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रुढ़ियों और अंधविश्वासों से स्त्रियों को आजादी चाहिए-कविता विकास (साक्षात्कार) -सुरेश सौरभ

    हिंदी साहित्य में कविता विकास का नाम बहुत ही चर्चित है। इनके दो कविता संग्रह क्रमश: लक्ष्य और कहीं कुछ रिक्त है, तथा तमाम साझा संग्रहों में रचनाएं प्रकाशित हो चुकीं हैं। करीब तीस वर्षों से देश की प्रसिद्ध सैकड़ों पत्र-पत्रिकाओं में कहानियां,कविताएं, लेख और यात्रा वृतांत जैसी विभिन्न विधाओं   से अनवरत सक्रिय रहने वाली धनबाद की रहनवासी,कविता जी से पिछले दिनों साहित्य,कला, संस्कृति आदि विषयों को लेकर लंबी बातचीत हुई ।यहां प्रस्तुत है उस बातचीत के मुख्य अंश ।

*आप साहित्य लेखन में क्यों सक्रिय हैं।

*जन कल्याण के लिए मैंने कलम उठाई है। मेरा उद्देश्य है अपने लेखन से दीन-दु:खी आम जनता का भला करना। इसलिए मैं लेखन में सक्रिय हूं।

*आप ने लेखन किस आयु से प्रारंभ किया ।

* मैं करीब 14 साल की रही होगी तभी से स्कूल की पत्रिकाओं में लिखना शुरू किया और तभी से तमाम सांस्कृतिक गतिविधियों में भी अपनी सहभागिता शुरू की।

*आप के लेखन में मूल विषय क्या रहता है।

*स्त्री हूं इसलिए स्त्रियों की समस्याओं को प्रमुखता मुखर करतीं हूं। इसके अलावा दलितों, शोषितों, वंचितों और सामाजिक रुप पिछड़े लोगों की मूक आवाजों को अपनी लेखिनी से स्वर देती हूं।

*डिजिटल युग बहुत तेजी से बढ़ रहा है ऐसे में किताबों की क्या प्रासंगिकता रहेगी।

*किताबें हमेशा रहीं हैं और हमेशा रहेंगी। प्रमाणिक तथ्यों के लिए, विद्याथिर्यों, शोधार्थियों के लिए किताबों की दुनिया हमेशा आबाद रहेगी।

*आप आकाशवाणी पटना से काफी समय तक जुड़ी रहीं किन विषयों को लेकर आप की सहभागिता आकाशवाणी में रही।

*बच्चों का एक कार्यक्रम मुस्कान था, जो हर इतवार को मैं पेश करती थी ,यह बच्चों में बहुत चर्चित रहा ‌। इसके अलावा बच्चों का काव्य पाठ और उनकी रचनात्मक परिचर्चा भी समय-समय पर आयोजित करती थी।

*क्या आप सामाजिक  विसंगतियों, रुढ़ियों, के लिए सामाजिक संगठनों से भी जुड़ी हैं।

*जी,मैं गरीब बच्चों के विकास के लिए बाल विकास योजना, कामगार महिलाओं का शोषण रोकने के लिए महिला उत्पीडन सुधार संस्था और नेत्रहीन लोगों के संरक्षण और सुधार के लिए भी कई संस्थाओं में सक्रिय हूं।

*आप के पसंदीदा लेखक और कवि कौन हैं।

*प्रेमचंद, प्रसाद, महादेवी वर्मा, निराला, वृंदावन लाल वर्मा, दुष्यंत कुमार, नीरज, मुनव्वर राना, रस्किन बांड तमाम नाम हैं  सबको गिनाना बड़ा मुश्किल है।

*लेखन में सबसे अधिक प्रेरणा किस-किस से मिली।

* मायके और ससुराल दोनों जगहों से मुझे लेखन में बहुत प्रेरणा मिली। मेरी बड़ी बहन सरिता मौर्य फादर कामिल बुल्के की शिष्या रहीं हैं,जब भी कुछ लिखतीं उन्हें जरूर दिखाती थी। आज भी दिखाती हूं। इसके अलावा कई वरिष्ठ और युवा रचनाकार हैं जिनके प्रोत्साहन से मैं कुछ अच्छा लिखा पातीं हूं।

*नये लेखकों के लिए आप का कोई संदेश।

*सोशल मीडिया के युग में अच्छी रचनाओं को खोजना भूसे में सुई खोजने के समान है। फिर भी तमाम लोग अच्छा लिख रहे हैं। नये लेखक खूब पढ़ने की भूख हमेशा बनाये रखें। छपना महत्वपूर्ण नहीं है, अच्छी रचना छपना महत्वपूर्ण है। इसलिए अच्छा लिखने के लिए अध्ययन के गहरे सागर का कुशल गोताखोर बनना पड़ेगा, तभी कोई उन्हें मोती मिलेगा।

*आप झारखंड विमर्श की संपादक हैं, प्रभात खबर साहित्य सोपान की अतिथि संपादक हैं । अंग्रेजी मासिक पत्रिका स्टाइल हट की सहायक संपादक हैं। मंच मचान पर भी सक्रिय हैं। अंग्रेज़ी विषय की आप अध्यापिका और लेखिका हैं। हिंदी लेखन में भी इतना सक्रिय हैं। जिसके लिए आप को राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर के तमाम सम्मान भी मिले हैं। इतना सब साहित्य में कैसे कर पातीं हैं।

*अगर मन में सच्ची लगन समर्पण और प्रतिबद्धता हो तो सब मैनेज हो जाता है।

*आज स्त्री विमर्श की बड़ी-बड़ी बातें हो रहीं हैं ,कोई स्त्री के देह मुक्ति की बात कर रहा है, कोई स्त्रियों की रूढ़ियो,विसंगतियों और मानसिक गुलामियों को तोड़ने की की बात कर रहा है। आप के इस विषय पर क्या विचार हैं।

*स्त्री देह मुक्ति विमर्श का मुद्दा नहीं होना चाहिए। यह तथाकथित आधुनिकता का विकृत स्वरूप है। उन्मुक्त सेक्स की स्वतंत्रता स्त्रियों की आजादी का पर्याय नहीं है। आज़ादी तो अंधविश्वास और रूढ़िवादिता की परत हटाकर ज्ञान के आलोक में स्वयं को तराशने की होनी चाहिए। यह न तो परिवार विघटन की वकालत करता है और न ही अलग-थलग रहने की मानसिकता को बढ़ाता है। मेरे ख़याल में अपने पैरों पर खड़े हो कर एक स्वस्थ और समृद्ध समाज का निर्माण करना स्त्री विमर्श का आधार है जिसमें किसी प्रकार का टार्चर, बाध्यता और शोषण न हो। बाबा साहब आम्बेडकर ने स्त्रियों को महादलित कहा था उनका सामाजिक पिछड़ापन दूर करना ही हम सभी की प्राथमिकता होनी चाहिए।

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लेखक-सुरेश सौरभ

मो-निर्मल नगर लखीमपुर खीरी उत्तर प्रदेश पिन-262701

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