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तर्ज विशेष पर रचित गीत-संग्रह (रतन लाल जाट)

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आरती गीत- “सकल जग के तारणहारे”                                        रतन लाल जाट                      सकल जग के तारणहारे,                 ...

आरती गीत- “सकल जग के तारणहारे”
                                       रतन लाल जाट
                    
सकल जग के तारणहारे,
                             ओ भक्तजनों के रखवारे।
हार को जीत में, जीत को हार में,
                             आप बदलने वारे॥
                             सकल जग के तारणहारे।
सकल जग के तारणहारे………………………
आपके एक ईशारे से, पत्ता तक नहीं हिलता।
                             स्वामी पत्ता तक नहीं हिलता॥
फिर कैसे रहें जिन्दा?-२
                             बिन मालिक बन्दा॥
                             सकल जग के तारणहारे।
सकल जग के तारणहारे………………………
जिसका नहीं कोई सहारा, उस पर छाया आपकी।
                             प्रभु उस पर छाया आपकी॥
सत्य नाम तुम्हारा, कण-कण तुम्हारा,
                             अम्बर भी धरती भी।
                             सकल जग के तारणहारे।
सकल जग के तारणहारे………………………
(तर्ज- ओम जय जगदीश हरे)


प्रार्थना गीत- “बना कभी ना शूल रामा!”
                                 रतन लाल जाट

मुझको तू फूल बनाना, बना कभी ना शूल रामा!
फूल तो जग को खुशबू देता, शूल हमेशा ही दिल चिरता-२॥
मुझको तू फूल बनाना, बना कभी ना शूल रामा!…………
बादल बना मुझको बरसा, तू प्यासों की प्यास बुझा।
बिजली की चमक यहाँ, डराये लोगों को गरजा-२॥
मुझको तू फूल बनाना, बना कभी ना शूल रामा!…………
सागर-सरिता हो जीवन मेरा, लहराये धरती बन-बगिया।
नाम मिट जाये मरूस्थल का, जल-अन्न से भर दूँ जग सारा-२॥
मुझको तू फूल बनाना, बना कभी ना शूल रामा!…………
एक वीणा एक गीता तू बनाना, बना कभी ना बारूद-बम-गोला।
जीवन सरगम पावन उपदेश मेरा, करे कल्याण जीवमात्र सकल जग का-२॥
मुझको तू फूल बनाना, बना कभी ना शूल रामा!…………
मंदिर-मस्जिद, दीपक-अमृत-सा, निवास बनूँ और मैं करूँ उजाला।
भूल जायें सब जहर संग मधुशाला, कोई भी ना करे कर्म दानव-सा-२॥
मुझको तू फूल बनाना, बना कभी ना शूल रामा!………
(तर्ज- तेरी पनाह में हमें रखना)

भजन गीत-"जिस रस्ते की मंजिल है बुरी "         
                              रतन लाल जाट
                            
जिस रस्ते की मंजिल है बुरी,
उस रस्ते पर कभी चलना ना चाहिये।
चाहे हमको कितना ही धन प्राप्त हो,
उस धन के पीछे कभी ना भागिये॥

जिस रस्ते की मंजिल है बुरी,
उस रस्ते पर कभी चलना ना चाहिये।
चाहे कोई कितना ही प्यारा हो,
उसके प्यार में कभी पागल ना होईये॥

जिस रस्ते की मंजिल है बुरी,
उस रस्ते पर कभी चलना ना चाहिये।
चाहे जिन्दगी में कितने ही सुख हो,
उस सुख के पीछे कभी दुख का डर ना भूलिये॥

जिस रस्ते की मंजिल है बुरी,
उस रस्ते पर कभी चलना ना चाहिये।
चाहे हम कितने ही अमीर हो,
किसी गरीब को कभी ना सताईये॥

जिस रस्ते की मंजिल है बुरी,
उस रस्ते पर कभी चलना ना चाहिये।
चाहे हमको सबकुछ मिल गया हो,
मन में घमण्ड कभी ना आने दीजिये॥

जिस रस्ते की मंजिल है बुरी,
उस रस्ते पर कभी चलना ना चाहिये।
(तर्ज- जिस भजन में राम का नाम नहीं)

भजन गीत-“देखो, जादू गीत गाने का”
                           रतन लाल जाट

जीते वक्त भी गीत, मरते वक्त भी गीत,
देखो, जादू गीत गाने का-२
यहाँ से वहाँ हरकहीं संसार बना-२
यही है गीत गाने का।
जीते वक्त भी गीत……………२॥
जब तेरा-२ जन्म हुआ तो खुशी से आया नाम गीत गाने का-२
और तेरी माँ-२ झूला झूलाती याद करे लोरी गीत गाने का।
जीते वक्त भी गीत……………२॥
खेलने तू लगा-२ बच्चों के संग टोली मजा गीत गाने का-२
और विद्यालय में-२ भाग लिया वो जश्न था गीत गाने का।
जीते वक्त भी गीत……………२॥
जब तेरी शादी-२ हुई बड़ी धूमधाम से किया काम गीत गाने का-२
जब दुःख आया-२ जिन्दगी में कोई तो सोचा था गीत गाने का।
जीते वक्त भी गीत……………२॥
सुख-दुःख-२ और अकेले में साथ गीत गाने का-२
दिन हँसी-खुशी के-२ लब पर आये शब्द गीत गाने का।
जीते वक्त भी गीत……………२॥
चला गया संगी-२ याद आयी कुछ तो शोक गीत गाने का-२
दिल नहीं माने-२ लिख दिया उसने कोई गीत गाने का।
जीते वक्त भी गीत……………२॥
जब अपनी श्वाँसें-२ रूकी तो शेष था गीत गाने का-२
फिर अंत समय में-२ याद किया रब को गीत गाने का।
जीते वक्त भी गीत……………२॥
क्या शायर क्या-२ कवि सब ने बनाया गीत गाने का-२
सब लोगों ने कहा-२ सच्चा सुख है यही गीत गाने का।
जीते वक्त भी गीत……………२॥
यहाँ से वहाँ हरकहीं संसार बना-२
यही है गीत गाने का।
जीते वक्त भी गीत……………२॥
(तर्ज- देख तमाशा लकड़ी का)

गौरवगान-"ये तो गढ़ चित्तौड़ है"
                             रतन लाल जाट

शान से खड़ा मेवाड़ की थाती सबका ही सिरमौर है
राजस्थान गौरव नाम इसका ये तो गढ़ चित्तौड़ है
विजयस्तम्भ जैसे दुर्ग पर पताका कोई फहराता है
जयमल-फत्ता का त्याग यहाँ दिल धड़काता है

सुंदर हरियाली अनमोल मिट्टी और पत्थर बेजोड़ है
रक्त चन्दन खुशबू यहाँ ये तो गढ़ चित्तौड़ है
शान से खड़ा मेवाड़ की थाती सबका ही सिरमौर है
राजस्थान गौरव नाम इसका ये तो गढ़ चित्तौड़ है

मीरा ने बनकर राधा विष अमृत पान किया
राणा ने लड़कर सदा युद्ध में ही दम लिया
जौहर की ज्वाला और केसरिया का जोश है
वीर धरा के इतिहास में नक्षत्र ये तो गढ़ चितौड़ है

शान से खड़ा मेवाड़ की थाती सबका ही सिरमौर है
राजस्थान गौरव नाम इसका ये तो गढ़ चित्तौड़ है

बेड़च-बनास यहाँ की गंगा-यमुना-सी है प्यारी
सेठ साँवरिया और माँ-शक्ति की महिमा है भारी
रावतभाटा बिजलीघर व सैनिक स्कूल का जोर है
मातृकुण्डियाँ हरिद्वार मेवाड़ का पावन ये तो गढ़ चितौड़ है

शान से खड़ा मेवाड़ की थाती सबका ही सिरमौर है
राजस्थान गौरव नाम इसका ये तो गढ़ चित्तौड़ है
(तर्जगीत- मेरा मध्यप्रदेश है)

गीत-“वही देश है तेरा”
                      रतन लाल जाट

हो-५ सुन्दर तन-मन, सुन्दर नर-नारी
ऐसा लगता जैसे फूल-कली हो।
बहुत ही प्यारा देश है तेरा-३ २

यहाँ का रहन-सहन सबसे निराला-२
मधुर है बोली जहाँ, वही देश है तेरा२*२
नहीं कोई भेदभाव देखा है मैंने-२
मानव को दिल से देवता समझते,
वही देश है तेरा, वही देश है तेरा-२

‘आ-५ याद जिसकी बिसरती नहीं
सपने में भी तस्वीर नजर आती
दिन-रात यही हमको तड़पाती
याद जिसकी  है बिसरती नहीं’

काले-कजरारे बादल उमड़-घुमड़ बरसते।
नदी-सागर गीत प्रेम के नित गुनगुनाते॥
वसंत में जब दुल्हन-सी धरती खूब सजे।
वैशाखी पर खेतों में धान की झड़ी लगे॥
ओ संभल के, दिल अपना खो जाये ना कहीं-२
कितनी मनभावन है कहानी?
वही देश है तेरा, वही देश है तेरा-२

हो-५ नाचो-गाओ मस्ती ही मस्ती
प्रेम-गगरी दिवानों को भीगोती-२
खुशियाँ का ये जहां
नहीं और मिलेगा-२

हर दिन मनाये जाते हैं तीज-त्योहार यहाँ।
घर-घर सजाये जाते हैं प्रभु-मंदिर जहाँ॥
मिल जाये साधु-संन्यासी, कहीं भोले-भाले बच्चे।
सच्चे प्रेम पर मर-मिटते, यहाँ के सब दिवाने॥
और देखो, प्रेम के बदले जान लुटा दी-२
राधा-मीरा-गोपियाँ कई सारी।
वही देश है तेरा, वही देश है तेरा-२

‘आ-५ पावन-निर्मल गंगा बहती
सागर की लहरें उछलती-२
प्यासी धरती कर देती हरियाली
मरूस्थल में भी फूल-बगिया महकती-२’

ओ-हो-२ तेरे देश में खुद देवता, भ्रमण करने आते हैं।
स्वर्ग छोड़कर वो यहीं पे, डेरा अपना लगा देते हैं॥

‘आ-हा-२ ऐसे देश में जन्म हुआ, धन्य है जीवन उन सबका-२
काश! लन्दन-पेरिस नहीं, हिन्दुस्तान मेरा घर होता।
जहाँ स्वर्ग से भी प्यारा स्वर्ग लगता-२
वैसा ही देश है तेरा, जैसा देश है मेरा।’
वैसा ही देश है तेरा, जैसा देश है मेरा॥
‘वैसा ही देश है तेरा, जैसा देश है मेरा।’
वैसा ही देश है तेरा, ‘ऐसा ही देश है तेरा।।’
(तर्ज- ऐसा देश है मेरा)

गीत- पापा कौन कहेगा?
                     रतन लाल जाट

तुम्हारे बाद फिर अपना, बेटा कौन बनेगा?-२
अंकल तो सब कहेंगे, पापा कौन कहेगा?
तुम्हारे बाद…………………………….
अंकल तो………………………………

मुश्किल है जीवन में कहीं, कोई अपने संगी मिले। १-२
होंगे बहुत लेकिन दिल की, बात कौन कहेगा?-२
अंकल तो………………………………

कहीं अकेले नहीं, दुंख में तो सही।१-२
हाल दिल का पूछके अच्छा, जीने को कौन कहेगा?-२
अंकल तो………………………………

पुकार तो बस हर घड़ी, किसी की होगी ही।१-२
दुख-दर्द जानकर खुद को, बेटा कौन कहेगा?-२
अंकल तो………………………………
तुम्हारे बाद…………………………….
अंकल तो………………………………
(तर्जगीत- तुम्हारे बाद हमें अपना कौन बनायेगा)

गीत-"तुमसे कितनी उम्मीद है "
                रतन लाल जाट

तुमसे कितनी उम्मीद है ये हमसे पूछ लो
तुमसे कितनी उम्मीद है ये हमसे पूछ लो
ना कभी रुके कदम
ना कभी रूके कदम इतनी उमंग भर लो
तुमसे कितनी उम्मीद है ये हमसे पूछ लो

जिन्दगी ये बड़ी ही अनमोल है यारा
बेकार ही इसे कहीं गुजरने तुम देना ना 
कीमत हर एक पल की
कीमत हर एक पल की कितनी है सोच लो
तुमसे कितनी उम्मीद है ये हमसे पूछ लो

लोग करने लगे है धोखा हरदम
भूल गये है क्यों वादे और कसम
फिर कैसे मिलेगी खुशी
फिर कैसे मिलेगी खुशी चाहे तुम भटककर देख लो
तुमसे कितनी उम्मीद है ये हमसे पूछ लो
तुमसे कितनी उम्मीद है ये हमसे पूछ लो
ना कभी रुके कदम
ना कभी रूके कदम इतनी उमंग भर लो
तुमसे कितनी उम्मीद है ये हमसे पूछ लो
(तर्जगीत- तुमसे कितना प्यार है, दिल में उतर कर देख लो)

गीत-"सावधान  रहना होगा"                 
                      रतन लाल जाट
प्यार करने से पहले सोच ले।
बिन परखे कोई ना ये रोग ले॥
फिर शादी की पक्की करना बातें।
वरना जिन्दगी बन जायेगी सजायें॥
सावधान, सावधान, सावधान……२

सावधान रहना होगा, दुनिया है धोखेवाली।-२
तुमको कदम-कदम फूँक कर जिन्दगी ये बढ़ानी।
कहीं इस तूफान में मिट ना जाये अपनी कहानी-२
तुमको कदम-कदम………………………
सावधान रहना……………………………
तुमको कदम-कदम………………………

शादी नाम है जीवन-गाड़ी का।
कहीं रूक ना जाये इसका पहिया॥
गाड़ी कभी ना यार पुरानी खरीदना।
कब रूक जाये? क्या है भरोसा?

फिर डगर पार मंजिल ना मिलती-२
तुमको कदम-कदम………………………
सावधान रहना……………………………
तुमको कदम-कदम………………………

कोरे सपने जीवन में ना हो।
वादे जो कभी अपने पूरे ना हो॥
हवा में कभी मत उड़ना।
उड़ने से पहले पाँव है टिकना॥


ना जाने कब गिर जायें हम भारी-२
तुमको कदम-कदम………………………
सावधान रहना……………………………
तुमको कदम-कदम………………………

इसीलिए जल्दी ना करनी है।
सारी खोजबीन हमको करनी है-३
सावधान हो सावधान, सावधान……२
(तर्ज गीत- मुबारक हो तुमको ये शादी)

गीत-“बड़ा ही नशा है”                             
                    रतन लाल जाट

बड़ा ही नशा है इस प्यार का, जो ना कभी उतरता है।-२
किसी पर ना चढ़े रंग इसका, हाल बहुत ही बुरा है॥
बड़ा ही नशा है इस प्यार का, जो ना कभी उतरता है।
बड़ा ही नशा

इस नशे ने बदल दिये जिन्दगी में रंग।
लगते हैं जो प्यारे बस सभी को हरपल॥
सब रंगों में रंग प्यार का अच्छा लगता है।-२
बड़ा ही नशा है इस प्यार का, जो ना कभी उतरता है।
बड़ा ही नशा

इस रंग में एकबार जो कोई रंग जाये।
फिर ना कभी वो इससे धूल पाये॥
दुनिया और मौत का डर भी भूला ना सकता है।-२
बड़ा ही नशा है इस प्यार का, जो ना कभी उतरता है।
बड़ा ही नशा

बड़ा ही नशा है इस प्यार का, जो ना कभी उतरता है।
किसी पर ना चढ़े रंग इसका, हाल बहुत ही बुरा है॥-२
(तर्ज गीत- कितना प्यारा है ये चेहरा)

गीत- “कोई किसी से”                        
             रतन लाल जाट

ये खुमार ईश्क का कैसा है?
हो-हो-हो, आ-आ-आ, हा-हा-हा-२
कोई किसी से प्यार करके प्यार नहीं पाता।
कोई किसी से दिल देकरके दिल नहीं पाता॥
कोई किसी से दोस्ती निभाके दोस्ती नहीं पाता।
ये खुमार ईश्क का कैसा है?-२
कोई अपने को कभी अपना नहीं समझता॥

जितना वो चाहे, उतना ही दूर जाये।
हँसी की जगह उसे, रोना ही मिल पाये॥

उस वक्त दिल उसका सहम जाये टूटके।
फिर वो विश्वास किसी पर करे तो कैसे?

ईश्क पागल है, वो अंधा-सा लगे।
आँखें खुली है, मगर कुछ ना दिखे॥

कोई किसी पे जीये तो वो चाहे नहीं जीना।
कोई किसी से प्यार करके प्यार नहीं पाता॥

प्यार ने जीना सीखाया, उसने जीते को मार दिया।
क्या बीते उस पर ऐसे क्षण में?
जिन्दा भी लगे वो मर गया जैसे॥
कोई किसी से दोस्ती निभाके दोस्ती नहीं पाता।
कोई किसी से प्यार करके प्यार नहीं पाता॥
ये खुमार ईश्क का कैसा है?-२
कोई किसी से प्यार करके प्यार नहीं पाता॥
(तर्ज गीत- क्यों किसी को)

गीत-“जुर्म करोगे तो दंड मिलेगा”
                              रतन लाल जाट

जुर्म करोगे तो दंड मिलेगा-२
फिर बहुत ही पछतायेगा।
कोई ना रहम करेगा थोड़ी,
बिश्वास सबका उठ जायेगा॥
जुर्म करोगे…………………।
ना कोई……………………।

जुर्म से बचना है, इज्जत से रहना है।
फिर कौन हमें धिक्कारेगा?
कर सके ना भला।
तो बुरा क्यों करें हम?
करना है अगर तो भलाई करना॥
जुर्म करोगे…………………

पाप के रस्ते पर कभी ना चलना।
कर्म का फल मिलता है याद रखना॥-२

याद रखोगे इनको, तो याद करेगी दुनिया।-२
तुम्हारे बाद भी, नाम अमर रहेगा।
नाम अमर रहेगा-२
जुर्म से……………………?
कर सके ना………………॥
जुर्म करोगे…………………

आवाज सुनो, दिल क्या कहता है?
सच और झूठ हमेशा याद रहता है॥-२
दिल की बात सुनना हमको।
बिन सोचे कदम मत उठाओ॥-2
सच के रस्ते पर ही यार चलना।
यार चलना-२
जुर्म करोगे…………………
कर सके ना………………।
जुर्म से……………………?
कर सके ना………………।
(तर्ज- ईश्क करोगे तो दर्द मिलेगा)

गीत-“जिसका मुखड़ा एक परी-सा”
                 रतन लाल जाट

जिसका मुखड़ा एक परी-सा।
फिर वो मिलना हसीन नजारा॥

देखूँ जब उसको, दिल मेरा डोल उठे।
याद करूँ तो, जी में डोरे पड़ने लगे॥
हँसी देखकर उसकी।
हो जाये गम की छुट्टी॥
बड़ा ही प्यारा नाम उसका।
जिसका मुखड़ा एक परी-सा………………

कहने को बातें हैं कई सारी।
मगर कभी ना वो घड़ी आयी॥
सोचता हूँ मैं जाकर उसको यूँ।
कहीं अकेले में मिलकर आऊँ॥
हो ना सके कुछ ऐसा जादू।
कैसे करूँ मैं दिल पर काबू?
बात मेरी वो समझे ना,
लगूँ मैं उसको एक पगला।
जिसका मुखड़ा एक परी-सा………………

इस प्यार में कोसों दूर,
निगाहें अपनी मिल जाये।
दिल टूट जाये मगर
एकपल भी उसको भूल ना पाये॥
राज ऐसा है ये, कोई समझ ना सके।
बस, दिल ही दिल में, बात हम सुन लेते॥
आखिर प्यार की ये दास्तां,
जन्नत में मिले कहीं ना।
जिसका मुखड़ा एक परी-सा………………


एकपल में बरसों की याद आ जाये।
मिलने से हमको कोई रोक ना पाये॥
प्यार में कोई बात छुपे ना।
छोड़ तुझे कैसे कहूँ दूसरे को मैं अपना॥
ये जमीं-आसमां, इनसे हम अनजान सदा।
जिसका मुखड़ा एक परी-सा………………

कहानी वो हमको बहुत प्यारी लगे।
राग यदि उसका कोई गुनगुनाये॥
तो ऐसा लगे कि- मानो
एक जन्नत मिल गया हमको॥
तुझमें है मेरा संसार।
तुम बिन जीना निस्सार॥
आके मिल जाओ वरना,
जीवन छोटा है बीत रहा।
जिसका मुखड़ा एक परी-सा………………
(तर्जगीत- बनजारा-बनजारा दिल मेरा बनजारा)

गीत-"पाया-पाया हमने सबकुछ पाया"
                              रतन लाल जाट

पाया-पाया हमने सबकुछ पाया।
भारत माता ने स्वर्ग भी लुटाया॥
बाकी नहीं हमारी है कोई कामना।
पाया-पाया हमने सबकुछ पाया……

इस धरती का अन्न-जल लेकर जीते हैं।
हम कभी खून अपना बहाने से ना डरते हैं॥
जान से प्यारा हमको ये वतन है।
कभी पीछे नहीं हटते, मरने से ना चुकते हैं॥

इतना प्यार भला हमें कहाँ मिलता?
पाया-पाया हमने सबकुछ पाया……

समझते हैं यहाँ माँ-बाप को देवता हम।
हर रिश्ते का कभी ना तोड़ते हैं बंधन॥
सच्ची दोस्ती में लगा दें जान।
कम नहीं है भाई-बहिन का प्यार॥

स्वर्ग भी तरसता है आने को यहाँ।
पाया-पाया हमने सबकुछ पाया……

पाया-पाया हमने सबकुछ पाया।
भारत माता ने स्वर्ग भी लुटाया॥
बाकी नहीं हमारी है कोई कामना।
पाया-पाया हमने सबकुछ पाया……
(तर्जगीत- सोना-सोना सोणिये)

गीत-"ए दिल तू क्यों खोया?"           
                रतन लाल जाट

ए दिल तू क्यों खोया?-२-२-१
अब हाल बुरा है, कोई ना साथ तेरा है।
प्यार की कहानी यही समझो, अंत समय बस रोना मिलता है॥
ए दिल तू क्यों खोया?-२

देखा तूने जो एक सपना, निकला वो कच्चा है।-२
हमनें माना था अपना, आज लगता वो पराया है-२॥
प्यार में अकसर-२ यही होता है।
प्यार की कहानी यही समझो, अंत समय बस रोना मिलता है॥
ए दिल तू क्यों खोया?-२-२-१

कितना प्यार हम करते थे? उस पर जीते-मरते ।-२
कोई ना लगता अच्छा है, दिल खुद से अब डरता है-२॥
कहें किसी को-२ कोई ना सुनता है?
प्यार की कहानी यही समझो, अंत समय बस रोना मिलता है॥
ए दिल तू क्यों खोया?-२-२-१

एक-दूजे के संग जगते-सोते।
एकपल भी हम दूर ना होते॥-२
कितने ही वादे थे? लम्हें वो निकले झूठे-२॥
अब जीना भी-२ मरने जैसा है।
प्यार की कहानी यही समझो, अंत समय बस रोना मिलता है॥
ए दिल तू क्यों खोया?-२-२-१

पहली नजर में कोई प्यार ना करे।-२
बिन सोचे-समझे अपना दिल ना दे-२॥
यही सबको अपनी-२ नसीहत देना है।
प्यार की कहानी यही समझो, अंत समय बस रोना मिलता है॥
ए दिल तू क्यों खोया?-२-२-१
(तर्जगीत- हाय ओ रब्बा, दिल जलता है।)

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इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,242,लघुकथा,1248,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,326,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2005,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,709,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,793,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,17,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,83,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,204,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,77,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
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रचनाकार: तर्ज विशेष पर रचित गीत-संग्रह (रतन लाल जाट)
तर्ज विशेष पर रचित गीत-संग्रह (रतन लाल जाट)
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रचनाकार
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