नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

लघुकथा - सुपीरियर गॉड - ज्ञानदेव मुकेश


एक बहुत बड़े उद्योगपति ने एक प्रसिद्व मंदिर में डेढ़ करोड़ रुपए का दान दिया। चारों दिशाओं में इस महादान की पुरजोर चर्चा होने लगी। अखबारों के मुख्य पृष्ठों पर महादान के समाचार छपते रहे।

इस महान घटना के कुछ ही दिनों बाद मेरे पास एक चैरिटी संस्था का फोन आया। संस्था के एक प्रतिनिधि ने एक गरीब बच्चे का हवाला दिया। उसने बताया कि बच्चा कैंसर से पीड़ित है। हम उसकी मदद के लिए पैसे इकट्ठे कर रहे हैं। यदि आपसे हो सके तो हजार या 500 रुपयों की मदद करें।

मैंने कहा, ‘‘मैं एक मामूली-सा सरकारी कर्मचारी हूं। हमारा महीने का खर्चा बड़ी मुश्किल से चल पाता है। अतः आप मुझे माफ करें। वैसे आपने उस उद्योगपति के बारे में जरूर सुना होगा, जिन्होंने हाल ही में एक प्रसिद्ध मंदिर को डेढ़ करोड़ रुपए का दान दिया है। आप ऐसे लोगों से सम्पर्क क्यों नहीं करते ?’’

उसने कहा, ‘‘अव्वल तो मेरे पास उनका नंबर नहीं है। दूसरे, कहीं से नंबर मिल भी गया तो हमारी बात उनके पीए तक ही पहुंचकर रह जाती है।’’

मैंने कहा, ‘‘मेरे पास उनका सीधा नंबर है। आप कहें तो उन तक आपका कॉल डायवर्ट कर दूं ?’’

उसने कहा, ‘‘ठीक है। आप कॉल डायवर्ट करें। मैं कोशिश करता हूं।’’

मैंने कॉल डायवर्ट कर दिया। उद्योगपति और उस प्रतिनिधि के बीच सम्पर्क स्थापित हो गया। प्रतिनिधि ने अपना निवेदन उद्योगपति के सामने रखा। फोन पर कुछ पलों के लिए सन्नाटा छा गया। फिर चुप्पी तोड़ते हुए उद्योगपति ने बड़े गंभीर अंदाज में प्रतिनिधि से कहा, ‘‘देखिए, हमलोग बहुत बडे़ आदमी हैं। हम छोटे-मोटे दान नहीं देते। इससे हमारी तौहीनी होती है। मैंने उस प्रसिद्ध मंदिर के भगवान को डेढ़ करोड़ का दान देकर उन्हें पूरी तरह से सम्पन्न कर दिया है। अच्छा होता, आप उस मंदिर के भगवान से संपर्क करते। मुझे विश्वास है, जो मिलना होगा, आपको वही से मिल जाएगा। और हां, आगे से आप मुझसे सीधा सम्पर्क न करें तो अच्छा रहेगा। आपको पता होना चाहिए कि हम आप जैसे लोगों से काफी ऊंचा रहते हैं।’’

--

ज्ञानदेव मुकेश

पता-

फ्लैट संख्या-301, साई हॉरमनी अपार्टमेन्ट,

अल्पना मार्केट के पास,

न्यू पाटलिपुत्र कॉलोनी

पटना-800013 (बिहार)

e-mail address - gyandevam@rediffmail.com

0 टिप्पणियाँ

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.