नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

नेताजी - लघुकहानी - राजेश माहेश्वरी

- राजेश माहेश्वरी

परिचय

राजेश माहेश्वरी का जन्म मध्यप्रदेश के जबलपुर शहर में 31 जुलाई 1954 को हुआ था। उनके द्वारा लिखित क्षितिज, जीवन कैसा हो व मंथन कविता संग्रह, रात के ग्यारह बजे एवं रात ग्यारह बजे के बाद ( उपन्यास ), परिवर्तन, वे बहत्तर घंटे, हम कैसे आगे बढ़ें एवं प्रेरणा पथ कहानी संग्रह तथा पथ उद्योग से संबंधित विषयों पर किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं।

वे परफेक्ट उद्योग समूह, साऊथ एवेन्यु मॉल एवं मल्टीप्लेक्स, सेठ मन्नूलाल जगन्नाथ दास चेरिटिबल हास्पिटल ट्रस्ट में डायरेक्टर हैं। आप जबलपुर चेम्बर ऑफ कामर्स एवं इंडस्ट्रीस् के पूर्व चेयरमेन एवं एलायंस क्लब इंटरनेशनल के अंतर्राष्ट्रीय संयोजक के पद पर भी रहे हैं।
आपने अमेरिका, चीन, जापान, जर्मनी, फ्रांस, इंग्लैंड, सिंगापुर, बेल्जियम, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड, हांगकांग आदि सहित विभिन्न देशों की यात्राएँ की हैं। वर्तमान में आपका पता 106 नयागांव हाऊसिंग सोसायटी, रामपुर, जबलपुर (म.प्र) है।

---


नेता जी

एक दिन शहर के एक धार्मिक स्थल पर रात में किसी शरारती तत्व द्वारा गंदगी फेंक दी गई और अवांछनीय पोस्टर भी धर्मस्थल पर चिपका दिये गये। दूसरे दिन सुबह जब धर्मावलंबियों ने यह देखा तो वे आगबबूला हो गये एवं दूसरे धर्म के धर्मावलंबियो पर यह निंदनीय कृत्य करने का आरोप लगाने लगे। दोनों धर्मावलंबियों के बीच देखते ही देखते वाद विवाद बढ़ने लगा और आपस में मारपीट की स्थिति निर्मित होने लगी। उसी समय क्षेत्र के एक नेताजी दौड़े-दौड़े वहाँ पर आये और पूरा माजरा जानने के बाद दोनों पक्षों को समझाइश देने लगे एवं आपसी सद्भाव और एकता पर लंबा चौडा उद्बोधन दे दिया। इससे प्रभावित होकर दोनों पक्षों ने गंभीरतापूर्वक मनन किया की यह किसी शरारती तत्व द्वारा किया गया निंदनीय कृत्य है जिसका उद्देश्य दोनों समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाना था। अब नेताजी ने वहाँ साफ सफाई कराकर दोनों पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाकर वहाँ से चले गए। वहाँ पर उपस्थित सभी लोग नेताजी की सक्रियता से बहुत प्रभावित थे।

रात के अंधेरे में एक व्यक्ति चुपचाप अकेले नेताजी के घर आकर उन्हें बधाई देते हुए बोला कि आपका काम हो गया है। अब आपकी चुनाव में जीत सुनिश्चित है। नेताजी ने भी मुस्कुराकर उसे नोटो की गड्डी दी और अगले सप्ताह दूसरे मोहल्ले में ऐसा ही कृत्य करने का निर्देश दे दिया।

ईमानदारी

पिछले वर्ष दिसंबर के अंतिम सप्ताह में मुझे अपने कारोबार के संबंध में दुबई जाना था। उस दिन रविवार था और मैं दिल्ली एयरपोर्ट पर शाम 7 बजे की फ्लाइट का इंतजार कर रहा था। मैं अपना समय व्यतीत करने के लिए एयरपोर्ट के एक रेस्टारेंट में काफी पीने बैठ गया। मैंने बिल चुकाने के लिए जेब हाथ डाला तो मेरा पर्स नहीं मिला यह देखकर मेरे होश उड़ गये क्योंकि उसमें मेरा अंतर्राष्ट्रीय क्रेडिट कार्ड और दो लाख रू. मूल्य के अमेरिकन डालर थे। मैंने खूब ढूँढने की कोशिश की परंतु पर्स नही मिला। मैंने रेस्टारेंट के मैनेजर से अपनी स्थिति बताते हुए प्रार्थना की, कि मैं दुबई वापिस आने पर आपका रूपया दे दूँगा। मैनेजर बहुत ही सहृदय व्यक्ति था उसने मेरी बात मान ली और अपने पास से भी मुझे कुछ डालर आवश्यक खर्च हेतु दे दिये। मैं बहुत निराश था एवं सबसे ज्यादा चिंता मुझे अंतर्राष्ट्रीय क्रेडिट कार्ड की थी।

मैं निराश कदमों से बोर्डिंग काऊंटर की ओर बढ़ रहा था तभी दरवाजे पर जब सिक्योरिटी को मैंने अपना बोर्डिंग कार्ड दिखाया तभी उसकी बगल में खड़े एक सफाई कर्मचारी ने मुझसे पूछा कि क्या आपका ही पर्स गुम गया था। मैंने कहा हाँ। वह कर्मचारी मेरा पर्स मुझे वापिस करते हुए बोला सर आपका पर्स मुझे वेटिंग हाल के पास पडा हुआ मिला था इसमें आपके विजिटिंग कार्ड से आपका नाम जानकर मैंने जानकारी ली तो मुझे मालूम हुआ की आप शाम 7 बजे की फ्लाइट से दुबई जा रहे है। इसलिये मैं इस काऊंटर पर आकर खडा हो गया ताकि आपको पहचान कर पर्स दे सकूँ आप इसमें रखे हुए रूपये अन्य एवं सामग्री जाँच ले। मैंने उसे धन्यवाद दिया और इनाम स्वरूप 5000 रूपये देने का प्रयास किया परंतु उसने विनम्रतापूर्वक मना कर दिया। मैं भी जल्दी में था इसलिये मैंने उसका पता एवं फोन नंबर अपने कार्ड पर लिख लिया और कहा मैं तुमसे जल्दी ही संपर्क करूँगा। इतना कहकर मैं अपनी फ्लाइट की ओर रवाना हो गया।

वापिस लौटने पर मैंने इस बात की चर्चा अपनी कंपनी के मैनेजर से की तो उसका कहना था कि ऐसे ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ लोगों की तो हमें जरूरत है क्यों ना हम उसे अपनी कंपनी में नौकरी दें ? मैनेजर का सुझाव मुझे भी बहुत पसंद आया और मैंने उस व्यक्ति से संपर्क करके उसे नौकरी देने का प्रस्ताव दिया। वह भी इस प्रस्ताव से अत्यंत प्रसन्न हुआ और कुछ दिनों बाद हमारी कंपनी में नौकरी करने लगा। अपनी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के कारण वह एक वर्ष में ही कंपनी में उच्च पद पर कार्य करने लगा।

0 टिप्पणियाँ

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.