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शुभागमन सावन उत्सव" का, जो आरंभ चैरिटेबल फाउंडेशन , भोपाल द्वारा जनजातीय आवास परिसर ,चौपाल में शनिवार 27 जुलाई को "इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ", भोपाल के तत्वाधान में आयोजित

सुन थम - थम ,रुक -रूक , झम-झम
बारिशों के ये आरोह - अवरोह।
प्रकृति भी लगी गुनगुनाने
नये सुर , नये नगमे ,नयी तानें
संदली संदली हुआ समां
वादियां सुरमई सी सज़ी।

ऐसा ही कुछ खूबसूरत समां बांधा सावनी फुहारों के स्वागत में,   आरंभ चैरिटेबल फाउंडेशन के रचनाकारों ने ।
अवसर था " शुभागमन सावन उत्सव" का,  जो   आरंभ चैरिटेबल फाउंडेशन , भोपाल द्वारा जनजातीय आवास परिसर ,चौपाल में शनिवार 27 जुलाई को "इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय ", भोपाल के तत्वाधान में आयोजित किया गया।
जिसमें प्रमुख साहित्यकारों ने अपनी रचनाएं  सावन के शुभागमन और स्वागत में सुनाकर मानसूनी विहंगम परिदृश्य को और अधिक मनभावन , रसपूर्ण, तरंगित और काव्यमय कर दिया।

सभी ने अपनी भावपूर्ण अभिव्यक्ति से प्रकृति के सुंदर मनभावन शब्द चित्र उकेरे । बादलों से संवाद किया और बूंदों की गुनगुनाहटों की बात की । काली घटाओं का स्वागत किया कुछ इस तरह :- 

" प्रकृति का नवयौवन
लेकर आया सावन।
रिमझिम रिमझिम
फुहारों से
खिल उठे वन उपवन। @मनोज देशमुख

" कच्ची माटी पर
आकाश  ने बादलों से
प्रेम बरसाया था
पर अब,,,,,
समय के साथ
कच्ची मिट्टी से
पक्के घर बनने की प्रक्रिया में
खो गया प्रेम का सोंधा पन
@सुधा दुबे।

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मदमाते सावन में कायनात
जैसे नृत्य शाला बन गई।
हवाओं ने बूंदों की पायल पहन ली।
छम छम छमाछम ,मंत्रमुग्ध सा सारा आलम।
@अनुपमा अनुश्री

आया है सावन चहक रहे पशु- पक्षी
हरियाली ने हमें चहुँ ओर से घेरा है।
@अमित मालवीय हर्ष।

नाचे मोर पपीहा बोले
कोयल ने कजरी है गाई
देख सखी पावस ऋतु आई ।@बिंदु त्रिपाठी

पात पात निखर रहो
फूल फूल बिखर गयो,
बरखा ने ऐसो रस रंग है जमायो री।@मधूलिका सक्सेना

मेरे व्याकुल मन ने सुनी .....
पावस की आहट
धरा पर सुगबुगाहट
पत्तियों की सरसराहट
हम सब की मुस्कुराहट ।@ शेफालिका श्रीवास्तव

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बाँटता अनुपम सौगात
प्रफुल्लित करता तन मन
  ये बारिश का मौसम । @ श्यामा गुप्ता

लहराए  फसल  खिल उठे  कली कली ।
बस शुभाषीश की वर्षा  कर दो।
प्रेम  से बरसों  घटाओं,
सावन के मधुमास  में ।@ शोभा ठाकुर

"बूँदों का शोर कानो में रस घोल रहा है,
सुन सुन के होले  होले से दिल डोल रहा है।
बरसात की ऋतु में ।

@डॉ ओरीना अदा

प्राची चतुर्वेदी, मृदुल त्यागी  सहित अन्य साहित्यकार उपस्थित रहे। संग्रहालय के उपनिदेशक श्री दिलीप सिंह ,राजभाषा अधिकारी सुधीर श्रीवास्तव जी की विशेष उपस्थिति रही।

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