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देख, भाई देख। लेखक दिनेश चन्द्र पुरोहित

सुबह-सुबह गली में इतना शोर-गुल मचा कि, बेचारे दीप को लिहाफ़ हटाकर बिस्तर छोड़ना बाहर आना पड़ा। गली में, मकानों की खिड़कियाँ और दरवाज़े खुले नज़र आ रहे थे। गली के लोग अपने मकान के बाहर खड़े होकर, सेनेटरी लाइन साफ़ करने वाले सफ़ाई कर्मचारी से बहस करते जा रहे थे। बात यह थी कि, मकानों के शौचालयों से निकली सेनेटरी लाइनों में प्लास्टिक की थैलियाँ फंस जाने से सेनेटरी लाइन अवरुद्ध हो गयी। यही कारण था, सेनेटरी पॉट में खड़ा सफ़ाई कर्मी, लम्बे बांस से मैले और पोलिथीन से डटी हुई लाइनों को साफ़ करता जा रहा था। वह बेचारा, उस मैले में खड़ा क्या था ? उसका तो पूरा बदन, पसीने से तर-बतर था। उस बेचारे को क्या पत्ता, उसके कपड़ों में ठौड़-ठौड़ मैला और गन्दगी लग चुकी थी। बेचारे सफ़ाई कर्मी ने गली वालों के सामने एक छोटी सी मांग क्या रख दी, सभी गली वाले भड़क उठे। उसकी छोटी सी मांग यह थी ‘हर घर से पच्चास रुपये मिल जाए, तो उनकी टीम चाय-नास्ता ले लेगी।’ यहाँ बात पैसे देने की थी, इस कारण गली वाले भड़क गए। यों तो ये लोग खड़े-खड़े १०० रुपये का पान खाकर थूक दिया करते, मगर इस सेवा करने वाले सफ़ाई कर्मचारी को मात्र पच्चास रुपये देना इन लोगों को मंजूर नहीं..? वे सभी वहां खड़े-खड़े, उससे बहस करते जा रहे थे। कोई कुछ कहता, तो कोई कुछ और। मगर, जेब ढ़ीली करने वाला कोई नज़र नहीं आया ?

तभी दीप को सामने के मकान में रहने वाले अमर चंद नज़र आये, वे बार-बार गुस्से से चीख़कर उस बेचारे की आवाज़ को दबाते जा रहे थे। अब सारा माज़रा दीप को समझ में आ गया, यहाँ सभी खड़े गली वाले जेब से एक पैसा ख़र्च करने वाले नहीं। फिर क्या ? दीप अब चुप बैठने वाला नहीं। उसने अमर चंद को समझाते हुए कहा “भाई अमर चंद, काहे झगड़ा बढ़ाते जा रहे हैं आप ? चलिए, मैं अकेला इस सफ़ाई-कार्य को पूरा करवाने के लिए पांच हज़ार आपको दे सकता हूँ। मगर शर्त यह है, आप सबको अपने हाथ से, इस सफ़ाई कार्य को पूरा करना होगा। कहिये, आप सभी गली वाले इस काम को करने के लिए तैयार हैं ?” सुनकर, सभी चुप हो गए, और एक-दूसरे का मुंह देखने लगे।

तब दीप की आवाज़ गली में गूंज़ उठी आप सभी कचरा डालकर, गन्दी फैलाते हैं। मगर आप में ऐसा कोई बन्दा नहीं, जो जाकर कचरादान में कचरा डालकर आता हो। जानते हैं, आप ? सौ हाथ कचरा डालते हैं, कचरा उठाने के लिए सफ़ाई कार्मिक के केवल दो हाथ आगे आते हैं। फिर ये लोग मैला उठाने का अस्वच्छ कार्य इसलिए करते हैं, ताकि आप स्वस्थ बने रहें। बोलो, क्या आप यह कार्य कर सकते हैं ? नहीं कर सकते, तो कीजिये इन लोगों की मेहनत का सही भुगतान।

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