नाटक लेखन पुरस्कार आयोजन 2020 - प्रविष्टि क्र. 10 - मिट्टी की खुशबू - ज्योति झा

SHARE:

अधिक जानकारी के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक / टैप करें - रचनाकार.ऑर्ग नाटक / एकांकी / रेडियो नाटक लेखन पुरस्कार आयोजन 2020 प्रविष्टि क्र. 10 ...

अधिक जानकारी के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक / टैप करें -

रचनाकार.ऑर्ग नाटक / एकांकी / रेडियो नाटक लेखन पुरस्कार आयोजन 2020

प्रविष्टि क्र. 10 - मिट्टी की खुशबू

- ज्योति झा


पहला दृश्य

स्थान – काफी हाऊस

रम्या – दीदी अगर आपने कह दिया है तो मिल लूँगी एक बार पर आप तो माँ पापा

को जानती हैं न .मिलने का मतलब हाँ न समझ ले ,इसलिए पहले ही उन्हें अच्छे से समझा दीजियेगा कि उत्तर नकारात्मक ही होगा , मुझे तो अपने इस छोटे से शहर से दूर जाने के नाम पर ही पता नहीं क्या क्या होने लगता है ? इस शहर की मिट्टी में ही मेरी आत्मा रची बसी है और आप तो .....

प्रिया – कौन कह रहा है तुम्हें शादी करने ? किन्तु तुम्हें भी तो मालूम ही है न कि आजकल भारत में भी ज्यादातर लड़के अपने रिश्ते कालेज में ही तय कर लेते हैं ,सो तो तुमने किया नहीं .इसलिए तो मैं मारीशस से , जीजू का मौसेरा भाई है ,देखा जाना घर है .

रम्या – हाँ कालेज में कोई ऐसा लगा ही नहीं ,किसी को देखकर कोई भाव ही नहीं जागे ..मन के तार को किसी ने छुआ ही नहीं .

प्रिया – क्यों ? एक था न जो तुम्हें पसंद था ,क्या तो नाम था उसका ....

रम्या – हाँ सोनल ,पर उस वर्ष मैं दो दो विषय में फेल हो गई और मुझे लगा मैं इस रिश्ते में अगर आगे बढ़ी तो इतनी मेहनत से किये गये सारे प्रयास पर पानी फिर जाएगा और उससे दूर हो गई .

प्रिया – हाँ सब याद है ,घर में सब कितने दुखी थे ,कोई सोच भी तो नहीं सकता था कि तुम दो दो विषय में फेल हो जाओगी .

रम्या -

हाँ पर उसके बाद तुम्हें तो याद हैं न किस तरह पागलों की भाँति मैं रात रात भर पढ़ती रहती थी ,न कहीं जाना ,न कोई मौज मस्ती ?

प्रिया - लेकिन तुमने खूब मेहनत भी तो किया था उसके बाद .ऋतु की शादी में भी नहीं गई थी .मौसा मौसी कितने नाराज हुए थे .ऋतु ने तो कितने दिनों तक तुमसे बातचीत बंद रखा था .

रम्या - हाँ ,माँ भी कितनी नाराज थी मुझसे .

प्रिया – हाँ ,पर रिजल्ट निकलने के बाद वही सबसे ज्यादा खुश भी तो थी ,

रम्या – हाँ दीदी ,आज अधिकांश जानने वाले लोग मुझसे ईर्ष्या करते हैं पर वे कहाँ जानते हैं कि मैंने कितना कुछ त्याग किया है यहाँ तक पहुँचने के लिए .

प्रिया – हाँ पर तुम आदर्श भी तो हो कई आंटियाँ अपने बच्चों को तुमसे मिलने भी तो लेकर आती हैं .

रम्या – हाँ शायद सभी सही कहते हैं कि ईश्वर किसी को भी हर सुख नहीं देते हैं ,पर दी मैं खुश हूँ ,अपनी इस जिन्दगी से .शादी ही तो सब कुछ नहीं है न , .मेरी कितनी सहेलियाँ तो शादी करने के बाद भी अकेली है ,मीनू ,सोना अर्पिता तीनों का तलाक हो चुका है ,नेहा अलग ही रहती है , तो मैं ही ठीक हूँ न ,मजे से माँ पापा के पास रहती हूँ अगले वर्ष बत्तीस की हो जाऊँगी ,नाहक तुम परेशान रहती हो .

प्रिया - तुम्हारी कुछ सहेलियों का नहीं बना इसका मतलब ये तो नहीं है न कि तुम शादी ही न करो ,फिर तनु और पारुल को देखो कितनी खुश हैं वे .अभी इस उम्र में नहीं की तो फिर आगे जाकर पछताने के अलावा कोई चारा नहीं रहेगा ,और हर वक्त माँ पापा कितने तनाव में रहते हैं , जानती हो न ? क्या उनकी इच्छा कुछ भी नहीं है तुम्हारे लिए ?”

रम्या – ठीक है ,मिल लूँगी , पर अजीब सा लगता है .

प्रिया – कोई बात नहीं शुरू में यह सब सबको अजीब ही लगता है ,सिर्फ मिलने के लिए ही तो कह रही हूँ न .

रम्या - ठीक है पर मिलने के बाद अगर मैंने मना किया तो कोई मुझसे कुछ भी नहीं पूछेगा

प्रिया – “ खुश होते हुए .” ओके डन.

दूसरा दृश्य

{ स्थान – घर का सजा सजाया बैठक

दरवाजे पर दस्तक होती है ,प्रिया दरवाजा खोलती है .}

प्रिया –अरे आओ , आओ विनोद ,कैसे हो ?

विनोद –ठीक हूँ भाभी ,आप कैसी हैं ?

प्रिया – मजे में हूँ ,मायके का मजा ले रही हूँ ,

विनोद – हाँ इस बार आप काफी दिनों के बाद आई हैं .

प्रिया – ये है मेरी छोटी बहन रम्या .

विनोद –झेंपता हुआ हाँ ,हैलो

प्रिया –तुम बैठो मैं चाय लेकर आती हूँ .

रम्या – नहीं दीदी आप बैठिये ,मैं चाय लेकर आती हूँ .

प्रिया –तुमसे मिलने आया है मुझसे नहीं “ हँसती हुई चली जाती है .”

{दोनों में बातचीत होती है ,थोड़ी ही देर में प्रिया आती है चाय का ट्रे लेकर }

प्रिया –

लो तुम चाय पीते पीते बातें करो . “ कहती हुई दोनों की ओर देखती है ,दोनों मुस्कुरा रहे हैं .”

रम्या – दीदी मुझे विनोद पसंद है .

विनोद और रम्या एक साथ “ हम राजी हैं .”

प्रिया - क्या सच ?

रम्या – हाँ दीदी सच.

विनोद केवल मुस्कुराता है .

प्रिया - “ लगभग चिल्लाकर .” माँ पापा शादी की तैयारी शुरू कीजिये ,

“ माँ पापा आते हैं विनोद पैर छूता है .वे आशीर्वाद देते हैं .”

तीसरा दृश्य

स्थान –मारीशस के ग्रां बे , समुद्र का किनारा ”

“ छह महीने बीत चुके हैं .

प्रिया – बहुत देर कर दी तुम्हारे भाई ने ...

राकेश –तुम्हारी बहन को सजने में बहुत समय लगता है .उसपर से तुमने उसे कुछ बनाने को भी कह दिया है ,

“ तभी विनोद की गाड़ी सामने आकर आकर रूकती है ,रम्या और विनोद गाड़ी से सामान उतारते हैं .”

रम्या – दीदी मैं कुर्सी लाना भूल गई .

प्रिया – कोई बात नहीं .चादर बिछा देंगे ,हम दोनों चादर पर बैठ जाएँगे

रम्या –लाओ मैं बिछा दूँ .कहाँ है चादर ?

प्रिया – उस बड़े वाले हरे बैग में ,

“ चादर बिछाकर रम्या खाने का सामान निकाल कर रख देती है और बैठ जाती है .”

विनोद – भाभी कोक या जूस क्या लेंगी आप ?

प्रिया – मैं तो आज बीयर पीऊँगी ,बहुत ठंढ है .

राकेश – तुम्हारी भाभी पूरी पियक्कड़ हो गई है ,

प्रिया – वाह पहले जब नहीं पीती थी तब सुनती थी ,अब पीने लगी हूँ तब भी तुम्हें चैन नहीं .

“ रम्या को छोड़ सभी हँसते हैं , रम्या उदास सी आँखों से बहते समुद्र की ओर देख रही है .”

प्रिया – रम्या क्या सोच रही हो ?

रम्या – कुछ नहीं दी .मैं सोच रही थी गरम गरम अदरक वाली चाय मिल जाती तो कितना मजा आता ?

राकेश – विनोद चल पहले थोड़ा पैर गीला कर आएँ ,फिर बैठेंगे .

“ वे दोनों चले जाते हैं .”

प्रिया – रम्या एक बात सच सच बताओ ,तुम्हारे रिश्ते में सब कुछ सामान्य हैं न ?

रम्या – हाँ दीदी ऐसे क्यों पूछ रही हो ?

प्रिया – ऐसे ही

, विनोद ठीक से तो रहता है न , कोई लड़ाई झगड़ा तो .....

.रम्या – नहीं तो ,

नहीं दीदी ,पर क्यों पूछ रही हो ऐसे सवाल ?

प्रिया –क्योंकि तुम्हारे चेहरे पर जो पुलक के भाव होने चाहिए वह मैं नहीं देख पाती हूँ ,तुम्हारा हँसता ,खेलता ,प्रफ्फुल्लित चेहरा हमेशा मुरझाया सा लगता है कोई बात है तो बताओ ,मैं बात करूँगी .

रम्या – नहीं कोई बात नहीं है .

प्रिया –फिर तुम खुश खुश क्यों नहीं दिखती हो ? क्या तुम खुश नहीं हो यहाँ पर ?

रम्या “ कुछ देर चुप रहती है फिर अपलक शांत समुद्र की ओर देखती हुई कहती है .” - हाँ ,मुझे कोई तकलीफ तो नहीं है , किन्तु मैं खुश नहीं हूँ यहाँ पर .यहाँ सब कुछ है पर गति नहीं है , यहाँ सब कुछ रुका रुका सा ,थमा थमा सा लगता है ,सागर के पानी को भी देखो न , बाँध कर रोक दिया गया है , कहीं कोई शोरगुल नहीं ,गरम समोसे की खुशबू नहीं ,गोलगप्पे के दोनों से गिरते हुए इमली पानी की खटास नहीं ,होली के रंग नहीं ,होलिका दहन की ज्याला नहीं , दीवाली की घूम नहीं .

प्रिया – हाँ और सड़क के दोनों ओर फैले कचड़े की दुर्गन्ध नहीं ,सांस लेने में घुटन नहीं , बालू , धूल , मिट्टी नहीं ,सडकों पर रेलमपेल नहीं ,भूखे अधनंगे भीख माँगते भिखारी नहीं .

रम्या – तो क्या हुआ ? हम तो उसके अभ्यस्त हैं न ,और अपना घर बुरा है तो छोड़ थोड़ी न देंगे ,सुधारने की कोशिश करेंगे न ,याद करो दी गर्मी से तपते हुए बदन ,लू से सायं सायं करती हवा के बाद वर्षा की बूंदों की पहली बौछार का मजा , पहली बारिश में भीगते हम कैसे भागा करते थे .यहाँ तो बादल जब तब यों ही बरसते रहते हैं ,सच कहूँ तो मैं अपने देश से दूर रहकर खुश नहीं रह सकती हूँ ,मुझे हर वक्त वहाँ की यादें सताती रहती हैं .

प्रिया – ये तो तुम्हें पहले सोचना चाहिए था न .

रम्या – नहीं सोच सकी , परिवेश इस तरह मन पर हावी होता है, नहीं समझ सकी ,कोशिश कर रही हूँ तुम परेशान मत हो ,

“ तभी दोनों भाई वापस आ गए .”

चौथा दृश्य

स्थान – विनोद के घर का बैठक

विनोद टीवी देख रहा है ,उसकी माँ हाथ में दूध का ग्लास लेकर आती है और उसके पास रखे स्टूल पर रख देती है ,”

शीला – बहू नहीं दीख रही है ,कहीं गई है क्या ?

विनोद – इतनी रात में कहाँ जायेगी ? अपने कमरे में होगी .

शीला – तुम भी जाओ सो जाओ ,

विनोद – हाँ जाता हूँ ,

“ कहकर वहीं बैठा रहता है, फिर उठकर बाहर की ओर चला जाता है ,शीला भी चली जाती है , तभी रम्या आती है ,चुपचाप बैठ जाती है ,छोटी छोटी सिसकियाँ सुनाई पड़ती है जैसे बहुत रोने के बाद चुप हुई हो ,शीला कुछ भूल गई थी फिर से वापस आती है ,

शीला – घबड़ा कर

क्या हुआ बहू? क्या हुआ ?

रम्या – कुछ नहीं माँ .कुछ भी तो नहीं , वह जरा सर्दी हो गई है .

शीला – “ गौर से उसकी ओर देखती हुई .” विनोद के साथ कुछ हुआ क्या ?

रम्या - नही माँ,

“ आँखें पोछती हुई .” चलिए मैं आपकी मदद करती हूँ ,

शीला - नहीं पहले सच बताओ .मुझसे कोई बात हो गई या फिर ..

रम्या – नहीं कुछ भी नहीं हुआ , बस घर की याद आ गई ,

शीला – बेटा बिना बात इस तरह रोना अपशगुन होता है ,कोई कष्ट है तो बताओ मुझे ,मैं भी एक स्त्री हूँ समझूँगी तुम्हे ,तुम्हारी भावनाओं को ,

रम्या –माँ मैं बहुत कोशिश कर रही हूँ पर मेरा मन नहीं लगता है यहाँ पर ,

शीला - “ अचरज से उसे देखती हुई .” ये कैसी बात हुई भला ? पति के पास मन नहीं लगेगा तो और और कहाँ लगेगा ?

रम्या – मुझे अपने देश की बहुत याद आती है ,यहाँ सब कुछ बहुत अलग है .

शीला – सब कुछ ,यानि ? पर कितनी ही लडकियाँ यहाँ भारत से आई है, उन्हें तो कुछ भी नहीं लगता ,खुद तुम्हारी दीदी ? कितनी खुश है यहाँ पर .ठीक है ऐसा करो कुछ दिनों के लिए चली जाओ , मिल आओ सबसे ,बात करूँ विनोद से ?

रम्या – नहीं अभी नहीं ,

मैं खुद कर लूँगी .

शीला - ठीक है तुम आराम करो ,रसोई का काम मैं निपटा लूँगी , मुझे आदत है . मुझे मालूम है कि भारत में महरी ही ये सब काम करती है इसलिए तुम्हें आदत नहीं है ,इसके लिए कुछ सोचने की जरूरत नहीं है .

रम्या – ये सही है , पर आप इस तरह सारा दिन काम करती हैं तो मुझे अच्छा नहीं लगता है

शीला – ठीक है रख लेंगे किसी को ,मेरी छोटी भाभी का बहन करती है , काम कह दूँगी उसे ,दूसरी जगह का काम छोडकर यहाँ कर ले ,

“ रम्या अचरज से देखती है .”

शीला – “ हँसकर .” यहाँ ये कोई लज्जा की बात नहीं है ,

“ फिर गम्भीर स्वर से .” – बेटा तुम दोनों की ख़ुशी में ही हमारी ख़ुशी है , विनोद के पापा के जाने के बाद बड़े दुःख भरे दिन बिताये हमने , बड़ी मुश्किल से हमारे घर में खुशियाँ वापस आई हैं ,विनोद तुम्हें बहुत प्यार करता है ,जान से ज्यादा चाहता है तुम्हें ,हो सकता है , तुम्हें समझ नहीं पाता हो ,सो खुलकर बात करो और ...और ....

रम्या – माँ आप निश्चिन्त रहें ,मैं कोशिश कर रही हूँ , सब ठीक हो जाएगा ,

पाँचवाँ दृश्य

स्थान – मारीशस हवाई अड्डा

प्रिया – पहुँचते ही फोन करना . अपना ध्यान रखना ,पहली बार जा रही हो .

रम्या –दीदी मैं कोई बच्ची नहीं हूँ ,आप नाहक परेशान होती हैं .

विनोद –जाते ही अपने लिए नेकलेस खरीद लेना .मैंने पैसे ट्रान्सफर कर दिए हैं , तुम्हारे अकाउंट में .

प्रिया – वाह किस ख़ुशी में भाई ?

विनोद – शादी की वर्षगाँठ पर ले गया था मैं इसे पर यहाँ के डिजाइन पसंद नहीं आये ,इसलिए .

प्रिया – “ मुस्कुराती हुई ” या जल्दी लौट आने के लिए घूस है ,फिर तो मैं भी जाती हूँ रम्या के साथ , बिना लौटने की टिकट लिए ,

“ सभी हँसते हैं ,लेकिन रम्या अनमयस्क भाव से बिना कुछ कहे जल्दी जल्दी अंदर चली जाती है .सभी उसे बाय बाय करते हैं पर वह एक बार भी मुड़कर नहीं देखती है .”

अंतिम दृश्य

स्थान – विनोद के घर का बैठक

“ माँ बेटा बैठे हैं .”

विनोद – माँ बेकार में रम्या का इन्तजार मत करो ,मैं जानता हूँ वह नहीं आएगी ,जाने के लगभग एक महीने हो गये हैं , एक बार भी उसने फोन तक नहीं किया है , मेरे फोन करने पर हाँ या न में जवाब दे देती है बस .

माँ - लेकिन बेटा .मेरा दिल कहता है वह जरूर आएगी .

विनोद - माँ तुम बहुत भोली हो ,वह तय करके ही गई थी अन्यथा वापिस का टिकट नहीं लेती ? उसने अबतक गिफ्ट भी नहीं खरीदे हैं ,कितनी बार मैंने कहा ,

माँ - पर बेटा ..?

विनोद - “ उदास स्वर से ” माँ मेरे प्यार में कुछ कमी रह गई शायद .या फिर उसे समझ न सका ,तुम जितनी जल्दी इस बात को मान लो उतना ही हमारे लिए अच्छा है ,

फोन की घंटी बजती है ,विनोद फोन उठाता है - हैलो , “चहकता हुआ ,”- हाँ हाँ कैसी हो तुम ? क्या ...? सच .....?

“ ख़ुशी से उठकर टहलने लगता है ,बातें करते करते बाहर चला जाता है , फिर अंदर आकर माँ को गले से लगा लेता है – माँ रम्या आ रही है परसों की फ़्लाइट से ,

माँ

“ चेहरे पर पुलक के भाव .” - क्या सच ?

विनोद – हाँ उसी का फोन था

माँ - मैंने कहा न था एक स्त्री ही दूसरी स्त्री को समझ सकती है , वह तुमसे बेहद

प्यार करती है ,बस दूसरे देश में एडजस्ट कर पाना उसके लिए थोडा ......

“ विवेक लेकिन सुन नहीं रहा है .”

विवेक -

और और माँ , तुम्हें रम्या का बहुत ख्याल रखना होगा ,

“ माँ जिज्ञासा से बेटे के मुँह की तरफ देखती है .”

विनोद - माँ तुम ...तुम ...

माँ- हाँ हाँ कहो न ..

विनोद –तुम दादी बनने वाली हो ,शीला की आँखों में ख़ुशी के आँसू

विनोद- ये क्या तुम ...

शीला – तू नहीं समझेगा .ये ख़ुशी के आँसू हैं पगले ,चल जा मुझे बहुत सी तैयारियाँ करनी है .

--

पर्दा गिरता है

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: नाटक लेखन पुरस्कार आयोजन 2020 - प्रविष्टि क्र. 10 - मिट्टी की खुशबू - ज्योति झा
नाटक लेखन पुरस्कार आयोजन 2020 - प्रविष्टि क्र. 10 - मिट्टी की खुशबू - ज्योति झा
https://3.bp.blogspot.com/-3rA8zhBejrg/Xd954AGVb3I/AAAAAAABQaU/GZsrV4AMXqsp6k_HfE3ZTBRlMjzL8L89gCK4BGAYYCw/s320/plboekldigliomec-714599.png
https://3.bp.blogspot.com/-3rA8zhBejrg/Xd954AGVb3I/AAAAAAABQaU/GZsrV4AMXqsp6k_HfE3ZTBRlMjzL8L89gCK4BGAYYCw/s72-c/plboekldigliomec-714599.png
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2020/02/2020-9_13.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2020/02/2020-9_13.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content