‘‘संत गुरू घासीदास जी के जीवन-दर्शन, जीवन-सतचरित्र एवं उनका सतनाम धर्म’’

SHARE:

‘‘संत गुरू घासीदास जी के जीवन-दर्शन, जीवन-सतचरित्र एवं उनका सतनाम धर्म’’ (गुरू घासीदास जयंती 18 दिसम्बर 2019 के लिए विशेष लेख) मध्यप्रदेश क...

‘‘संत गुरू घासीदास जी के जीवन-दर्शन, जीवन-सतचरित्र एवं उनका सतनाम धर्म’’

(गुरू घासीदास जयंती 18 दिसम्बर 2019 के लिए विशेष लेख)

मध्यप्रदेश के पूर्वी भाग में छत्तीसगढ़ स्थित है। इस भूमि में अनेक संत पैदा हुए, गुरू घासीदासजी इसी श्रृंखला में पैदा हुए एक प्रकाशमान मणि के रूप में छत्तीसगढ़ की पावन भूमि रायपुर जिले के गिरौदपुरी ग्राम में आज से 267 साल पूर्व 18 दिसम्बर 1756 को अवतरित हुए थे। घासीदास जी के बचपन का नाम ‘घसिया’ था, बाद में ये गुरूघासीदास कहलाये। इनके पिता का नाम मंहगूदास तथा माता का नाम अमरौतीन बाई था। अमरौतीन के गर्भ से चार पुत्र उत्पन्न हुए ननकू,मुनकू, झुनकू, और घसिया था, भाईयों में सबसे छोटा घसिया ही था जिन्हे बाद में गुरू घासीदास के नाम से पुकारा गया। जिस समय गुरू घासीदास जी का अवतरण हुआ सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ में अराजकता और विषमताएं व्याप्त थी, समाज पतन की दशा में था और समाज में जाति-पांति एवं छुआछूत के बन्धन में बुरी तरह से जकड़ा हुआ था। गुरू घासीदास जी ने इन समस्त कुरीतियों और अंधकार को दूर कर सम्पूर्ण मानव जाति को एक आशा और विश्वास, हर्ष एवं उल्लास का सत संदेश दिया। गुरू घासीदास बचपन से ही संत और साधु प्रकृति के थे। इनका स्वभाव सरल, शांत, सीधा-सादा, काम, क्रोध, लोभ, मद, मोह आदि से विरक्त ‘‘सतनाम’’ धर्म के अनन्य उपासक सच्चे भक्त थे। गिरौधपुरी में औंरा-धौंरा वृक्ष के नीचे गुरू घासीदास जी को सतनाम का ‘‘सत्यज्ञान’’ की प्राप्ति तथा उस सतपुरूष सतनाम से सीधा सम्पर्क एवं दर्शन हुए और उस सतपुरूष सतनाम में तल्लीन होकर सदैव उनका जीवन चरित्र निर्मल जल की भांति प्रवाहमान होने लगा है-

‘‘घासीदास के चरित सुहावन, गंगा जल जिमि निर्मल पावन।

सुनी-सुनी भक्ति पुलकित अंगा, भक्ति विभोर कथा रस रंगा।।’’(महाकवि-मनोहरदास नृसिंहजी)

छत्तीसगढ़ के सतनामी समाज में उत्पन्न संत गुरू घासीदासजी एक ऐसे अलौकिक प्रकाश लेकर आए जिन्होने अपने सतज्ञान के दिव्य किरणों से मानव समाज को एक नया मार्ग दिखाया। जिसे अपनाकर आज उनके बताये हुए सतमार्ग का अनुसरण कर संत गुरू घासीदास जी के स्मरण में प्रति वर्ष 18 दिसम्बर को गुरू घासीदास जयंती के रूप में मनाते हैं। ‘सतनाम’ धर्म के अनुयायी सतनामी कहलाये। क्योंकि घासीदास ने ‘सतनाम धर्म’ को प्रशस्त किया और छत्तीसगढ़ में जो ‘सतनाम धर्म’ के मानने लोग हैं वही सतनामी कहे जाते हैं। ‘सतनाम’ ये दो शब्द ‘सत्’ और ‘नाम’ सत्य शब्द का अस्तित्व सूचक है, जो संतो ंके अनुसार परम तत्व का बोधक माना जाता है। यह ‘नाम’ उस वस्तु के अंग की ओर संकेत करता है, जो साधक के अपने निजी अनुभव में आ चुका है उसके लिए सभी प्रचलित नामों का एक प्रकार से प्रतिनिधि भी समझा जा सकता है उस ‘सतनाम’ का महत्व संतों ने सब कहीं दर्शाया है और उसी को सब कुछ मानते हैं, उसके स्मरण का उद्देश्य ‘सत्य’ का उतना ही अंश उसके लिए परिचित है। उसी की अनुभूति उसे लाभदायक हो सकती है। दादूदयाल ने लिखा है-‘‘ गउ बच्छ का ज्ञान गहि, दूध रहे ल्यो लाई।

सींग पूंछ पग पर हरै, अस्थन लागै लाईं।।’’

अर्थात्‘‘ हमें ज्ञान का ग्रहण उस बछड़े की भांति करना चाहिए जो दौड़कर गाय के स्तन में लग जाता है और उसके दूध को पीता है वह उसकी सींग, पूंछ, व पैरों की ओर दृष्टि नहीं डालता है। संतों के नाम स्मरण का भी वास्तविक रहस्य यही प्रतीत होता है। संत गुरू घासीदासजी की भक्ति भावना स्वभावतः निर्गुण एवं निराकार की उपासना के अन्तर्गत आती है, जिसे अभेद शक्ति का नाम भी दिया जाता है, किन्तु उन्होंने अपने इष्ट ‘‘सत’’ को कोरे अशरीरी व भावात्मक रूप में नहीं समझा है।

संत गुरू घासीदासजी एक महामानव और एक महान आत्मा के रूप में अवतरित हुए थे। जो सांसारिक दुनिया से अलग उस परम-सत्ता की ओर ही तल्लीन निर्गुण ब्रह्म के उपासक थे। उन्होंने सिर्फ और सिर्फ ‘‘सतनाम’’ का ही स्मरण किया और ‘‘सतनाम’’ में ही उन्होंने सतपुरूष सतनाम को प्राप्त किया जो सत्, चित्, आनंद है। उस सतपुरूष सतनाम ने संत गुरू घासीदासजी को माया रूप धारण कर कई तरह से छलने की कोशिश की किन्तु वह अपने मार्ग पर अडिग रहे और उन्होने ‘सत’ के मार्ग से जरा भी विचलित नहीं हुए। अन्ततः माया को हार माननी ही पड़ी। गुरू घासीदासजी का वास्तविक जीवन चरित्र कवि मनोहरदास नृसिंह कृत ‘‘श्री सत्यनाम गुरू घासीदास नामायण’’ में मिलता है। यह ग्रंथ सात सर्ग में विभक्त है। यहां पर यह पंक्ति द्वितीय ‘‘वैराग्य काण्ड’’ से उद्यृत हैः-

‘‘भक्ति कहती कर जोरि कै, साहेब विनती तोरि।

घासीदास पावन चरित, आगे कहो बहोरि।।’’

गुरू घासीदासजी का विवाह माता सफुरा बाई के गर्भ से हुआ था। उन्होंने अपने गर्भ से चार पुत्र और एक पुत्री को जन्म दिया- ‘‘जेठ पुत्र अमरू रहे, बालक आगर, अड़गडि़यादासू।

डेढ़ वर्ष की बालिका, आज हूं खेलत गोदू।।’’(घा.ना.प्र.अ.पृ.-7)

संत गुरू घासीदासजी के साथ सतपुरूष ने माया रूप धर कर अनेक छल किया उन्होंने सत्य के मार्ग से कभी विचलित नहीं हुएः-‘‘चारो लरिका इक संग मरिगे, सफुरा के संसार उजरगे।’’(घा.ना.प्र.अ.पृ.17)

गुरू घासीदास तो पहले से ही घर-बार छोड़कर वैराग्य के लिए निकल पड़े थे। माता सफुराबाई के चारो पुत्र और उनकी लाडली पुत्री के निधन हो जाने पर उनके जीवन में विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ता है इस तरह पुत्र शोक और पति का परित्याग सहन नहीं हो सका। वह भी अपना प्राण त्याग देती है, तब भी गुरू घासीदास अपने वैराग्य पर अटल रहे और अपनी पत्नी की लाश को दफनाने भी नहीं आते अतः लाश को ग्रामवासी दफनाते हैं। दोहाः- ‘’तब ते घासीदास कर, अटल हुआ वैराग्य।

प्ति त्यागत तनु त्यागेउ, धन्य सफुरा के भाग।।’’(घा.ना.प्र.अ.पृ.13)

ग्राम के जन साधारण लोगों ने गुरू घासीदास जी को यहां तक छली-कपटी आदि कहा किन्तु उन्होंने उसके प्रतिकार में कटु वचन का प्रयोग नहीं किया। और अपने सत्य के मार्ग पर अटल रहेः- दोहा-

‘‘ढोगी झूठा पाखण्डी कही, पागल मूर्ख ठग आदि।

ते ही संगी दुई चारि मिली, करन लगे बकवादी।।’’(घा.ना.द्वि.अ.पृ.18)

इन सब के बावजूद भी घासीदासजी ने इन मूर्खों एवं अज्ञानियों को क्षमा ही किया और कभी भी अपने मुख से कठोर वचन का प्रयोग नहीं किया और यह कहकर क्षमा कर दिया-

‘‘ अनुचित करही मूर्ख अज्ञानी, करही क्षमा ते ही साधु सयानी।’’(घा.ना.द्वि.अ.पृ.19)

‘‘घासीदास नामायण’’ में उनके ‘सत’ चरित्र का सुन्दर चित्रण किया गया है जिसमें ‘‘सतवाणी’’ एवं ‘‘सतनाम’’ की चर्चा अति सुन्दर ढंग से हुआ है जो महान संत के रूप में हमारे समक्ष आते हैं- दोहा- ‘‘घासीदास पावन चरित, सुनहीं सहित विश्वास।

ताके संकट कटही सब, कहै मनोहर दास।।

भूत-प्रेत बाधा गृहा, घर में परे बिमारी।

पाठ करै नामायण, मन में सत्य विचारी।।

श्रद्धा भक्ति युत पढ़ई नित, सदा वाणी सत बोल।

सतगुरू कृपा प्रसाद से, पाव ही ज्ञान अमोल।। (घा.ना.द्वि.अ.पृ.19)

संत गुरू घासीदासजी का चरित्र अति पावन है। और उन्होंने सदा सतनाम का ही सुमिरन किया है। और सतनाम का ही जाप करने का उपदेश दिया है। जिन्हें पढ़कर आज हम अपनी सतज्ञान की चक्षु को खोल सकते हैंः- ‘‘सतपुरूष सतनाम, सफल विश्व के कारण।

सत-सत कोटि प्रणाम, अंतस दृग पट खोलिए।।

ध्यान पटल के माहि, चरित चित्र दर्शाईए।

गुप्त प्रकट यहां आहो, कर गही कलम लिखाइए।।

गुरू घासीदासजी का सतनाम की महिमा भारी है। जिसे देखकर साधारण जन समुदाय आश्चर्य चकित से रह जाते हैं- ‘‘एक तरफ धासीदास खड़े, दूसर ओर बछड़ा गाय।

सत के अंश सत बात करे, भेद कोई नहीं पाय।

गांव बाहर से बिदा करी, सत संदेश भेजाय।

वक्त परे सत ध्याान देई, सतनाम गुण गाय।

गुरू चरित सतदेव कथे, संत दास धरे ध्याान।

पन्द्रह वर्ष के गुरू भयों, जंगल करत पयान।

संत सखा सब मिल के, सुमता एक बनाय।

जन्म भवन सब आई के, गुरू को कहेउ समझाय।

जंगल में मंगल करो, आन्न्द खुशी होई जाय।

संग देउ गुरू बाबा, सब कोई चरण मनाय।

आदेश पिता मुझे दीजिए, आशीर्वाद सतनाम।


संग सखा सो जाई हौंव, सब की है यह मांग। (महाकवि-राजमहंत नंकेसरलाल टण्डन, सत्यवंश सतनाम धर्म ग्रंथ से)

आगे गुरू घासीदासजी ने अपने जीवन में ‘सतनाम’ ज्ञान के अनेक चमत्कार दिखलाएः-

‘‘चमत्कार सतनाम को, गुरूजी करे पुकार। सत तप प्रकाश करो, संतन के हितकार।

आगी नहीं पानी नहीं, सुखा चाउर दार। स्वच्छ कपडा ढ़ांक दियो, जेवन करेउ तैयार।

देखे दशा संग के, खिचड़ी भात पकाय। दाल चावल मिलाई के, सब पात्र को जमाय। (महाकवि-राजमहंत नंकेसरलाल टण्डन, सत्यवंश सतनाम धर्म ग्रंथ से)

अर्थात् गुरू बाबा घासीदास जी ने बिना आग पानी के भोजन बनाया जिसका इस महाकाव्य में कवि ने सुंदर वर्णन है। गुरू धासीदास जी दाल चावल को बर्तन में भरकर इकटठा रखकर के बीच में गुरू बाबाजी हाथ जोड़कर वह साहेब सतपुरूष सतनाम के नाम की स्तुति प्रार्थना करने लगे और साथ में सभी संग साथी भी प्रार्थना करने लगे। इस प्रकार सतनाम धर्म के संस्थापक गुरू घासीदास जी का जीवन चरित और उनका जीवन दर्शन चमत्कार से भरा पड़ा है। चमत्कार ही नहीं बल्कि वास्तविक सच्चाई से उनका जीवन दर्शन सब के सामने खुली किताब की तरह है। जिस पर उनके अनुयायी सतनाम के ज्ञान के सागर में जितना डूबते जाएंगे उतना ही सतनाम ज्ञान की गहराई मिलेगी। जिस पर आप डूबते जाएंगे और ज्ञान की मोतियों का अर्जन करते जाने की आपमें ललक पैदा होगी।

डॉ.रामायणप्रसाद टण्डन (सतनामी)

90,आदर्श नगर कांकेर छत्तीसगढ

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: ‘‘संत गुरू घासीदास जी के जीवन-दर्शन, जीवन-सतचरित्र एवं उनका सतनाम धर्म’’
‘‘संत गुरू घासीदास जी के जीवन-दर्शन, जीवन-सतचरित्र एवं उनका सतनाम धर्म’’
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2019/11/blog-post_25.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2019/11/blog-post_25.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content