'ठक-ठक' बाबा - मिहिर

SHARE:

'ठक-ठक' बाबा दोपहर की उजास जब खिड़कियों तले फूटकर भीतर को आती थी, तो उनसे गर्मियों की धूप-छांव कुछ उदास हो जाती थी। तब दोपहर के भोजन...

image

'ठक-ठक' बाबा

दोपहर की उजास जब खिड़कियों तले फूटकर भीतर को आती थी, तो उनसे गर्मियों की धूप-छांव कुछ उदास हो जाती थी। तब दोपहर के भोजन मैं कुछ खा-गिरा कर उधम मचाते हम बालकों की टोली को अम्मा कुछ देर सुलाने के लिए बगल में लेट जाती थी।

खिड़की उदास। तलैया उदास। मरणासन्न उदासी को तोड़ती मक्खियों की भिनभिनाहट में गांव की बारादरियां हवाओं से लाचार होतीं।

दोपहर के समय गांव कुछ उकताया-सा धूप के ढलने का इंतजार करता, सुस्ताया होता था। बालकों के शोर से कुछ पल की निजात उस आम के पेड़ को भी मिल जाती थी जिसके तले मिट्टी के फर्श पर हमारी एड़ियों के निशान और गोटियों के फलक छपे होते थे। बड़े ददा वहीं कहीं अपनी गोटियों को अम्मा की नजर से छुपा कर रखते थे और गर्व से हमें दिखाते थे। (जैसे कि माँ को पता ही न हो!)

हमें शाम ढले का इंतजार औरों से ज्यादा होता था। कब धूप थोड़ा ढलके और सूरज महाराज अपनी नजरें तरेरे हुए आसमान से उतरें, तो हमें भी तलैया नसीब हो। शाम को खूंटे से छूटा बछड़ा जैसे मां के थनों पर मुंह मारने लपकता है, वैसे ही किवाड़ों से फूटती रोशनी के ढलते ही हम भी आम की छैया की तरफ लपकते।

लेकिन दोपहर का वह नीरस समय नींद के लिए नियत था। और नींद - जो हमारी आंखों से कोसों दूर अंतरिक्ष में कहीं चंपई-लाल-सफेद तानेबाने बुनती आंखों पर झपकती भी न थी। नींद - जिसकी सबसे ज्यादा दरकार अम्मा को होती थी, जो घर के कामकाज में भिनसरे से लगी थक कर निढाल पड़ना चाहती थी। इस समय उसे भी हम बच्चों को सुलाने के बहाने पलक झपकाने की फुर्सत मिलती थी। पर हमें सुलाकर खुद कब न जाने पलक झपकते गायब भी हो जाती, इसका पता भी न चलता। हाथ-पैर मारते बाल-ग्वालों को सुलाने का आखिरी चारा था - 'ठकठक बाबा'।

XXX

वह पता नहीं कहां रहता था पर उस समय अचानक कहीं से भी हाजिर हो जाता था, ठीक हमारी पलंग के पास कहीं। अम्मा के आवाज लगाते ही फौरन दो बार 'ठक-ठक' कर अपनी उपस्थिति दर्ज करता था। आंख बंद न करने वाले शैतान बच्चों के लिए 'ठक-ठक' बाबा  एक चेतावनी था। आंखें तो खिड़की से बाहर आम की डाली की सबसे ऊंची शाखाओं पर मंडराती चिड़ियों के खेल में अचानक 'ठक-ठक' बाबा की उपस्थिति पाकर झट से झँप जाती थी।

यह 'ठक-ठक' बाबा भी अजीब था। रात में पता नहीं क्यों नहीं आता था! दिन से इसे क्या बैर था!! जब आंखें झपकती ही न थी, ठीक तभी आकर हमें डराता था। उसके भय से फौरन आंखें कसकर मूंद लेनी पड़ती थी। रात का तो पता ही नहीं चलता था। कभी ओखली, कभी चक्की, कभी मुंडेर, तो कभी चूल्हे के पास बैठकर खेलते-खेलते बिना 'ठक-ठक' बाबा को बुलाये, कब आंख लग जाती। पर सुबह आंख हमेशा बिस्तर पर ही खुलती थी। यह जादू अजब था। रात का पता भले ही न चलता हो लेकिन आधी नींद में कई बार पैरों की थकी पिंडलियों और एड़ियों पर कोमल हथेलियों की गुदगुदाती मालिश-सी होती। सुबह तेल चुपड़ी एड़ियों पर हल्की सी ठसक महसूस होती। शायद 'ठक-ठक' बाबा की अम्मा आती होंगी रात को। बाबा भी शायद रात में ऐसे ही कहीं सो रहता होगा।

XXX

लोरियां गाने वाली अनपढ़ माताएं अब पढ़-लिख गई हैं। उन्हें यह गंवारपन गंवारा नहीं। बच्चे अब पिता के कंधों पर नहीं खेलते, बल्कि आभासी दुनिया के काल्पनिक कीटों से खेलते हैं। बच्चों की कल्पनाओं के तीन-आयामी रंगीन चित्रों (3-D Animation film) ने आधुनिक विश्व के सार्वभौमिक बचपने का हर कोना खोज डाला है। अब कल्पनाओं के लिए बच ही क्या रहा? हम तो एक 'ठक-ठक' बाबा के नाम पर पूरा कल्पना लोक रच डालते थे।

पर क्या 'ठक-ठक' बाबा अब सच मे नहीं आता होगा? क्या वह मर गया है, या मर रहा है? क्या वह मां की लोरियों में साथ-साथ गुनगुनाते हुए आज भी अपनी अम्मा के गीतों को याद नहीं करता होगा? अब क्या मोबाइल की रोशनी से उसे चिढ़ होती होगी? कभी सोचता हूं, जिन्हें नींद न आने की शिकायत होती है, उन्हें क्या बचपन में किसी 'ठक-ठक' बाबा ने नहीं सुलाया होगा? या शायद इतना सुलाया होगा कि बड़ा होने पर आज भी बिना उसके नींद नहीं आती होगी।

किस्से कहानियों के गांव, पीपल की छांव, भूतों की ठांव, और उनपर चलने वाले बच्चों के पांव अब कहां पड़ते होंगे? क्या बचपना मर रहा है?

नहीं।

बचपना बच्चों में नहीं बल्कि उनके मां-बाप में मरा है।  बच्चों में तो बचपना अब पैदा ही कहां होने दिया जाता  है! पीपल या आम की छांव अब मिलती किसे है? सीधे मोबाइल मिल जाते हैं। 'ठक-ठक' बाबा ऐसे नहीं मरा करते।

XXX

आज बरसों बाद सोचकर खुद पर हंसी आती है। फिर दूसरे ही पल सोचने बैठ जाता हूँ कि अब वह 'ठक-ठक' बाबा क्या सच मे नहीं आता होगा! कहां रह गया होगा?

लेकिन एक दिन अचानक वह अपने आप प्रकट हो गया। दरअसल मैंने ही उसे बुलाया था। एक दिन अचानक नरम तौलिए से उतरकर रुई के फाहे सा कोमल मेरा बचपना, मेरी गोद में उतराया था और कहानी सुनाने की ज़िद ठाने था। दो कहानियों के बाद अपने खाली खजाने से निपटने का वही सदियों पुराना अस्त्र मेरे पास था। जिसे हजारों वर्ष पहले पर्वत की किसी गुफा में मेरे किसी आदिम पुरखे ने ही शायद आग और पहिये से भी पहले खोज निकाला था। मैंने उसे पुकारा "ठकठक बाबाS!"  और वह झट हाजिर हो गया। उसी पुराने तेवर के साथ। और बचपने ने झट से पलकें मूंद लीं।

नन्ही पलकों के पर्दे में धीरे धीरे ढीली पड़ती हल्की नीलिमा युक्त आंखों की चटख पुतलियों में भयभरी जिज्ञासा कैसे गहन निद्रा तक ढलती गई, इसे देखने का सुकून मेरे 'ठक-ठक' बाबा को भी मेरे बचपन में ऐसे ही मिला होगा।

XXX

इसलिये मुझे लगता है, 'ठक-ठक' बाबा हर जगह हर देश में है। जहां कहीं भी माएँ अपने बच्चों को प्यार से, दुलार से, अब भी सुलाती हैं। वहां वह तुरंत हाजिर हो जाता है। शायद उसे भी अपनी अम्मा की तलाश है । वह भी शायद किंवदंतियों का कोई रूठा बालक है, जो अपनी शैतानियों से अपनी मां को हैरान-परेशान किये रखता होगा। शायद इसीलिए अनंत काल तक न सो सकने वाली सजा झेल रहा है। उसे हर माता में अपनी अम्मा की खोज रहती होगी।

मेरा बचपन इन्हीं कथाओं में पगा है। मैंने साधारण चीजों को असाधारण होते देखा है। पलक झपकते ही जीवित वस्तुओं को किम्वदंती हो जाते देखा है। मेरे मन का भूला बालक आज भी रूठता है। पर अब वह जल्दी से मनता भी तो नहीं।

XXX

यकीन मानिए। दुनिया बदली हो, सदियां बदल जाए, और लोकाचार भले ही अलग-अलग मुल्कों में अलग अलग हों। 'ठक-ठक' बाबा नहीं बदलते। नाम भले कुछ हो। कहीं झोलीबाबा, कहीं पोटलीबाबा, कहीं नीमवाले बाबा, कहीं भूरेबाबा तो कहीं झक सफेद दाढ़ी और लाल कपड़ों वाले संता हों। 'ठक-ठक' बाबा कभी नहीं मरा करते। उनकी आंखों के आगे कितनी पीढ़ियां बचपन से जवानी और जवानी से बुढ़ापे में कदम रखती चली गईं। पर वे अब भी हर कहीं मौजूद हैं।

वैसे आपके यहां 'ठक-ठक' बाबा को क्या कहकर बुलाते हैं?

                                                           मिहिर

(नोट - उक्त लेख में लेखक के आत्मवृत्तात्मक प्रसंग ढूंढना व्यर्थ का उपक्रम होगा। यह मात्र एक ललित निबंध है)

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: 'ठक-ठक' बाबा - मिहिर
'ठक-ठक' बाबा - मिहिर
https://lh3.googleusercontent.com/-zoQq32LZyLk/W9LQ8uuYFHI/AAAAAAABE7o/M7-1lA8uJmETTsPuW9VWn_2Hya5fv-3QgCHMYCw/image_thumb%255B1%255D?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-zoQq32LZyLk/W9LQ8uuYFHI/AAAAAAABE7o/M7-1lA8uJmETTsPuW9VWn_2Hya5fv-3QgCHMYCw/s72-c/image_thumb%255B1%255D?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2019/11/blog-post_3.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2019/11/blog-post_3.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content