपने बाप से कह रही थी। आप घर चले जाओ मुझे काम करने दो लड़की का व्यवहार देख कर मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ। वह अपने बाप को लगभग धमकाते हुए बोली में घर जा कर ममी से आपकी शिकायत करूंगी। यह सुनकर उसका बाप चुप हो गया, मैंने उसकी और देखा तो वह आंखें झुका कर चुप चाप बैठा हुआ था। में लड़की के साथ प्रिंट निकलवाने में लग गया। लड़की प्रिंट के टोपिक बार – बार बदल रही थी। जिससे काफी समय लग रहा था। लड़की का भाई भी बोर होने लगा और घर चलने की जिद करने लगा। मगर लड़की अभी कभी ये कभी वो चाहिए इसी में लगी थी। लड़की का बाप फिर बोला जल्दी कर ले अंकल को भी घर जाना है। लड़की फिर गुस्से से बोली आप हल्ला मत करो अंकल को पैसा भी तो कमाना है।

सच कहूं तो मैं भी बोर हो गया था, और किसी तरह उससे पीछा छुड़ाना चाहता था। शायद लड़की को मेरे चेहरे से यह पता लग गया, वह अपने भाई से बोली बस हो गया है अब चलते हैं बाकी फिर किसी दिन निकालूंगी, मैं अब बचे हुए प्रिंट निकाल रहा था। तभी लड़की आपने बाप से थैंक्स बोली। फिर बोली मैं आप को क्यों थैंक्स बोलूं, आप तो मम्मा के कहने पर आये हैं। लड़की बाप बिलकुल शान्त रहा जैसे कि उसके होंठ आपस में चिपक गये हो, मैं उसकी ओर बहुत देर तक देखता रहा कि अब कुछ बोलेगा मगर वह कुछ न बोला। मैंने सब प्रिंट निकाल दिए और उसको दे दिये। उसने मुझसे पूछा कितने पैसे हुए मैंने 200 रूपये बताये, उसने पैसे दिये और वह चला गया। मैं उस लड़की के अपने पिता के प्रति व्यवहार को देख कर सोचने लगा इसमें दोष किसका है। माता- पिता का या उस विद्यालय या उस शिक्षा का जो सब कुछ तो सिखाती है पर यह नहीं सिखाती कि माँ – बाप के साथ किस तरह का व्यवहार करना चाहिए। क्या यही हमारे आधुनिक समाज का आईना है।

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