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बालीवुड में पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहे शिव सिंह -सुरेश सौरभ (साक्षात्कार)

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     शिव सिंह सागर फतेहपुर  उ०प्र० के युवा कवि और लघु फिल्मों के कुशल निर्देशक हैं। उन्होंने सामाजिक विसंगतियों , तमाम रूढ़ियों और अंधविश्वासों पर कई लघु फिल्मों का निर्देशन किया है ।अपनी नई भाव भूमि से, शिव सिंह सागर बॉलीवुड में पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं ।वह अपनी नई सोच ,और नये प्रयोगों से बॉलीवुड में कुछ नया करने की दिल में तमाम हसरतें और हौसला रखते हैं। पिछले दिनों शिव सागर से कला फिल्म ,संस्कृति के विषय को लेकर लंबी बातचीत हुई ,प्रस्तुत हैं  बातचीत के मुख्य अंश-

*अभी तक आपने कितनी लघु फिल्मों का निर्देशन किया है।

*आधा दर्जन लघु फिल्मों का    निर्देशन मैंने किया है, जिसमें , क्रमशः सीख, मजाक,गुल्लक इंसानियत का पैगाम, छंगू भाई और कबाड़ी शामिल है, इसके अलावा दो लघु फिल्मों में अभिनय भी मैंने किया है। एक एल्बम ओ मेरे महबूब सनम के लिए गीत भी लिखे हैं।

*आप की शार्ट फिल्मों में मुख्य विषय क्या रहते हैं।

*मैं मुख्यतः समाज के ज्वलंत मुद्दों पर ही लघु फिल्में बनाता हूँ। जैसे,अंधविश्वास, बेटियों की शिक्षा,सड़क सुरक्षा, नोटबंदी के बाद छुट्टे पैसे के लिए,अपने हक़ के लिए संघर्ष करते लोग। मैंने कबाड़ी लघु फिल्म के माध्यम से पुरखों की पुरानी चीजों को कबाड़ समझने वाले लोगों को सार्थक संदेश देने की कोशिश की है  ।

*अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में बताएं।

* मेरा जन्म सन् 1994 में श्री शिव नारायण लोधी और श्रीमती देवी के घर पहली संतान के रूप में हुआ था। मेरी एक छोटी बहन है, मैं विवाहित हूँ। मेरी पत्नी का नाम प्रियंका है, मेरे पिता जी एक साधारण किसान हैं। बहुत कम खेती में संघर्ष पूर्ण जीवन जीते हुए उन्होंने हुए मुझे पढ़ाया लिखाया है। ताकि मैं समाज का कुछ भला कर सकूं। यही भलाई की सोच मेरे मां-बाप की है।

*अपनी शैक्षिक योग्यता के बारे में कुछ बताएं।

* मैंने हिन्दी साहित्य और राजनीति शास्त्र में स्नातक किया है। इसके अतिरिक्त कम्प्यूटर शिक्षा में भी दक्ष हूँ। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण आगे नहीं पढ़ सका। अब शॉर्ट फिल्मों में अपना मुस्तकबिल तलाश रहा हूं। उम्मीद है जनता जनार्दन मेरे काम को एक दिन सराहेगी, और मुझे बॉलीवुड के रुपहले पर्दे तक पहुंचाएगी।

*लघु फिल्मों को लेकर कुछ अनुभव अपने साझा करें। 

*एक किस्सा याद आ रहा है ।हम लोग एक मज़ाक का सीन शूट कर रहे थे। एक महिला कलाकार ने इतने टेक लिए कि हम सब परेशान हो गए वो महिला नर्वस हो गई। थोड़ी देर बाद उसने अपने आप को संभाल लिया और फिर बहुत अच्छा परफारमेंस किया। अक्सर कई मंझे कलाकारों से ये सीखने को मिलता है कि थोड़ी सी असफलता पर बहुत जल्दी निराश नहीं होना चाहिए, सफलता अवश्य मिलेगी बस थोड़ा वक़्त लग सकता है। बस कर्म करते हुए अपना धैर्य बनाए रखें।

*लघु फिल्मों के लिए क्या-क्या समस्याएं आती हैं।

* सर्वप्रथम मैं बता दूँ, जहाँ पर हम लोग सिनेमा का काम कर रहे हैं। वहां कला संस्कृति प्रेमी बहुत कम लोग हैं। किसी भी फिल्म की लोकेशन प्रमोशन और निर्माता को लेकर बहुत दिक्कतें आतीं हैं। लेकिन ठीक से समझाने पर बात बन जाती है। वो कहते हैं, जहां चाह हो तो राह अपने आप बनती चली जाती है।

*फिल्मी दुनिया में नया क्या करने का इरादा है। 

*मैं प्रयोगवादी निर्देशक हूं। इसलिए कुछ खास और नया करने की इच्छा रखता हूं। उम्मीद है लोगों के स्नेह से मैं यह कर पाऊंगा। मैं आपको बता दूं कि एक निर्देशक के साथ ही लेखक, गीतकार, और अभिनेता भी मैं हूँ। मुझे जहां जिस काम के लिए मौका मिलेगा मैं कुछ बेहतर करने की पूरी कोशिश करूंगा।

*आने वाले समय में लघु फिल्मों का क्या भविष्य है। 

*लघु फिल्मों का भविष्य उज्ज्वल है । इनके भविष्य को लेकर राज्य स्तर, राष्ट्रीय स्तर, व अन्तर्राष्ट्रीय स्तर तक फिल्म फेस्टिवल हो रहें हैं। इन फिल्मों के यूट्यूब के चैनलों पर अधिक चलने पर निर्माता-निर्देशक अच्छी कमाई भी कर रहे हैं। मुझे लगता है आने वाले समय में लघु फिल्मों का भविष्य और बेहतर होगा।

*अपनी कुछ पसंदीदा फिल्मों के नाम बताइए।

*मैं सिनेमा में कुछ साधारण से दिखने वाले चेहरों-मोहरों की ,आर्ट फिल्में अधिक पंसद करता हूँ। जैसे देश माऊटेन मैन में नवाजउद्दीन, गैंग आफ वासेपुर में मनोज बाजपेयी,

वेडनस डे में नसीरुद्दीन, न्यूटन में राजकुमार राव आदि मेरे पसंदीदा कलाकार हैं।

*क्या साहित्यिक कृतियों पर लघु फिल्मों का निर्माण करेंगे।

* मेरी पिछली दोनों लघु फिल्में छंगू भाई और कबाड़ी प्रसिद्ध लघुकथाओं पर आधारित हैं। यदि मौका मिला तो आगे भी ऐसी साहित्यिक कृतियों पर फिल्मों का निर्माण अवश्य करूँगा। मुझे लगता है, प्रसिद्ध साहित्यिक कहानियों पर फिल्म का निर्माण होने पर,फिल्म के प्रचार में काफ़ी मदद मिलती है क्योंकि यदि कृति मशहूर हुई है ,तो फिल्म भी मशहूर हो जाती है।

*साहित्य में आपकी पसंदीदा लेखक कौन है।

*मुंशी प्रेमचंद, फणीश्वरनाथ रेणु, महादेवी वर्मा,देवकीनंदन खत्री,  प्रसाद ,निराला,विजयदान देथा, संजीव जायसवाल संजय, सुकेश साहनी, आदि की कहानियां पढ़ना बहुत पसंद है। दुष्यंत कुमार,अदम गोंडवी, राहत इंदौरी, बशीर बद्र, मुनव्वर राणा और परवीन शाकिर आदि की शायरी पढ़ना मुझे बहुत भाता है।

*क्या बॉलीवुड में जाना चाहते चाहते हैं। क्या बॉलीवुड के लोगों से संपर्क बने है ।

*यकीनन बालीवुड में जाना चाहता हूँ,और अपनी प्रतिभा को परखना चाहता हूँ। इसके लिए लगातार प्रयासरत हूँ। अभी बालीवुड के कुछ कलाकार लेखक संपर्क में है। अवसर मिलने पर अपनी प्रतिभा का उपयोग करूंगा।

*अपने दोस्तों और सहयोगियों के बारे में बताएं।

* किसी भी नये काम को पहले आलोचना और बाद में समर्थन मिलता है, ऐसा मेरे साथ भी हुआ। जिन्होंने मेरे काम को सराहा इसमें वसीक़ सनम, राहुल सिंह, श्री कांत साहू, अनुज,  शिवम, फरीद,  डॉ शैलेश गुप्त वीर, शिवशरण बंधु, हाथगामी, डॉ ज्ञानेन्द्र गौरव ऐसे नाम हैं जो मुझे कभी हारने नहीं देते।

-सुरेश सौरभ

निर्मल नगर लखीमपुर खीरी

1 टिप्पणियाँ

  1. रोचक साक्षात्कार। अगर साक्षात्कार के साथ शार्ट फिल्म के लिंक(अगर वो यू ट्यूब में मौजूद हों) होते तो बेहतर होते। बहरहाल, शिव सिंह सागर जी को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनायें।

    उम्मीद है जल्द ही उन्हें बड़े परदे पर अपना कौशल दिखाने का मौक़ा मिलेगा।

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