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लघुकथाएँ - डॉ. नन्दलाल भारती

मत काटो पेड़ ।


ये आरा,कुल्हाड़ी और हट्टे-कट्टे लोग किस मिशन की तैयारी में है विषपुरुष ।

घर बनवाने की तैयारी अमृत पुरुष ।

आरा कुल्हाड़ी से घर ?

बाल कि खाल कोई आपसे निकालना सीखे अमृत पुरुष ।

ईट,पत्थर, बालू सीमेंट लगता,आरा कुल्हाड़ी से तो नहीं ।

पेड़ कटवाना है।

क्यो अनर्थ करने जा रहे ?

पेड़ काटना अनर्थ नहीं तो और क्या विषपुरुष तुम्हीं बताओ ।

पेड़ क्यों काटने जा रहे हो ? कोने मे तो है वह भी आम का पेड़ अमृतपुरुष बोले ।

काटना जरूरी है ।

क्यों कमासूत पूत की बलि देने पर उतारू हो ?

कमासूत पूत ?

हां विषपुरुष कमासूत पूत वह भी सौ पुत्र के बराबर एक ।

कैसी बहकी बातें कर रहे हो कही ठर्रा तो नहीं मार लिए।

कैसी बात कर रहे हो ? शराब जीवन लेता है ऐसी गलती हमारे बाप नहीं की तो मैं कैसे ?

फिर एक पेड़ सौ पुत्र कैसे ?

हिसाब लगाओ तुम्हारे जीवन का कितना जहर पीता है एक पेड़।

मतलब विषपुरुष बोले ।

अरे बुरबक इतना भी नहीं जानता पेड़ तुम्हारा छोड़ा जहर पीता है, तुम्हें जीवन देता है आक्सीजन के रुप मे, क्या कोई पुत्र तुम्हारा जहर यानि कार्बनडाइआक्साइड पीकर तुम्हें जीने के लिए    आक्सीजन रहित दे सकता है ?

समझ गया अमृतपुरूष तुम्हारा संदेश ।

क्या......?

मत काटो पेड़ ।

सही समझे विषपुरुष पेड़ बचाओ जीवन बचाओ ।

डां नन्द लाल भारती

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रेनहार्वेस्टिंग


बोरिंग और कितने दिन तक चलेगी ?

जब तक पानी नहीं मिल जाता ।

क्या.....?

ठीक सुने बरखूदार ।

कितने फीट हो गई ?

सात सौ ।

फिर भी पानी नहीं ।

देख रहो अवधेश बाबू  धूल उड़ रही है।

प्रवेशबाबू डेढ़ से दो सौ फीट का पानी पीने लायक होता है बाकी तो बीमारी का घर अवधेशबाबू बोले ।

क्या करे अब ?

पांच साल पहले बताया था ।

क्या......?

रेनवाटर हार्वेस्टिंग ।

इससे क्या होता ?

पानी का स्तर बढ जाता ।

गलती हो गई ।

सुधार लो ।

कैसे  ?

बोरिंग बंद करो ।बोरवेल को रेनवाटर हार्वेस्टिंग मे बदल दो ।

हां  यह बरसात का पानी रोकने के लिए अच्छा रहेगा ।

चलो देर से ही पर दुरूस्त आए ।

हर घर में रेनहार्वेस्टिंग का संदेश पहुंचाओ । पीने के पानी की किल्लत से अपने परिवार को बचाओ।

बरसात का पानी बहने ना पाये प्रवेश बाबू ने अवधेशबाबू के साथ सुर में सुर मिलाएं ।

डां नन्द लाल भारती

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लघुकथा : जबावदारी ।

मास्टर बनवारी जी की अर्धांगिनी  पांच साल का बेटा और सात साल को छोड़कर चल बसी थी। बनवारीजी पर चौतरफा दबाव पड़ा दूसरा ब्याह करने के लिए पर मास्टर जी ने नहीं तो नहीं पर कायम रहे ।बेटा-बेटी को मां कि कमी का एहसास नहीं होने दिये ।बेटा बेटी दोनों का इंजीनियर बना दिया। बेटी का ब्याह एन.आर.आई परिवार में कर दिये ।बेटा को भी अच्छी नौकरी मिल गई ।बड़े शहर से रिश्ते आने लगे, हर लड़की का बाप अधिक से अधिक दहेज का चारा डालने की होड़ लगा दिये । मास्टर जी कहते जो प्रथा जान ले रही हो ऐसी कुप्रथा को प्रोत्साहन क्यों.....?

आखिरकार उसूलपसंद मास्टर जी ने बेटा सौरीचरन

का ब्याह एक शहरी पर संस्कारी परिवार की प्रियंका से कर दिया ।

बहू ने आते ही  संस्कार की नाक काट ली । बेचारे मास्टर साहब ठगे से रह गये ।महीना भी नहीं बीता कि प्रियंका सौरीचरण को लेकर मायके मे किराए के मकान में रहने लगी।बेचारे मास्टर जी लावारिस हो गए

पर हिम्मत नहीं हारे । वे  अपनी देखरेख के लिए दलित युवक को रख लिए ।यह युवक गरीबी के कारण कालेज की पढाई अधूरी  छोड़ चुका था । मास्टरजी ने दलित युवक अंकुर का नाम कालेज मे लिखवा दिया। युवक अपनी जवाबदारी ईमानदारी से निभा रहा था ।अचानक एक दिन सोये-सोये मास्टर जी भगवान को प्यारे हो गये  वसीयत छोड़कर।

मास्टर जी की राख बिखर जाने के बाद बहू- बेटे आए और आते ही मास्टरजी की छोड़ी सम्पत्ति के लिए मुकदमा ठोक दिए । जज साहब फटकार कर भगा दिये। मास्टर जी की छोड़ी सम्पत्ति से अंकुर ने स्कूल बनाकर सरकार को भेंट कर दिया। लोग कहते नहीं थकते वफादार और जवाबदार हो तो अंकुर जैसे ।

नन्द लाल भारती

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