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मस्त गधे ने थूका - खेमकरण 'सोमन' की नौ बाल कविताएँ


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1.
मस्त गधे ने थूका
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चलते-चलते मस्त गधे ने
बीच सड़क पर थूका,
यह देखकर इंस्पेक्टर हाथी
अपनी गाड़ी से रुका।

गुस्से में एक डंडा उसने
मस्त गधे का मारा,
फिर तीन महीने तक वह
बिस्तर पर रहा बेचारा

उसके बाद मस्त गधे ने
हर एक कदम फूँका,
बीच सड़क या इधर-उधर
फिर न कभी थूका।

2.
मीठी दवाई
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धीरू बंदर धीरे से बोला-
यह क्या आफत आई,
डॉक्टर साब मैं नहीं खाऊँगा
अब कड़वी दवाई।

मीठी दवाई देकर आप
तबियत कर दो चंगी,
ताकि मैं नहा सकूँ और
सिर में मारूँ कंघी।

डॉक्टर भोला भालू बोला-
स्टेथोस्कोप लटकाके,
आज अभी तू ठीक हुआ बस
देख यह पुड़िया खाके।

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3.
खेल-कूद
--
खेल-कूद के साथ जरूरी
पढ़ाई की बात हो।

जैसे राहुल, पिंकी, विशू
फर्स्ट हमेशा आते हैं,
खेल-कूद और वाद-विवाद में
ढेरों ईनाम पाते हैं।

सब लोग इनके गुण गाते
इससे बढ़कर क्या सौगात हो,
खेल-कूद के साथ जरूरी
पढ़ाई की बात हो।

विद्यालय का काम समय से
नियम बनाकर कर लो,
फिर किसने रोका है तुमको
खेलो-कूदो जीभर लो।

अपनी सफलता में अपनी
मेहनत, अपना हाथ हो,
खेल-कूद के साथ जरूरी
पढ़ाई की बात हो।

4.
रहम करो जी भाया
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घूम-घूम और नाच-नाचकर
मच्छर ने काट सुजाया,
मैंने कहा- रहम करो जी
रहम करो जी भाया।

गरमी थी और जम-जमाकर
मैं उसमें ही सोया था,
एक परी रानी के सुंदर
सपनों में ही खोया था।

इसी समय इस दुष्ट ने आकर
मुझपर कहर ढाया,
मैंने कहा- रहम करो जी
रहम करो जी भाया।

अपने नुकीले डंक से इसने
मुझको बहुत काटा,
मैं पकड़ता तो उड़ जाता
बोल-बोलकर टा-टा।

मैं नरम था, ये गरम था
बार-बार डंक चुभाया,
मैंने कहा- रहम करो जी
रहम करो जी भाया।

फिर लाया मच्छरदानी तो
हल हुई मेरी कहानी,
मच्छर रोया बहुत खूब और
मुँह की पड़ी खानी।

पहली बार मैं सही से सोया,
सही से हँस पाया,
मैंने कहा- रहम करो जी
रहम करो जी भाया।

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5.
बिजली
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आती बिजली जाती बिजली
रात को घर चमकाती बिजली।

अंधकार को आँख दिखाती,
झटपट उसे भगाती बिजली।

फिर आई तो खैर नहीं अब,
बार-बार धमकाती बिजली।

खतरनाक हूँ, छुओ मत मुझको
एक-एक को समझाती बिजली।

दिन में सूरज चमकाता है
रात में घर चमकाती बिजली।

6.
जन्मदिन
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एक दिन आमंत्रण पत्र मिला-
सोमन जी आपने आना है,
मुझ बच्चे को गिफ्ट देना है
रात का खाना खाना है।

सही समय पर पहुँचने की
पूरी कोशिश करना आप,
नहीं आए तो अपनी हालत
सोच लीजिए वरना आप।

मैंने सोचा- नहीं गया तो
बच्चे का विलाप होगा,
देखा जाए तो अपने आप में
यह भयानक पाप होगा।

इसलिए मैंने हिसाब लगाया
लगाया है यह हिसाब,
बच्चे को खिलौने दूँगा
दूँगा एक किताब।

उचित समय पर चला परंतु
हो गया फिर भी लेट,
मैंने कहा-  मैं आ गया हूँ
लो यह छोटी भेंट।

7.
सड़कें
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इधर सड़कें, उधर सड़कें,
पूछो-पूछो किधर सड़के।

सुंदर-सुंदर, अच्छी सड़कें,
पक्की-पक्की, कच्ची सड़कें।

कानपुर जाती, दिल्ली जाती,
सड़क पर कुत्ता, बिल्ली जाती।

जहाँ देखो, सड़कें-सड़कें,
चले जवान, बुड्ढे लड़के।

एक सड़क से, जुड़ती सड़कें,
हर दिशा में, मुड़ती सड़कें।

8.
करना फिर नाच
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एक एक एक
घर पर मेरे आना तू
खिलाऊँगा केक।

दो दो दो
सुन प्यारे बात-बात में
कभी भी न रो।

तीन तीन तीन
खुश रहकर हमेशा
बिता दे पूरा दिन।

चार चार चार
सबसे मेल-जोलकर
सबसे कर तू प्यार।

पाँच पाँच पाँच
कल मेरी शादी है
करना फिर नाच।

छह छह छह
हरदम हर काम में
आगे आगे रह।

सात सात सात
जो भी मिले सबसे कर
मीठी-मीठी बात।

आठ आठ आठ
एक मोटे ने बैठकर
तोड़ दी मेरी खाट।

नौ नौ नौ
अरे भाई सुबह हो गई
प्लीज अब न सो।

दस दस दस
अब कविता खत्म हुई
इसी बात पर हँस।

9.
बंदर मामा
--
बन्दर मामा मनचला
पीने के बाद व्हिस्की,
कहता-मुझसे टक्कर ले
हिम्मत है ये किसकी।

अंट-शंट बोल-बोलकर
बजाने लगता ताली,
हाथी दादा ने देखा तो
दे दी उसको गाली।

गुस्से में हाथी दादा ने
मुँह से थूका पान,
बन्दर को फेंका तो बन्दर
पहुँच गया जापान।

-
खेमकरण 'सोमन'
द्वारा श्री बुलकी साहनी,
प्रथम कुंज, अम्बिका विहार, ग्राम व पोस्ट-भूरारानी, रुद्रपुर, जिला- उधम सिंह नगर, उत्तराखंड-263153

ईमेल : khemkaransoman07@gmail.com

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