बैगा जनजाति की लोक कथाएँ -3.राजकुंवर और तेली की बिटिया - डॉ.विजय चौरसिया

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3.राजकुंवर और तेली की बिटिया डां.विजय चौरसिया एक राजा था। उसका नाम शेर सिंह था। उसका एक बेटा था। वह बचपन से ही एक तेली की बेटी रुपैनी के साथ...

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3.राजकुंवर और तेली की बिटिया

डां.विजय चौरसिया

एक राजा था। उसका नाम शेर सिंह था। उसका एक बेटा था। वह बचपन से ही एक तेली की बेटी रुपैनी के साथ खेलता - कूदता था। जिसके कारण बड़े होने पर दोनों आपस में प्रेम करने लगे। एक दिन राजकुमार एक साधु के पास गया। वह तेली की बेटी भी उसी साधु के पास पहुंची। राजकुमार को नहीं मालूम था कि रुपैनी उसी साधु के पास जाने वाली है। दोनों साधु की कुटिया में मिले। दोनों ने साधु के यहां जाकर पूजा - पाठ किया और अपनी मुराद पूरी करने के लिए साधु से वरदान मांगा। तब साधु ने कहा आज मैं तुमको किसी भी प्रकार का वरदान नहीं दे सकता। तुम दोनों कल सुबह मुर्गा के बोलते ही मेरी कुटिया में आ जाना।

उसके बाद दोनों साधु की कुटिया से जाने लगे। अब दोनों एक साथ चलने लगते हैं। रास्ते में जोर से ऑधी - पानी एक साथ आ गए। वह दोनों पानी से बचने के लिए एक झोपड़ी में घुस जाते हैं। उसी समय एक बैल भी उस झोपड़ी में आ गया। बहुत देर तक पानी गिरता रहा। दोनों पानी बंद होने की रास्ता देखते रहे। पानी गिरना बंद नहीं हुआ। वे दोनों उस झोपड़ी के अंदर सो गए। परंतु दोनों एक साथ नहीं सोये। राजकुमार एक कोने में सोया तो रुपैनी दूसरे कोने में सोई। बैल भी उन दोनों के बीच में जाकर बैठ गया। राजकुमार ने अपने और रुपैनी के बीच अपनी तलवार और कुछ लकड़ियां रख दी थीं।

बहुत सुबह पानी बंद हो गया और मुर्गा बोलने के कुछ समय बाद दोनों उठ गए। दोनों जल्दी - जल्दी साधु की कुटिया में पहुंचे। वहां पर दोनों ने पूजा की और साधु से आशीर्वाद मांगा। तो साधु ने कहा अब बहुत समय हो गया तुम लोग मुर्गा के बोलते ही क्यों नहीं आये। राजकुमार ने विनती की और कहा महराज जोर से आंधी तूफान आ गया था! जिसके कारण हम लोग घर भी नहीं गए और बगीचा में एक झोपड़ी के अंदर रात भर सोते रहे। यह सुनकर साधु नाराज हो गया। वह कहने लगाः तुम दोनों जब एक साथ सोए थे। तो तुमने जरुर पाप किया होगा। राजकुमार और रुपैनी ने कहा महराज हम लोगों ने कोई पाप नहीं किया। हम दोनों के बीच एक तलवार,एक लकड़ी और एक बैल था। साधु ने बैल से पूछा : क्या यह लोग सच बोल रहे हैं। तो बैल ने कहा : हां महाराज ये लोग सच बोल रहे हैं। तब साधु ने उन दोनों पर हल्दी ड़ाली और तुलसी के सात फेरे दिलाकर दोनों का विवाह कर दिया।

उसके बाद राजकुमार और रुपैनी वहां से अपने घर जाने लगे। तब रास्ते में नगर के लोगों ने देखा कि राजकुमार तेलीन के साथ नगर में घूम रहा है। राजा के सैनिकों ने यह बात राजा को बता दी। राजा ने अपने बेटे को बुलाया और कहा कि तुमने रुपैनी के साथ पाप किया है। राजकुमार ने कहा नहीं मैं कसम खाकर कहता हूं कि मैंने उसकी बेटी के साथ किसी भी प्रकार का पाप नहीं किया है। राजकुमार ने अपने पिताजी से यह नहीं बताया कि उसकी शादी तेलीन के साथ हो गयी है। क्योंकि दोनों ने नगर में प्रवेश करते समय हल्दी वाले कपड़ों को उतारकर दूसरे कपड़े पहन लिए थे।

राजा ने राजकुमार से कहा कि तुम तेलीन से विवाह मत करना। इससे हमारी बहुत बदनामी होगी। क्योंकि वह दूसरी जाति की है। फिर राजा ने उस तेली को बुलाया और कहा कि वह अपनी लड़की का विवाह जल्दी कहीं पर कर दे। तेली ने कहा मैंने अपनी बेटी के विवाह के लिए लड़का खोज लिया है। तब राजा ने अपने बेटे को बुलाया और कहा बेटा मेरा विचार है कि तुमको अपना राजपाट सौंप दूं। इसलिए मैं चाहता हूं कि तुम एक बार जाकर अपना पूरा राज्य देखकर आओ।

फिर राजकुमार ने अपना घोड़ा निकाला और एक सहीस और एक सिपाही को अपने साथ रख लिया। कुछ दूर चलने के बाद राजकुमार थक गया और एक बड़े पेड़ के नीचे बैठकर आराम करने लगा। उसी दिन रुपैनी की शादी होने वाली थी। रुपैनी ने एक पत्र लिखा और उसे अपने तोता के पैर में बांधकर कहा कि इसे अभी जाकर राजकुमार को ले जाकर दे दे। तोता उड़ गया और राजकुमार के पास उसी पेड़ के ऊपर जाकर बैठ गया और गाना गाने लगा।

बारह वर्ष से मित्र हो

मित्र तुमको बुलाया है

जब सिपाही ने उस तोता को ऐसा गाते सुना तो उसने अपने धनुष से उस तोता को मारने की सोचा पर तोता उस पेड़ के पत्तों में छिप गया। कुछ देर बाद राजकुमार सो कर उठ गया। तो तोता उस पेड़ से उतर कर नीचे आ गया। वह आकर राजकुमार के पास आकर बैठ जाता है। राजकुमार ने उसके पंखों के पास एक पत्र देखा और उसे निकालकर पढ़ने लगा। वह समझ गया कि उसके बाप और सिपाही ने उसे धोखा दिया है। वह नाराज होकर सिपाही को मारने लगता है। इसके बाद सिपाही वहां से भाग जाता है। तब राजकुमार ने रुपैनी के लिए एक पत्र लिखा कि मेरे आते तब तुम घर में ही रहना। ऐसा पत्र लिखकर राजकुमार ने पत्र को तोता के पंखों में बांध दिया। राजकुमार ने तोता से कहा वह जल्दी जाकर पत्र रुपैनी को दे दे।

राजकुमार अपने घर पहुंचने के लिए बहुत जल्दी में था। उसने घोड़ा को निकाला और उसे दौड़ाने लगा। उसी समय उसके घोड़े के पंख लग गए और वह आकाश में उड़ने लगा। कुछ देर में राजकुमार अपने महल में पहुंच गया। महल में जाकर राजकुमार अपने कमरे में चला गया। कुछ देर बाद रुपैनी की बारात निकली। राजकुमार ने जैसे ही बारात देखी तो वह गुस्से में आ गया और अपनी तलवार से सभी बरातियों को मार ड़ाला। राजुकुमार ने दूल्हा और दोषी को छोड़ दिया था। उसने उस दोषी को इसलिए नहीं मारा कि उसने ही साधु के यहां उसकी लगुन पढ़ी थी। उसने बाजा बजाने वालों को भी नहीं मारा। क्योंकि राजकुमार का विचार था कि वह बाजा वाले उसकी शादी में बाजा बजायेंगे। कुछ देर बाद जब उसकी गुस्सा शांत हो गई। तो उसने देखा कि उसने बहुत से आदमियों को अपनी तलवार से काटकर मार दिया है। उसे बहुत दुख हुआ।

तब उसने अपने घर से अमृत पानी और बेल काठ का ड़ंड़ा लाया और सभी को बेल काठ का ड़ंड़ा सुंघाया और सबके मुंह में अमृत का पानी ड़ाला। जिससे सभी बराती जिदा होकर खड़े हो गए। इसके बाद राजकुमार अपने घर वापस आ गया। तेलीन का विवाह हो गया। बराती उसे विदा करके ले गए।

राजकुमार को इतना दुख हुआ कि उसने साधु बनने का विचार कर लिया। उसने राजकुमारों वाली पोशाक उतारी और अपने शरीर में भभूत लगा ली और कंधे मृग छाला ड़ाली और हाथ में कुबरी ड़ंड़ा रखा और साधु का भेष रखकर तेलिन की खोज में चल दिया।

जब राजकुमार उस शहर में पहुंचा जहां रुपैनी अपने पति के साथ रहती थी। तब राजकुमार उस नगर के पहले वाले घर में गया। वहां पर एक बूढ़ी रहती थी। राजकुमार ने उस बूढ़ी से कहा कि वह वहां रहना चाहता है। तो बूढ़ी ने कहा : उसके ही रहने के लिए जगह नहीं है। उसे कहां से रखेगी। तब राजकुमार ने उस बूढ़ी को बीस रुपया दिया तो बूढ़ी ने उसको ऑगन में सोने के लिए जगह दे दी। दूसरे दिन राजकुमार गाते हुये भीख मांगता सारे नगर में घूमते फिर रहा था। वह नगर भर में गाना गाता घूम रहा था किः

राजा शेरसिह का बेटा

जोगी हो गया भैया

मांगता है रुपैनी का दान

उस तेली के नौकर ने जाकर उस तेली को यह विचित्र गाना के बारे में बताया। तो उस तेली ने उस साधु को अपने घर पर बुलाया, घर पर आते ही साधु फिर से वही गाना गाने लगा। तेली उस साधु के गाना को नहीं समझ पाया। परंतु तेली की पहले वाली औरत उसके गाने को समझ गई। उसे अच्छा नहीं लग रहा था की रुपैनी तेली की छोटी औरत बने। तब उसने साधु से कहा कि रुपैनी यहां पर नहीं है! वह ऊपर की अटारी में है। जब साधु को मालूम हो गया कि रुपैनी कहां है। तो वह तेली से कहता है कि उसे आज की रात अपने घर में रुकने का सहारा दे दे। तेली ने उसे ऑगन में रहने के लिए कह दिया। तब साधु ने तेली से कहा तुम अपने घर के ऑगन में एक राम बांस लगा लो। तब तेली ने ऑगन में राम बांस लगा लिया। राम बांस रात को रुपैनी की खिड़की तक बढ़ गया। साधु बना राजकुमार रात को उस बांस के सहारे खिड़की तक चढ़ गया और रुपैनी के कमरे में जाकर उसे अपने साथ भागने के लिए कहने लगा। रुपैनी भी उसके साथ भागने के लिए तैयार हो गई। साधु ने उससे कहा कि तुम अपनी ऊंगली को खिड़की के बाहर दिखा देना ! तो मैं समझ जाऊंगा कि तुम तैयार हो गई हो। ऐसा कहकर वह नीचे वापस ऑगन में आ गया।

रात को रुपैनी ने अपनी अंगुली खिड़की के बाहर निकाल दी! जिससे राजकुमार समझ गया कि रुपैनी तैयार हो गई है। इसके बाद राजकुमार फिर से उसी बांस के सहारे उस खिड़की के पास आया। उसने अपने ड़ंड़ा को निकाला और उसको सांप बना दिया। उस सांप ने रुपैनी की ऊंगली में काट दिया। जिससे रुपैनी की मृत्यू हो गई। साधु बना राजकुमार उस बांस के सहारे नीचे उतरा और रात को ही उस बूढ़ी के पास वापस आ गया । जिसके पास रुका था।

दूसरे दिन सुबह तेली ने देखा कि उसकी पत्नी की मृत्यू हो गई है! तो वह सुबह - सबह उसकी लाश लेकर अंतिम संस्कार के लिए शमसान घाट ले गया। उसी समय साधु बना राजकुमार रुपैनी की लाश के पास आया और तेली से कहा मैं इसका अंतिम संस्कार कर दूंगा। तुम लोग यहां से चले जाओ। सभी लोग चले गये। तब साधु ने रुपैनी के मुंह में अमृत पानी ड़ाला और बेल काठ का ड़ंड़ा सुंघाया! जिससे रुपैनी फिर से जिंदा हो गई। साधु ने रुपैनी को चिता से उठाया और वहां से दोनों भाग गए। कुछ दूर खड़ा रुपैनी का पति यह सब देख रहा था। उसका पति उन दोनों के पीछे दौड़ा। साधु उस बूढ़ी के घर पर आ गया। वह तेली भी उसके पीछे - पीछे आ गया! उस बूढ़ी ने उस तेली को बगीचा में बुलाया। तेली बगीचा में गया। तो उस बूढ़ी ने एक गन्ना तोड़कर उस तेली को खाने दिया। बूढ़ी ने उस तेली से पूछा : यह गन्ना कैसा लगा। तेली ने कहा बहुत ही मीठा था अच्छा लगा। बूढ़ी ने दूसरा टुकड़ा काटा और उसे खाने दिया फिर पूछा : अब यह टुकड़ा कैसा लगा। तब तेली कहता है यह पहले वाले से कम मीठा लग रहा है। तब बूढ़ी ने गन्ना के सबसे ऊपर के भाग को तोड़ कर खाने को दिया और पूछा यह कैसा लगा। तब तेली ने कहाः यह बिलकुल भी मीठा नहीं है। ऐसा कह कर उसने उस गन्ना को थूक दिया। तब उस बूढ़ी ने कहा : जैसा यह गन्ना फुनगी की तरफ से बिलकुल मीठा नहीं लग रहा है। उसी तरह तुम्हारी औरत है। जिसे वह साधु लेकर भाग गया है। क्योंकि वह उस साधु को चाहती है। इसलिए तुम उसे वापस लेने मत जाओ। तेली उस बूढ़ी की सलाह मान गया और उसे वापस लेने नहीं गया। राजकुमार अपने राज्य में लौट गया। जब वह राजकुमार अपने महल में पहुंचा तब राजा ने अपना राज्य राजकुमार के हाथों में सौंप दिया। राजकुमार उस राज्य में राज करने लगा और अपनी पत्नी तेली की लड़की रुपैनी के साथ खुशी - खुशी रहने लगा।

कहानी अब समाप्त हो गई। कहानी बतलाने वाला झूठा है। इस कहानी पर विश्वास करने वाला गंवार। जिस प्रकार से राजकुमार के जीवन में खुशी आई उसी प्रकार सबके जीवन में खुशी आये।

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नाम

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रचनाकार: बैगा जनजाति की लोक कथाएँ -3.राजकुंवर और तेली की बिटिया - डॉ.विजय चौरसिया
बैगा जनजाति की लोक कथाएँ -3.राजकुंवर और तेली की बिटिया - डॉ.विजय चौरसिया
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