नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

लघुकथा - रुपांतरण - शशि दीपक कपूर

"उठो, नहा-धो लो, नये कपड़े रखे हैं, नहाकर वहीं पहनना ।"

"नहीं, आज नहाने का मन नहीं है।"

"क्यों ? आज इतना बड़ा दीवाली का त्यौहार है और आपका मन ठंड से बिना नहाए ही कांपने लगा है जी । सारी दुनिया धूम-धाम से त्यौहार मनाने की तैयारियां कर रही है और तुम...ठहरे निखट्टू , आलसी कहीं के। चलो, जल्दी उठो , अनाप-शनाप मत आज न कहो न सुनो, ..उठो..उठो भी। "

वह मुंह पर चादर ओढ़कर सो गया। न दीवाली मनाई, न मिठाई खाई। सुबह उठते ही अपने टिकट के छपे नम्बर का मिलान अख़बार में छपे नम्बरों से मिलान करने लगा।

सहसा जोर से उछला और चीखा, " आ गई! ...आ गई !…"महालक्ष्मी, हमारे घर...आ गई ! "

पत्नी मुंह में कपड़ा ठूंसे हंसने लगी । अगले ही पल कहने लगी," देखो जी, हमारी "महालक्ष्मी की पूजा का असर। तुम पूजा हर साल करते थे तो 'ऋणता' विराजती थी साल भर। अब से हम ही हर बरस अकेले 'महालक्ष्मी पूजन' करेंगे। वाह! धन्य हो, देवी !, जय हो, जय हो, जय हो,  तुम्हारे रुपांतरण की ।"

                       शशि दीपक कपूर

0 टिप्पणियाँ

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.