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लघुकथा - झूठी सफाई - ज्ञानदेव मुकेश

     

  मैं एक रिश्तेदार के पिता के श्राद्धकर्म में सम्मिलित होने के लिए भोपाल गया। मैं ट्रेन से सुबह पांच बजे पहुंच गया था। वह जगह बड़ी खुली और साफ-सुथरी लगी। मेरे रिश्तेदार के घर के कमरे, बरामदा और आंगन भी स्वच्छता की मिसाल लगे। घर के लोगों के साथ दिवंगत पिता के संबंध में थोड़ी बातचीत हुई और उनसे जुड़ी स्मृतियों को ताजा किया गया। चाय का भी एक दौर चला।
  अभी सुबह की लालिमा फूट रही थी। मैं घर के पिछवाड़े में टहलने चला आया। हरियाली की चादर में लिपटी वह जगह बड़ी साफ और मनोरम थी। मैं बाग-बाग हो उठा। मैं मगन होकर काफी देर टहलता रहा।


  नौ बजते-बजते नाश्ते का कार्यक्रम हुआ। नाश्ते में केवल डिस्पोजेबुल बर्तनों का प्रयोग हो रहा था। इस कार्य में कई लोग लगे थे। नाश्ता पूरा होते ही बड़ी तत्परता से साफ-सफाई कर दी गई। यह बड़ा अच्छा लगा।  

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  दूसरी तरफ श्राद्ध का कार्य होता रहा। दोपहर हुई तो खाने के टेबुल फिर सज गए। सैकड़ों लोगों ने भोजन किया। मैंने देखा, सफाई का काम फिर तत्परता से हुआ। भोजन पूरा होने के बाद गंदगी का कोई नामो-निशान नहीं बचा।


  रात के भोजन पर तो पांच सौ से ज्यादा लोग आए। देर रात तक भोज चलता रहा। सफाई के प्रति निष्ठा रात में भी दिखी। 11 बजते-बजते सारा कार्यक्रम सम्पन्न हो गया। उस समय घर, आगन और बरामदे की सफाई देख मैं हैरान रह गया। ऐसा लगा, जैसे इतने बड़े भोज का कोई कार्यक्रम ही न हुआ हो। यह देख मैं बड़ा प्रसन्नचित्त हुआ। रात में खूब गहरी और मीठी नींद आई।
सुबह होते ही मैं पिछवाड़े में टहलने निकल पड़ा। मगर यह क्या ? वहां का दृश्य देखकर मेरा कलेजा धक् सा हो गया। पूरे पिछवाड़े में डिस्पोजेबुल जूठे बर्तनों का अंबार लग गया था। जूठे पत्तलों के बचे हुए खाने इधर-उधर बिखर गए थे। उनपर कुत्तों का हुजूम टूट पड़ा था। यह हृदय विदारक दृश्य था। प्रकृति की हरियाली, मनोरमता पूरी तरह नष्ट-भ्रष्ट हो चुकी थी।
  मैं भारी मन लेकर घर में वापस लौट आया। घर में फिर से साफ-सफाई हो रही थी। घर एक पल के लिए जरूर साफ लगा। मगर मुझे यह सफाई बेहद बेमानी लगी। मेरे रिश्तेदार को निस्संदेह सफाई का शौक था। लेकिन मुझे उनके सफाई के संकल्प में बेईमानी की बू महसूस हुई। अब मुझे घर कहीं से भी साफ नजर नहीं आ रहा था।

                                             -ज्ञानदेव मुकेश                                               
                                   पता-
                                               फ्लैट संख्या-301, साई हॉरमनी अपार्टमेन्ट,
                                               अल्पना मार्केट के पास,
                                               न्यू पाटलिपुत्र कॉलोनी, 
                                                पटना-800013 (बिहार)
                                       e-mail address -   gyandevam@rediffmail.com                                              

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