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खेमकरण ‘सोमन’ की ग्यारह बाल कविताएँ

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खेमकरण ‘सोमन’ की ग्यारह बाल कविताएँ      

1    क्रिसमस डे के अवसर पर

क्रिसमस डे के अवसर पर
बच्चों को उपहार मिला,
कोई न छूटा सबको ही
शान्ताक्लाज का प्यार मिला।

कार से वह देहात में आए
उपहारों को लेकर के,
हँसकर बोले-हैप्पी क्रिसमस डे
एक-एक को देकर के।

फिर कहते हैं बच्चों से
सन्देश तुम्हारा बार-बार मिला।
क्रिसमस डे के अवसर पर
बच्चों को उपहार मिला।

बच्चे बोले शान्ताक्लाज जी
अगले वर्ष भी आना तुम,
जरूर आना उपहार लेकर
हमको न भूल जाना तुम।

बुजुर्ग देखे टुक-टुक-टुक
यह कैसा त्योहार मिला,
क्रिसमस डे के अवसर पर
बच्चों को उपहार मिला।


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2    आया मजा असली
बंदर को दिल्ली था जाना
पर छूटी जब ट्रेन,
इसी कारण जल्दी बाजी में
पकड़ी एयरोप्लेन।

लेकिन एयरोप्लेन उड़ी तो
फूल गए हाथ और टाँग,
दरवाजे को खोलकर उसने
मार दी झट झलाँग।

जहाँ से चला वहीं गिरा फिर
टूटी हड्डी-पसली,
बच्चे बोले-क्यों बंदर
आया मजा असली !

3    यानी कुल मिलाकर
     राम पिए पानी
श्याम पिए पानी,
रहीम पिए पानी
करीम पिए पानी।

पेड़ पिए पानी
शेर पिए पानी,
घोड़ा, गीदड़, हाथी
भेड़ पिए पानी।

यानी कुल मिलाकर
बनी ये कहानी,
जो जग में रहेगा
वो पिएगा पानी।

तो इसी बात पर आओ
हम बचाएँ पानी,
ज्यादा नहीं कम से
कम बहाएँ पानी।

4    कहाँ गए वे पंछी सारे
कहाँ गए वे पंछी सारे जो
नील गगन में उड़ते थे,
चहाचहाकर फुर्र से उड़कर
झुण्डों में कभी मुड़ते थे।

शोभा बनकर नील गगन की
इन्द्रधनुष दिखलाए जो,
रंग-बिरंगे अजब-गजब के
पंछी शोर मचाए जो।

प्रकृति के सजीव खिलौने
पेड़ों पर जब-जब दिखते थे,
रमुआ काका इनको देखकर
कविताएँ खूब लिखते थे।

इनमें कुछ-कुछ आसपास के
कुछ पंछी बहुत दूर के थे,
चहाचहाकर फुर्र से उड़कर
झुण्डों में कभी मुड़ते थे।

कुछ बच्चे अब पूछ रहे हैं
जैसे गीता सीता हंसी,
कहाँ गए वे पंछी सारे
कहाँ गए वे पंछी ?

5    कुसंग
या तो वह अभी गिरा
या गिरा फिर कल,
पर गिरेगा ये मानो
संभले तब ही हल।

बुरे मित्र के साथ
बढ़ता है कुसंग,
स्वच्छ मित्र ही देता है
सुन्दर हरदम ढंग।

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6    न समझा इनसान ने
कोई धर्म नहीं कहता है
मेरे लिए लड़ाई लड़ो,
न मुझको तुम श्रेष्ठ करो
न तुम सब भाई-भाई लड़ो।

सबका धर्म एक समान
बनाया है भगवान ने,
पर इतनी सी बात कभी
न समझा इनसान ने।

धर्म की श्रेष्ठता के लिए
जीवन भर वे लड़ते हैं,
अपनी नादानी के कारण
अपनी हानि करते हैं।

इसलिए अब हम बच्चों का
नया-नया यह नारा है,
धर्म के नाम पर नहीं लडें़गे
क्योंकि देश हमारा है।

7    चुपके-चुपके आई नींद
पढ़ रहा था चुपके से कि
चुपके-चुपके आई नींद,
इशारे से बिस्तर पर
मुझको पास बुलाई नींद।

मैनें कहा अभी और पढूँ
कि जोर से आँख दिखाई नींद,
जबरदस्ती घसीट-घसाट कर
बन्द की मेरी पढ़ाई नींद।

सपने में फिर दूर देश की
जमकर सैर कराई नींद,
सुबह बोली-फिर आऊँगी
मैं हँसा तो मुस्कुराई नींद।
8    सलाम शहीदों को

पन्द्रह अगस्त के अवसर पर
सलाम शहीदों को,
इस दिन का सूरज-
सुबह शाम शहीदों को।

क्रान्तिकारी मर मिटे सब
चक्रव्यूह को तोड़कर
अंग्र्रेजों की हार हुई और
चले भारत छोड़कर।

देश के लिए मरना पसन्द
काम शहीदों को,
पन्द्रह अगस्त के अवसर पर
सलाम शहीदों को।

क्रान्ति की ज्वाला जब
इन्होंने जलाई,
आजादी की धुन फिर
जन-जन में समाई।

    देता है श्रद्वान्जलि एक-एक
धाम शहीदों को,
पन्द्रह अगस्त के अवसर पर
सलाम शहीदों को।

9    जब तक पापी पेट
मैंने देखा एक छोटा बच्चा
राह भर गाता गाना,
कोई उसको पैसे दे देता
कोई दे देता था खाना।

इसी तरह वह चला रहा था
अपने जीवन की गाड़ी,
मैंने कहा-बस इसी काम की
कब तक है तैयारी?

हँसकर वह धीरे से बोला
अपना सामान समेट,
तब तक गाता रहूँगा साहब
जब तक पापी पेट।

10    घोड़े की बरात

एक घोडे़ की शादी थी
घोड़ा बैठा घोड़े पर,
बरात फिर चल पड़ी
दुल्हनियाँ के डेरे पर।

वहाँ पहुँचकर घोड़े के
पिता ने कहा-डिमांड है अब,
कार, फ्रिज, दस लाख नगद,
होम थिएटर, माँग है अब।

दुल्हनियाँ का पिता घबराया
बोले-इज्जत उछालो न,
घोड़े के पिता ने कहा-
सब कुछ फिर मँगवा लो न।

तभी दुल्हनियाँ घोड़ी बोली-
यह कठिन मामला थोड़े है,
अरे पिताजी इस दुनिया में
बहुत कुँवारें घोड़े हैं!

जो दहेज का लालची हो
उस घर जाना ठीक नहीं,
ऐसे पढ़े घोड़ों के लिए
सीख भी कोई सीख नहीं।

बरात बैरंग लौटी
हुई इसकी मुनादी फिर,
पर उसी समय एक स्मार्ट घोड़े से
की घोड़ी ने शादी फिर।

11    समय और आदमी
आगे-आगे समय भागा
पीछे-पीछे आदमी,
यही आदमी भागता हुआ
पहुँचा मेरठ छावनी।

वहाँ से वह बढ़ चला फिर
राजधानी नई दिल्ली,
पर वहाँ भी जाकर उसकी
उड़ी बहुत ही खिल्ली।

समय के पीछे लगा रहा वह
जी-जान से दिन-रात में,
उसके बाद भी समय उसके
आया न ही हाथ में।

उसने देखा निकल चुका है
समय बहुत ही दूर,
कहने लगा-छोड़ता न समय तो
होता मैं सफल जरूर।


खेमकरण ‘सोमन’


भूरारानी, रूद्रपुर, जिला-ऊधम सिंह नगर, उत्तराखण्ड-263153

khemkaransoman07@gmail.com

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