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तैयारी वेल टनाटन डे की - हनुमान मुक्त

जिस प्रकार हम भारतीयों ने विदेशी सभ्यता के परिचायक वैलेंटाइन डे को अपनी संस्कृति में समाहित कर लिया है उसी प्रकार मैंने भी वैलेंटाइन डे शब्द को  वेलटनाटन डे कर दिया है।

मेरा मानना है जैसा देश वैसावेश। जब यह हमारे हिंदीभाषी प्रदेशों में आ ही गया है तो क्यों ना इसको हम अपनी सहूलियत के हिसाब से ही बोले और मैं वैलेंटाइन डे को वेल टनाटन डे ही बोलता। मैंने उसका शुद्ध  हिंदी करण कर दिया ।वह अलग बात है लोग हिंदी करने को गलत अर्थ में लेते हैं। मैं वैलेंटाइन डे की हिंदी नहीं कर रहा था और ना ही मेरा कोई ऐसा इरादा था। बहुत बार इरादा होने को भी गलत मान लिया जाता है।

इस वैलेंटाइन डे का मुझे काफी दिनों से इंतजार था ।किसी को प्रपोज करना था। उसने एक दिन बातो ही बातों में मेरी नाक में कमी निकाल दी। कहने लगी ,"आपके नाक कुछ मोटी  है। चेहरे पर कम जंचती है। बस ,तब से ही मेरे दिमाग में नाक ही नाक घूमती रहती।

नाक कोई चश्मे का फ्रेम तो है नहीं, जिसे जब चाहा तब उसे अपने चेहरे का अनुसार बदलवा लिया और ना ही यह कोई सरकार है जिसका 5 साल तक इंतजार करने के बाद दूसरी सरकार बदलने की संभावना ही हो।

नाक तो नाक है। जब रावण की बहन सुर्पनखा ने लक्ष्मण जी को प्रपोज किया तो लक्ष्मण जी ने उसकी नाक ही काट डाली ।जिसने राम रावण का युद्ध करवा दिया । लंका तहस नहस हो गई।  जाने कितने ही महाभारत इस नाक के पीछे होते देखे है।

  नाक को लेकर तो जाने कितने मुहावर रचे बसे हैं। नाक रगड़ना, नाक में दम करना ,नाक भौं सिकोड़ना ,,नाक कटना ,नाक रख लेना, नाक कटी घी तो चाटा ,नाक का बाल होना, नाक काट कर हाथ में देना, नाक में नकेल डालना और भी ना जाने क्या क्या ।

मेरे दिमाग में वैलेंटाइन डे का भूत सवार था। टनाटन तुम्हें देखने के लिए नाक के साथ छेड़छाड़ करवाना आवश्यक था। काफी सोच विचार किया।

नाक की कॉस्मेटिक सर्जरी करवाने की उधेड़बुन में में लगा हुआ था। बहुत सारे विचार आ रहे थे ।मन में थोड़ा बहुत संकोच था। फिर भी संकोच करता कराता मैं  कॉस्मेटिक सर्जरी क्लीनिक पर पहुंच गया।

कॉस्मेटिक सर्जरी  करने वाले डॉक्टर बड़े समझदार होते हैं।रिसेप्शन पर ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए खूबसूरत , सांचे में ढली टना टन सी लड़की को बैठाकर रखते हैं। जिसे देखने और बतियाने के लालच में और उस जैसा अपने आप को बनवाने की चाहत में लोग अपनी सर्जरी करवा ही लेते हैं।

क्लीनिक पर काफी भीड़ थी। वहां सभी लोग अपने वर्तमान चेहरे से असंतुष्ट थे। इसमें  कोई न कोई काट छांट करवाना चाह रहे थे ।चेहरे के पीछे क्या छिपा है, किसने देखा है ।बस टनाटन दिखना है।

उन्हें देखकर मुझे लगा, इतने सारे लोग वेल टनाटन डे की तैयारी में लगे हुए है। मैनाक को लेकर संकोच कर रहा था लेकिन इतनी सारी भीड़ देखकर मेरा यह संकोच आत्मविश्वास में बदल गया। मैं ही ऐसा थोड़ी कर रहा हूं इतने सारे लोग भी ऐसा कर रहे हैं ।मैंने अपनी नाक की कॉस्मेटिक सर्जन करवाने का विचार बना ही लिया।

इतनी सारी भीड़ में पुरुष ही नहीं महिलाएं भी पीछे नहीं थी,उन्हें भी टनाटन बनकर वेलेंटाइन-डे मनाना था बल्कि यूं कहूं कि पुरुषों से ज्यादा महिलाओं की भीड़ थी ज्यादातर सुंदर लड़कियां ,महिलाएं।

आत्मविश्वास से सरोवार मैंअपनी नाक की सर्जरी करवाने के लिए  रिसेप्शनिस्ट के पास जा पहुंचा । रिसेप्शनिस्ट ने मेरी और एक विशेष एंगल से देखा ।

मैंने भी उसकी और देखा ।

वह मुस्कुराई ।

मैं भी मुस्कुराया।

उसने शालीनता से अपने होंठ खोलें। सुंदर दिखने के फायदे गिनाने लगी।

मैं गिनने लगा ।

मेरे मन मस्तिष्क में मेरी वही वैलेंटाइन घूमने लगी ।रिसेप्शनिस्ट कहने लगी, "वैसे, सर्जरी करवाने वालों की लंबी लाइन है लेकिन तुम्हें सिर्फ नाक की ही सर्जरी करवानी है और नाक की सर्जरी करवाने वालों को क्लीनिक पर डॉक्टर्स द्वारा विशेष छूट दी जाती है।

सुनकर मुझे अच्छा लगा।

कि चलो मुझे नाक की सर्जरी करवानी है। विशेष छूट का लाभ मिलेगा । मैं अपनी डेट बुक करता।

इससे पहले ही मुझे जोरों से खिलखिलाने की आवाज सुनाई दी ।

मैंने आवाज की ओर देखा। हंसने वाली को देखकर मैं सन्न रह गया। जैसे मेरी चोरी पकड़ी गई हो।

मेरे पैरों के नीचे की धरती खिसक गई। मेरे मुंह से आवाज नहीं निकल रही थी। हंसने वाली लड़की मेरे पास आ खड़ी खड़ी हो गई और जोरों से बोली,

"बुद्धू, वेल टनाटन डे की तैयारी करने के लिए अपनी नाक की सर्जरी करवाने यहां आ पहुंचे। मैंने तो वैसे ही मजाक में कहा था। मुझे तो तुम्हारी यही नाक बहुत पसंद है और उसने यह कहते हुए मेरी नाक पर चिकोटी ले ली।

मेरे मुंह से निकला  तुम भी।  ।

अरे नहीं !मैं यहां कोई कॉस्मेटिक सर्जरी करवाने नहीं आई बल्कि तुम्हें सर्जरी करवाने से रोकने आई हूं। तुम्हारे दोस्त ने कहा था कि तुम अपनी नाक कटवाने यहां आए हो ।

तुम्हारी नाक कटे नहीं, इसे रोकने मैं यहां आई हूं। बहुत देर से मैं तुम्हें देख रही थी।

चलो ।मुझे तो तुम वैसे ही बहुत वेल टनाटन लगते हो और मेरा हाथ पकड़ कर वह मुझे खींचती हुई सी बाहर ले आई।

हम दोनों हंसते खिलखिलाते क्लीनिक से बाहर आ गए ।मेरा वेल टनाटन डे मन गया ।मेरी तैयारी धरी की धरी रह गई। बिना नाक कटवाए , मुझे मेरी वैलेंटाइन मिल गई। मैं बहुत खुश था और मेरी वेल टनाटन भी।

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