" यू एन्ड मी ---- द अल्टीमेट ड्रीम ओफ लव" गुजरात की भूमि से उपजा पहला महिला चेट उपन्यास ---- डॉ रानू मुखर्जी

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" यू एन्ड मी ---- द अल्टीमेट ड्रीम ओफ लव" गुजरात की भूमि से उपजा पहला महिला चेट उपन्यास ---- डॉ रानू मुखर्जी समय के साथ साथ मनुष्य...

" यू एन्ड मी ---- द अल्टीमेट ड्रीम ओफ लव" गुजरात की भूमि से उपजा पहला महिला चेट उपन्यास ---- डॉ रानू मुखर्जी

समय के साथ साथ मनुष्य की संवेदनाएं भी बदलती जा रही है और संवेदनाओं के साथ साहित्य का स्वरूप भी बदलता जा रहा है। आज साहित्य का स्वरूप एकरेखीय नहीं है। अनेक विधाएं अभिव्यक्ति का माध्यम बन रही है। इन सभी में चैट उपन्यास उभर कर आई है और हलचल मचा रही है। मेरी जानकारी के अनुसार सूरज प्रकाश जी का " नाट ईक्वल टू लव " इस विधा का पहला उपन्यास है और दूसरे नम्बर पर मल्लिका मुखर्जी का " यू एन्ड मी ---- द अल्टीमेट ड्रीम ओफ लव "आता है।

कुछ उपन्यासकार कथा को विस्तार देने के लिए सामाजिक विषमताओं को प्रधानता देते हैं। कुछ रचनाकार राजनैतिक षडयंत्रों को आधार बनाकर अपने कथा को विस्तार देते हैं। पर मल्लिका मुखर्जी ऐसा कुछ नहीं करती हैं उनके लिए घटनाओं का बाहरी तौर पर कोई अर्थ नहीं है वो अपने को खंगालती है। सालों पहले की दबी चिंगारी को संवेदना के धरातल पर लाकर उसे हवा देती है। और स्पष्ट करती है कि संवेदना के धरातल पर टिका नायक नायिका ईश्वरीय प्रेम कितना और किस प्रकार बनता टूटता और बिखरता है।

मल्लिका मुखर्जी का ताजा प्रकाशित उपन्यास " यू एन्ड मी ---- द अल्टीमेट ड्रीम ओफ लव " को पढकर बेचैनी बहुत दिनों तक बनी रहती है। उपन्यास के कथावस्तु के मूल में अंतर को खंगालने वाले वो मारक भाव हैं जो युवावस्था के एक तरफा खोए हुए प्रेम को अचानक फेस बुक के माध्यम से पा जाने पर होता है। मनःस्थिति के चित्रण को मल्लिका इतने सूक्ष्म रूप से करती है कि अनायास ही मन उसके प्रति संवेदनशीलता से भर उठता है। मल्लिका का अल्हडावस्था का प्रेम सीधे सीधे नहीं जाता। झरने की तरह उसका बहाव विस्तृत हो जाता है और विश्वव्यापी रूप धारण कर पाठक पर स्वत: हावी हो जाता है।

अश्विन मैकवान एक मस्त कलाकार है। अपने क्षेत्र में व्यस्त, जीवन के उतार चढाव से त्रस्त । मल्लिका का निश्छल प्रेम एक रोशनी की जगमगाहट के रूप में उनको मिलती है। मल्लिका ने गहरी संवेदना से भरे शब्दों से मार्मिक भावों से उपन्यास में आए चित्रों को बुना है जो भाषा के अद्भुत जाल में पाठक को बांध तो लेते है ही साथ ही इस तथ्य से ईश्वरीय प्रेम की उष्मता को प्रकाशित भी करते है। मल्लिका के जीवन में पार्थो का आगम एक वरदान है।

मुग्धावस्था का प्रेम पत्थर पर कुरेदकर लिखने जैसा होता है। हवाई महल बनते हैं । हवाई घोडे पर सवार होते है। पर अहसास शाश्वत होता है। निखलास। पवित्र। एक ईश्वरीय देन। शायद ये उन्हीं को नसीब होती है जिनकी आत्मा पवित्र होती है। मल्लिका मुखर्जी (,नन्ही परी,) उनके मुग्धावस्था का प्रेमी अश्विन (, ऐश, ) ऐसे ही कहे अनकहे आत्मीय प्रेम के उतार चढाव पर 13500 कि मी दूरी तय करने में इकतालीस साल लग गए पर । दोनों विवाहित । संसारी । पर पहला प्रेम अपनी जगह स्थिर।

चेट उपन्यास के रूमानियत अंदाज को  मल्लिका मुखर्जी जी ने अपने उपन्यास का आधार बनाया है। भाषा की सरलता, रवानगी और साधारण नौजवान हौसला सब को उन्होंने अपनी अभिव्यक्ति का औजार बनाया। उनके उपन्यास में भारतीय जीवन दर्शन, परिवर्तन की अहंकार विहीन आस्था, सामाजिक जीवन , जीवन के संकल्प, मानवीय पीडा और भविष्य की दृष्टि हर कहीं तरंगायित है। उपन्यास के तथ्य उनके अंतर की कथा को, जागरण की आस्था को और प्रेम की भाव धारा को समेटे हुए है। वास्तविकता का सुन्दर चित्र। अनुभवजन्य भावों को ही इतनी सार्थकता के साथ चित्रित किया जा सकता है। मन मंथन। आत्म मंथन और छटपटाहट को समझने वाला साथी और एक सफल चेट उपन्यास।

मल्लिका जी के चेट उपन्यास का स्वर न केवल अतीत की शक्तिमय चेतना की स्वरलिपि है, बल्कि अपने समय में संघर्षों और आहत सपनों की मर्म भेदी पुकार भी है। अपने प्रेमी की अस्वस्थ के बारे में जानकर मल्लिका कातर हो उठती है। सुदूर विदेश में स्थित अपने प्रेमी के कोलोन कैन्सर दर्द को अपने आँसुओं की अंजली देकर कम करना चाहती है। यह उसकी संवेदनशील मानसिकता प्रमाण है। मल्लिका की कलम से भारतीय आत्मा का पुनराविष्कार हुआ है। अध्यात्मिकता उनकी सबसे बडी ताकत है , जो परंपरा के आवरण को चीरकर जागृत प्रेरणा बन जाती है।

बरसों से अपने अनकहे , दबे प्रेम को न भूलकर , वर्षों बाद फेसबुक के माध्यम से प्रथम प्रेम को ढूंढ कर अपने प्रेमी को अपने प्रेम से अवगत करने का अद्भुत साहस दिखाया है । यह संभव इसलिए हो सका क्योंकि मल्लिका का प्रेम ईश्वरीय वरदान से भूषित है। आन्तरिक प्रेम। पवित्र मानसिकता का उदात्त विस्तार।

जीवन की निरंतरता में सुख - दुख आंख मिचौली करते रहे। कही कुछ निश्चित नहीं है, बंधा हुआ नहीं है। भाग्य का रहस्यमय चक्र चलता रहता है।

इस उपन्यास के नायक पार्थो मुखर्जी हैं। अगर पार्थो मल्लिका के जीवन में नहीं आते तो शायद ही यह उपन्यास लिखा जाता । पार्थो मल्लिका की शक्ति बनकर आए। आन्तरिक शक्ति। साहस। उत्साह। एक अविचल हिमालय ।अपने पूर्ण मानवीय तेजस्विता के साथ। और तभी मल्लिका की कलम से " यू एन्ड मी द अल्टीमेट ड्रीम ओफ लव" का जन्म हुआ। और अधिक नहीं। यह उपन्यास झकझोर कर रख देती है। मल्लिका मुखर्जी जी आपसे अभी और अनेक अपेक्षाएं है। एक अनमोल तोहफ़ा दिया है हिन्दी साहित्य को आपने। स्वागत है। बधाई। नमस्कार। सभी उपन्यासकारों के साथ-साथ और अनेक लेखिकाओं ने अपनी कलम से उपन्यासों में प्रगतिवादी विचारधारा को और अधिक मजबूत किया है।

संदर्भ ग्रंथ----

1. हिन्दी उपन्यासों में नारी -- डॉ शैली रस्तोगी।

2. स्त्रीवाद और महिला उपन्यासकार --- डॉ वैशाली देशपांडे।

3. चित्रा मुदगल - आवा ।

4. अनामिका , बीजाक्षर , पृ . 44.

5. मृदुला गर्ग के कथा साहित्य में नारी --- डॉ रमा नवले ।

डॉ रानू मुखर्जी

A 303 , दर्शनम् सेन्टर पार्क A 303 , परशुराम नगर ,

परशुराम रोड, सूर्या पैलेस के पास

सयाजीगंज। pin - 390020

email - ranumukharji @yahoo.co.in

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डॉ रानू मुखर्जी

A 303 , दर्शनम् सेन्टर पार्क A 303 , परशुराम नगर ,

परशुराम रोड, सूर्या पैलेस के पास

सयाजीगंज। pin - 390020

email - ranumukharji @yahoo.co.in

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परिचय – पत्र

नाम - डॉ. रानू मुखर्जी

जन्म - कलकता

मातृभाषा - बंगला

शिक्षा - एम.ए. (हिंदी), पी.एच.डी.(महाराजा सयाजी राव युनिवर्सिटी,वडोदरा), बी.एड. (भारतीय

शिक्षा परिषद, यु.पी.)

लेखन - हिंदी, बंगला, गुजराती, ओडीया, अँग्रेजी भाषाओं के ज्ञान के कारण आनुवाद कार्य में

संलग्न। स्वरचित कहानी, आलोचना, कविता, लेख आदि हंस (दिल्ली), वागर्थ (कलकता), समकालीन भारतीय साहित्य (दिल्ली), कथाक्रम (दिल्ली), नव भारत (भोपाल), शैली (बिहार), संदर्भ माजरा (जयपुर), शिवानंद वाणी (बनारस), दैनिक जागरण (कानपुर), दक्षिण समाचार (हैदराबाद), नारी अस्मिता (बडौदा),नेपथ्य (भोपाल), भाषासेतु (अहमदाबाद) आदि प्रतिष्ठित पत्र – पत्रिकाओं में प्रकशित। “गुजरात में हिन्दी साहित्य का इतिहास” के लेखन में सहायक।

प्रकाशन - “मध्यकालीन हिंदी गुजराती साखी साहित्य” (शोध ग्रंथ-1998), “किसे पुकारुँ?”(कहानी

संग्रह – 2000), “मोड पर” (कहानी संग्रह – 2001), “नारी चेतना” (आलोचना – 2001), “अबके बिछ्डे ना मिलै” (कहानी संग्रह – 2004), “किसे पुकारुँ?” (गुजराती भाषा में आनुवाद -2008), “बाहर वाला चेहरा” (कहानी संग्रह-2013), “सुरभी” बांग्ला कहानियों का हिन्दी अनुवाद – प्रकाशित, “स्वप्न दुःस्वप्न” तथा “मेमरी लेन” (चिनु मोदी के गुजराती नाटकों का अनुवाद 2017), “बांग्ला नाटय साहित्य तथा रंगमंच का संक्षिप्त इति.” (शिघ्र प्रकाश्य)।

उपलब्धियाँ - हिंदी साहित्य अकादमी गुजरात द्वारा वर्ष 2000 में शोध ग्रंथ “साखी साहित्य” प्रथम

पुरस्कृत, गुजरात साहित्य परिषद द्वारा 2000 में स्वरचित कहानी “मुखौटा” द्वितीय पुरस्कृत, हिंदी साहित्य अकादमी गुजरात द्वारा वर्ष 2002 में स्वरचित कहानी संग्रह “किसे पुकारुँ?” को कहानी विधा के अंतर्गत प्रथम पुरस्कृत, केन्द्रिय हिंदी निदेशालय द्वारा कहानी संग्रह “किसे पुकारुँ?” को अहिंदी भाषी लेखकों को पुरस्कृत करने की योजना के अंतर्गत माननीय प्रधान मंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयीजी के हाथों प्रधान मंत्री निवास में प्र्शस्ति पत्र, शाल, मोमेंटो तथा पचास हजार रु. प्रदान कर 30-04-2003 को सम्मानित किया। वर्ष 2003 में साहित्य अकादमि गुजरात द्वारा पुस्तक “मोड पर” को कहानी विधा के अंतर्गत द्वितीय पुरस्कृत। 2019 में बिहार हिन्दी- साहित्य सम्मेलन द्वारा स्रजनात्मक साहित्य के लिए “ साहित्य सम्मेलन शताब्दी सम्मान “ से सम्मानित किया गया। 2019 में स्रजनलोक प्रकाशन द्वारा गुजराती से हिन्दी में अनुवादित पुस्तक “स्वप्न दुस्वप्न” को “ स्रजनलोक अनुवाद सम्मान” से सम्मनित किया गया।

अन्य उपलब्धियाँ - आकशवाणी (अहमदाबाद-वडोदरा) को वार्ताकार। टी.वी. पर साहित्यिक

पुस्तकों क परिचय कराना।

संपर्क - डॉ. रानू मुखर्जी

A.303.Darshanam Central Park.Pararashuramnagar.

Sayajigaunj.BARODA-390020. GUJARAT. EMAIL-ranumukharji@yahoo.co.in

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. 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श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर 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रचनाकार: " यू एन्ड मी ---- द अल्टीमेट ड्रीम ओफ लव" गुजरात की भूमि से उपजा पहला महिला चेट उपन्यास ---- डॉ रानू मुखर्जी
" यू एन्ड मी ---- द अल्टीमेट ड्रीम ओफ लव" गुजरात की भूमि से उपजा पहला महिला चेट उपन्यास ---- डॉ रानू मुखर्जी
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